प्रशासनिक भवन के सभी गेट खोलने और कुलपति से सार्वजनिक संवाद की मांग को लेकर छात्रों का प्रदर्शन

वर्धा। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में प्रशासनिक भवन के चारों गेट 08 जुलाई से बंद होने के कारण छात्र-छात्राओं एवं शोधार्थियों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासनिक भवन से संबंधित विभिन्न कार्यों के लिए विद्यार्थियों और शोधार्थियों को कार्यालयों तक पहुंचने में कठिनाई हो रही है। विश्वविद्यालय में पहले से ही शोध, छात्रवृत्ति, शैक्षणिक विभागों तथा अन्य प्रशासनिक मामलों से जुड़ी विभिन्न समस्याएं लंबित हैं, ऐसे में प्रशासनिक भवन को बंद रखना छात्रों की समस्याओं को और गंभीर बना रहा है।

इन परिस्थितियों को देखते हुए छात्रों ने पूर्व में सभी छात्र-छात्राओं के बीच 19 अगस्त 2026 को छात्र – छात्राओं के बिच आम सभा कर निर्णय लिया था कि प्रशासनिक भवन के सभी गेट खोले जाएं, प्रशासनिक कार्यों को पूर्व की भांति सुचारू रूप से संचालित किया जाए तथा कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा छात्रों से सार्वजनिक रूप से संवाद करें और विभिन्न समस्याओं पर संवाद करें।

इनमें विश्वविद्यालय में कैंटीन की सुविधा, ज़ेरोक्स की सुविधा, पानी की समस्या, वाटर कूलर की साफ-सफाई तथा उसके फिल्टर और मेम्ब्रेन को समय पर बदलना, 24 घंटे लाइब्रेरी, महिला छात्रावास में कर्फ्यू टाइम पर रोक, हॉस्टल से कक्षा तक वाहन की व्यवस्था, सभी हॉस्टल में मेस की व्यवस्था, हॉस्टल में वातानुकूलित रीडिंग रूम, शिक्षकों की कमी, छात्रों को चिन्हित कर सेमेस्टर बैक लगाना, समय पर विभिन्न शिकायतों का पारदर्शी निवारण आदि शामिल हैं।

छात्रों ने यह भी मांग की है कि विश्वविद्यालय में लंबित विभिन्न समस्याओं के समाधान को लेकर प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन दिया जाए और प्रत्येक समस्या के समाधान की स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की जाए।

इन्हीं मांगों को लेकर छात्रों ने बृहस्पतिवार को प्रशासनिक भवन के समक्ष शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि उनके सवालों और मांगों पर संवाद करने के बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन ने आंदोलन को रोकने के लिए पुलिस बल एवं उनके वरिष्ठ अधिकारियों को बुलाया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों को डराने-धमकाने तथा उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की धमकी दिए जाने का भी आरोप छात्रों ने लगाया है।

छात्रों का कहना है कि उन्हें केवल प्रशासन की ओर से ही नहीं, बल्कि विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों और शिक्षकों के माध्यम से भी विरोध प्रदर्शन से दूर रहने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। छात्रों के अनुसार उन्हें कथित तौर पर यह चेतावनी दी जा रही है कि यदि उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया तो उन्हें परीक्षा में फेल किया जा सकता है अथवा उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

छात्रों ने इस तरह के कथित दबाव और धमकी को गंभीर मामला बताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल इस पर रोक लगाने की मांग की है।

छात्रों का स्पष्ट कहना है कि प्रशासनिक भवन को बंद रखना किसी समस्या का समाधान नहीं है। यदि विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों की किसी मांग या आंदोलन को लेकर आपत्ति है तो उसका समाधान संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए। पुलिस बल की मौजूदगी, कानूनी कार्रवाई की धमकी अथवा शिक्षकों और विभागाध्यक्षों के माध्यम से छात्रों पर दबाव बनाकर उनके सवालों को दबाया नहीं जा सकता।

छात्रों की प्रमुख मांगें हैं कि प्रशासनिक भवन के चारों गेट तत्काल खोले जाएं, पूर्व की भांति सभी प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से संचालित किए जाएं, छात्रों और शोधार्थियों को प्रशासनिक कार्यों के लिए कार्यालयों तक पहुंच की सुविधा दी जाए तथा आंदोलन में शामिल छात्रों को किसी भी प्रकार से डराया-धमकाया या प्रताड़ित न किया जाए।

इसके साथ ही छात्र मांग करते हैं कि कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा सार्वजनिक रूप से छात्रों के बीच आकर उनसे संवाद करें और विश्वविद्यालय में छात्रों एवं शोधार्थियों की विभिन्न समस्याओं पर स्पष्ट बातचीत करें। संवाद के दौरान प्रशासन की ओर से समस्याओं के समाधान को लेकर लिखित आश्वासन दिया जाए तथा प्रत्येक मांग के समाधान के लिए निश्चित समय-सीमा भी लिखित रूप में घोषित की जाए।

छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट किया है कि वे संवाद और समाधान के पक्ष में हैं। उनकी मांग किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय में छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों, शैक्षणिक हितों और प्रशासनिक सुविधाओं से जुड़े सवालों के समाधान की है। प्रशासन को चाहिए कि वह छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनके साथ बैठकर समस्याओं का समाधान करे।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)

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