मीलॉर्ड का समय बर्बाद होता है जनता के अधिकारों के दमन की बात सुनने में!

मीलॉर्ड, अभी तक हमारा भी समय बर्बाद ही हुआ है आपके पास न्याय की आस ले कर जाने में!

तो मीलॉर्ड, जब संवैधानिक रास्ते आप ख़ुद बन्द कर रहे हैं जबकि आप के ही ऊपर अन्तिम और सर्वोपरि ज़िम्मेदारी है हमारे संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने की, तो अब सड़क पर ही फ़ैसले होंगे। और, ये बेहद अफ़सोसनाक मन्ज़र होगा। इस दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति के लिये कौन ज़िम्मेदार होगा? मैं कहती हूँ, आप! आप क्या कहेंगे?

मीलॉर्ड, कुछ बातें आपसे कहना चाहूँगी :

आप जिस कुर्सी पर हैं और उसमें आपको मिली जो शान-ओ-शौकत, तनख़्वाह, सुरक्षा इत्यादि है वो हम जनता के ही धन और बल से है। तो, आपकी हमारे प्रति जवाबदेही तो बनती है।

आज जिस समय में हम हैं, उसे दर्ज करने के लिये किसी ह्यूएन सॉन्ग को घोड़े पे चढ़ कर आने और महीनों तक उसे शब्द देने की ज़रूरत नहीं होती है। घटना घटित होते ही वो अनेक जगह दर्ज हो जाती है। तो, आपके निर्णय और आपका जन अधिकारों के प्रति रूख़ न्याय के इतिहास में दर्ज होता जा रहा है। इतिहास और वक़्त आप पर किस तरह का निर्णय देगा, ये आप को बताने की ज़रूरत मैं नहीं समझती। आप इतना तो समझते ही हैं।

हम, सामान्य जनता कीड़े मकौड़े हैं, ये आपकी राय है। मैं बस ये बताना चाहती हूँ कि ये कीड़े मकौड़े जब लामबंद हो के महामारी का रूप लेते हैं तो दवाइयाँ काम नहीं करतीं। 

एक सामान्य मध्यमवर्गीय वृद्ध नागरिक हूँ। आपको ये सब बता के सिर्फ़ अपने नागरिक कर्तव्य का निर्वाह कर रही हूँ। शिक्षक रह चुकी हूँ, और शिक्षक को ये बुरी लत पड़ जाती है कि वो हर किसी को समझाने लगता है। बस इसी लत के तहत ये सब कहा। 

आप अपना सम्मान कर सकें, शुभकामना!

(रूप रेखा वर्मा की फेसबुक वॉल से साभार)

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