कॉकरोच जानता पार्टी के तत्वावधान में आयोजित ‘शिक्षा मंत्री हटाओ अभियान’ में देश भर के युवाओं के जत्थे आए, जो कहीं ना कहीं केन्द्रीय शिक्षा नीति से प्रभावित थे या होने की आशंका से ग्रस्त थे। हालांकि सोशल मीडिया पर करोड़ों फालोअर्स में से जंतर मंतर पर जुटने वालों की संख्या हज़ारों में ही थी लेकिन उनमें जो जोश-खरोश था वह ये बता रहा था वे बहुत आक्रोशित हैं। लेकिन आंदोलन के दौरान उनकी सहनशीलता काबिले गौर है।
तारीफ़ तो दिल्ली पुलिस की भी की जानी चाहिए कि उसने अपनी जालिमाना परम्परा को तोड़ते हुए जिस तरह का व्यवहार किया वह आश्चर्य जनक है। हालांकि यह संदेहास्पद भी है। हवाई अड्डे पर दिल्ली पुलिस अधिकारी ने जिस तरह अभिजीत दिपके को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति खुद लाकर दी वह रहस्यमयी है। ऐसा आज तक कभी नहीं हुआ। यह सब क्या विदेश में भारत सरकार की छवि निर्माण का प्रयास था या यह उनके समर्थन का गुप्त राज था। आओ,स्वागत है।
बहरहाल, इस बात पर हर्ष व्यक्त करना चाहिए कि युवा किस मूड में था यह इस आंदोलन में उजागर हो गया। उनकी इकलौती मांग ‘शिक्षा मंत्री हटाओ’ पर कोई असर परिलक्षित नहीं हुआ। वैसे भी हम सब भलीभांति जानते हैं कि भाजपा में इस्तीफा देने का रिवाज़ है ही नहीं। आंदोलन के बीच कुछ सनातनी हिन्दू राष्ट्र भक्त भी पहुंचकर विध्न डालने गए तो उनकी अपनी सरकार ने ही उनकी पकड़ धकड शुरू करवा दी। बदले-बदले हुजूर नज़र आए।
अब ये सवालात लोगों को बेचैन किए हुए है कि क्या सरकार ने अपने चाल चरित्र को बदलने की पहल की है या सीजेपी से वह डर गई है। लेकिन ये दोनों बातें असंभव है। जो सरकार अपने देश की पहलवान बेटियों की बात सुनने की बजाए उन्हें घसीटकर उनका अपमान कर चुकी है जिसने किसानों के साल भर लंबे चले आंदोलन में 700 के लगभग हुई मौतों पर सहृदयता नहीं बख्शी उसमें इतनी नरमी कैसे आ गई?
इसलिए यह आंदोलन शक के घेरे में आ गया है। कहा जा रहा है कि यह अमरीका से मिलकर आयातित जेनजेड आंदोलन तैयार किया गया है। क्योंकि पहले से ही बड़ी तादाद में युवा शिक्षा, रोजगार, फर्जीवाड़ा, लूट और पेपर लीक को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत हैं और भारी पुलिस प्रताड़ना झेल रहे हैं लेकिन आंदोलन जारी हैं। जिसे विपक्ष का सहयोग मिल रहा है। इस ताकत को काक्रोच के बहाने एक पार्टी और आंदोलन बनाना विपक्ष के मूवमेंट को ज़मींदोज़ करने के लिए है।
इस नवजात पार्टी के जल्दबाजी में दिल्ली में आयोजित प्रदर्शन करने की एक और वजह है क्योंकि बिखरा इंडिया गठबंधन फिर एकजुट होने की तैयारी इसी दिन दिल्ली में कर रहा था।
एक और बात है आंदोलन में सिर्फ एक मुद्दा धर्मेंद्र प्रधान क्यों है? जबकि सीजेआई ने युवाओं का अपमान किया जिसके नाम पर काक्रोच बने और एकत्रित हुए हैं। देश की परीक्षाओं के संचालन में भी कई महकमे लगे रहते हैं उन पर भी कार्रवाई सुनिश्चित क्यों नहीं की गई। मान लीजिए प्रधान की जगह कोई और महान आ जाता है तो क्या सब सुधर जाएगा। कदापि नहीं।
इसके लिए भाजपा सरकार, उसका तंत्र और संघ भी उतना ही जिम्मेदार है। क्योंकि भाजपा की केंद्र सरकार में मंत्रियों को कोई अधिकार नहीं दिए गए हैं। शासन और तमाम व्यवस्था सिर्फ दो व्यक्तियों के हाथों में है इसलिए जब तक वहां चोट नहीं की जाती, सब बेमानी है। अगले शनिवार फिर जुटेंगे, त्यागपत्र मांगेंगे। इस तरह मसले हल नहीं होने वाले।
कुल मिलाकर, यह युवाओं को भ्रमित करने, उनके अपने आंदोलनों में बाधा डालने का एक सरकारी सुनिश्चित कार्यक्रम है। इससे खुश होने की ज़रुरत नहीं है।
(सुसंस्कृति परिहार एक्टिविस्ट और टिप्पणीकार हैं।)