Wednesday, August 10, 2022

कानपुर में जीका वायरस के 89 केस से हड़कंप, 1 केस कन्नौज में मिला

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पहले कोरोना, फिर डेंगू और अब जीका वायरस। कोई भी बीमारी उत्तर प्रदेश में सिर उठाती है तो कोहराम मचा देती है। प्रदेश की जर्जर सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था और शासन प्रशासन का गैरजिम्मेदाराना रवैया कोढ़ में खाज की तरह काम करता है। फिलहाल उत्तर प्रदेश के कानपुर में जीका वायरस का हमला तेज होता जा रहा है। रविवार को 10 नए मामले सामने आये हैं। इससे पहले शनिवार को 13 नए मरीजों में जीका वायरस की पुष्टि हुई थी। फिलहाल कानपुर शहर में अब तक मिले जीका वायरस संक्रमितों की कुल संख्या 89 हो गई है। वहीं कन्नौज में भी जीका वायरस का एक मामला सामने आया है।

स्क्रीनिंग और कंट्रोल रूम शुरू

सभी नए संक्रमित पहले मिले मरीजों के मोहल्ले या उनके घर के 400 मीटर दायरे में रहने वाले हैं। स्वास्थ्य विभाग ने स्क्रीनिंग और सैम्पल लेने का अभियान सघन कर दिया है। सीएमओ डॉ. नेपाल सिंह के मुताबिक कांटैक्ट ट्रेसिंग टीम पॉजिटिव मरीजों की रिपोर्ट बना रही है। अभी कोई मरीज गम्भीर नहीं है। हालांकि बच्चों को बाल रोग विशेषज्ञों की निगरानी में रखा जा सकता है। इससे पहले 79 पॉजिटिव केस रिपोर्ट किए जा चुके हैं, जिनमें तीन संक्रमित अस्पतालों में आइसोलेट हैं। वहीं, डीएम विशाख जी अय्यर ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निगरानी और वायरस की जांच के लिए घर-घर जाकर नमूने लेना सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं।

डीएम विशाख जी अय्यर ने नगर निगम के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को जीका कंट्रोल रूम में तब्दील करने का आदेश दिया है। एसीएम सप्तम दीपक पाल को उसका नोडल अफसर बनाया गया है। डीएम ने शनिवार देर शाम कंट्रोल रूम जाकर समीक्षा की और कहा कि जीका वायरस के मरीज को कंट्रोल रूम से दो बार फोन करके हाल जाना जाएगा।

जीका के मामले लगतार बढ़ने पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने चिंता जाहिर की है। उनके कार्यालय ने ट्वीट करके कहा है कि कानपुर में जीका वायरस से संक्रमण तेजी से फैल रहा है। ऐसे में विशेष सतर्कता की जरूरत है। डेंगू की टेस्टिंग और तेज की जाए। अस्वस्थ लोगों के उपचार के लिए सभी अस्पतालों में प्रबंध किए गए हैं।

क्या है जीका वायरस

जीका वायरस एक मच्छर जनित बीमारी है, जो एडीज नामक प्रजाति के मच्छर से फैलती है। मच्छरों की यही प्रजाति डेंगू और चिकनगुनिया का भी कारण बनती है। संक्रमित मच्छरों के काटने के अलावा जिन इलाकों में जीका वायरस का प्रकोप हो वहां की यात्रा करने से संक्रमण का ख़तरा हो सकता है। इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति से शारीरिक संबंध बनाने या फिर रक्त के आदान-प्रदान से भी यह संक्रमण हो सकता है। जीका के लक्षण फ्लू से मिलते-जुलते हैं और ज्यादातर लोगों में ये इतने हल्के होते हैं कि उन पर किसी का ध्यान नहीं जाता। 60 फीसदी संक्रमितों में रोग के लक्षण नहीं उभरते। जीका वायरस के शिकार लोगों में अक्सर लक्षण नज़र नहीं आते हैं, या फिर इसके लक्षण बहुत हल्के हो सकते हैं। फिर भी रोगियों में हल्का बुखार, शरीर में दाने और लाल चकत्ते, सिर दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, आंखों में लाली, गुलेन बारी सिंड्रोम, न्यूरोपैथी, आंखों के पीछे दर्द, उल्टी आदि इसके प्रमुख लक्षण हैं।

ऐसे ही लक्षण आमतौर पर डेंगू में भी होते हैं, यही कारण है कि लोगों के लिए इन दोनों में अंतर कर पाना कठिन हो जाता है। गर्भवती महिलाओं के लिए यह अधिक ख़तरनाक है। गर्भवती महिलाओं में जीका वायरस गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है, इससे भ्रूण को भी नुकसान पहुंच सकता है। गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क का विकास नहीं होता। जीका के गंभीर संक्रमण के कारण मस्तिष्क और आंखों को गंभीर क्षति हो सकती है। हालांकि इसकी मृत्यु दर कम बताई जाती है।

जीका वायरस का कोई समुचित इलाज या वैक्सीन अभी नहीं बन पाया है। सुरक्षा ही बचाव का सबसे प्रमुख हथियार है। खुद को मच्छरों के काटने से बचाएं। शरीर को फुल आस्तीन के कपड़ों से ढंके रखें। मच्छरों को घर के आस पास पनपने न दें। गर्भवती महिलाओं को खासतौर पर मच्छरों से बचाएं। घर के टूटे बर्तन, टायर, कूलर में पानी भरा न रहने दें।

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)

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