महिला आरक्षण बिल को परिसीमन और जनगणना के दायरे से बाहर रख तुरंत पास करे सरकार: महिला संगठनों की मांग

महिला आंदोलन की पुरानी और बुनियादी मांग ‘महिला आरक्षण बिल’ को लेकर आज लखनऊ में प्रमुख महिला व जन संगठनों के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष श्री अजय राय से मुलाक़ात की। डेलीगेशन ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को महिलाओं द्वारा सर्वसम्मति से तैयार एक विशेष प्रस्ताव सौंपा और मांग की कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इस बिल को परिसीमन और जनगणना के दायरे से बाहर रखकर इसी मानसून सत्र में पास कराने के लिए दबाव बनायें।

महिला सगठनों ने बिल के वर्तमान स्वरूप पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि महिला आरक्षण का प्रश्न इतने उतार-चढावों से जूझने के बाद आज एक ऐसे मुकाम पर पहुॅंच गया है, जहाॅं जनगणना और परिसीमन की शर्तो के कारण इसकी अहमियत महिलाओं के लिए लगभग खत्म हो गई है।

प्रतिनिधि मंडल ने चेताया कि यदि जनगणना और परिसीमन जैसी जटिल शर्तो को नहीं हटाया गया, तो बिल अनंत काल के लिए लटक जाएगा और महिलाओं का न्यायसंगत प्रतिनिधित्व केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा। 

मुलाकात के दौरान डेलीगेशन ने कांग्रेस अध्यक्ष के सामने अपनी प्रमुख मांगें रखीं:-

1. नाम में बदलाव: इस बिल का नाम तथाकथित नारी शक्ति वंदन से परिवर्तित कर मूल व स्वाभाविक रूप में रखा जाए। हम महिलाएं वंदना नहीं अधिकार चाहती हैं।

2. शर्तें हटाई जाएं: महिला आरक्षण को जनगणना और परिसीमन के पेंच से पूरी तरह बाहर रखा जाए ताकि यह कानूनी दांव-पेंचों में अनंत काल के लिए न लटके।

3. तत्काल प्रभाव से लागू हो: बिल को इस रूप में बिना किसी भविष्य की तारीख या शर्त के तुरंत पास कराकर लागू किया जाए। 

कांग्रेस अध्यक्ष श्री अजय राय जी ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को बेहद गंभीरता से सुना और उनकी मांगों के प्रति सकारात्मक रूख दिखाया। डेलीगेशन ने उनसे अपील की कि संसद के आगामी मानसून सत्र में कांग्रेस पार्टी और अन्य राजनीतिक दल ठीक उसी लाइन पर इस बिल को पास कराने के लिए दबाव बनाएं, जैसा देश की महिलाएं चाहती हैं। इस संबंध में यह संयुक्त प्रतिनिधिमंडल लगातार अन्य राजनैतिक दलों से भी संपर्क कर रहा है ताकि इस ऐतिहासिक मांग को बिना किसी देरी के जमीनी हकीकत में बदला जा सके। 

इस संयुक्त प्रतिनिधिमंडल में अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति, साझी दुनिया, नेशनल फेडरेशन ऑफइंडियन वूमेन, जनवादी लेखक संघ, ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव विमेंस एसोसिएशन, भाकपा-माले, नेशनल अलायंस ऑफ पीपल्स मूवमेंट्स, और ऑल इंडिया फाॅरवर्ड ब्लाॅक , अखिल भारतीय अग्रगामी महिला समिति समेत कई प्रमुख संगठनों के पदाधिकारी और सदस्य शामिल रहे।  

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)

Leave a Reply