आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला को उनके डीन पद से आधिकारिक तौर पर निलंबित कर दिया गया है। यह घटनाक्रम द्वितीय वर्ष के इंजीनियरिंग छात्र साहिल वाकोडे द्वारा आत्महत्या करने के तीन दिन बाद सामने आया है।
आईआईटी बॉम्बे ने छात्र साहिल की मौत को लेकर अपने पहले आधिकारिक बयान पर माफी भी मांगी है। संस्थान ने माना है कि जांच पूरी होने से पहले छात्र की मौत से पहले हुई घटनाओं का विवरण देना या उन्हें किसी खास रूप में पेश करना उचित नहीं था। यह माफी ऐसे समय आई है जब साहिल की मौत को लेकर कैंपस में लगातार छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं और संस्थान के खिलाफ गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
तीन दिनों से चल रहे प्रदर्शन के बाद आईआईटी बॉम्बे प्रशासन ने छात्रों की 18 सूत्रीय मांगों पर सहमति जताई है। संस्थान के निदेशक प्रो. शिरीष केदारे ने छात्रों द्वारा रखे गए चार्टर पर हस्ताक्षर किए हैं। छात्रों की प्रमुख मांगों में साहिल की मौत की स्वतंत्र जांच, जांच की अंतरिम रिपोर्ट 30 सितंबर तक और अंतिम रिपोर्ट 15 अक्टूबर तक देने की मांग शामिल है।
इसके अलावा प्रोफेसरों के लिए आचार संहिता बनाने, कैंपस अस्पताल में 24 घंटे मनोचिकित्सक की उपलब्धता सुनिश्चित करने और काउंसलिंग सेवाओं में सुधार की मांग की गई है। छात्रों ने संस्थान के महत्वपूर्ण फैसलों में छात्रों की भागीदारी बढ़ाने की भी मांग रखी है। छात्रों ने कहा है कि यदि मांग पत्र की तारीख से एक महीने के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती हैं तो निदेशक, एसोसिएट डीन और छात्र मामलों के डीन को इस्तीफा देना होगा।
साहिल वाकोडे आईआईटी बॉम्बे के एनर्जी साइंस विभाग के छात्र थे और 18 सितंबर को अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए थे। संस्थान के पहले बयान के मुताबिक, साहिल को उसी दिन परीक्षा के दौरान मोबाइल से नकल करते हुए पकड़ा गया था। इसके कुछ देर बाद उनकी मौत की खबर सामने आई। दूसरी तरफ़, साहिल के पिता रविंद्र वाकोडे ने आरोप लगाया कि फैकल्टी टीचर सूर्यनारायण डुल्ला पिछले करीब तीन महीनों से उनके बेटे को कथित तौर पर जातिसूचक गालियां दे रहे थे और इससे वह परेशान था। पिता ने यह भी आरोप लगाया कि साहिल को झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी जा रही थी।
प्रकरण की जाँच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच करेगी। मृतक के पिता की शिकायत के आधार पर प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
आईआईटी बॉम्बे ने 21 सितंबर को सोशल मीडिया पर जारी अपने नए बयान में कहा कि साहिल की मौत से जुड़े घटनाक्रम और परिस्थितियों की जांच संबंधित अधिकारी कर रहे हैं। संस्थान ने कहा कि जांच जारी रहने के दौरान पहले के बयान में उन घटनाओं को बताना या उनका चरित्र-निर्धारण करना उचित नहीं था, क्योंकि जांच प्रक्रिया के जरिए तथ्यों की पुष्टि अभी बाकी है।
पहले साहिल की मौत के बाद आईआईटी बॉम्बे ने कहा था कि परीक्षा के दौरान उसे मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था और उसने कथित तौर पर प्रश्नपत्र को चैटजीपीटी पर अपलोड कर जवाब हासिल करने की कोशिश की थी। संस्थान ने यह भी कहा था कि उसके खिलाफ तत्काल कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी।
साहिल की मौत के बाद कैंपस में बड़े पैमाने पर छात्र प्रदर्शन हुआ। रिपोर्टों के मुताबिक 400 से ज्यादा छात्र विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुए। छात्रों ने परीक्षा व्यवस्था, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, प्रशासन की जवाबदेही और संस्थान में शिकायतों के निपटारे को लेकर सवाल उठाए। विरोध के चलते चल रही मिड-सेमेस्टर परीक्षाएं भी स्थगित करनी पड़ी थीं। प्रदर्शन धीरे-धीरे साहिल की मौत के तत्काल कारण से आगे बढ़कर संस्थान की व्यापक छात्र-कल्याण व्यवस्था और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों में बदल गया।
साहिल के परिवार ने मामले में न्याय और जवाबदेही की मांग की है। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि साहिल के साथ जातिगत भेदभाव हुआ था।
(जनचौक ब्यूरो)