भाकपा माले सांसद सुदामा प्रसाद ने आरोप लगाया है कि बिहार में बाढ़ प्रभावित आबादी लगातार बढ़ रही है और 15 जिलों में करीब 50 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं।
उन्होंने कहा कि सरकारी स्तर पर प्रभावित लोगों की संख्या के आंकड़े लगातार जारी किए जा रहे हैं, लेकिन बाढ़ से हुई मौतों का समुचित और पारदर्शी आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। भाकपा माले ने अपने स्तर पर भोजपुर, भागलपुर और पटना ग्रामीण के बाढ़ प्रभावित इलाकों में मौतों के आंकड़े जुटाए हैं, जो स्थिति की गंभीरता को सामने रखते हैं।
प्रसाद भाकपा माले की प्रेस वार्ता में बोल रहे थे। प्रेस वार्ता को आरा के सांसद के अलावा पूर्व विधायक गोपाल रविदास तथा भागलपुर जोन प्रभारी मुकेश मुक्त ने भी संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि भोजपुर जिले में अब तक 24 लोगों की बाढ़ के कारण मौत होने की जानकारी मिली है। यह संख्या और अधिक हो सकती है। वहीं भागलपुर जिले में अब तक 10 लोगों की मौत की जानकारी भाकपा माले ने जुटाई है। पुनपुन प्रखंड में भी बाढ़ के कारण अब तक 10 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है।
भाकपा माले नेताओं ने कहा कि 12 सितंबर को भागलपुर जिला प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 114 पंचायतों के 456 गांव बाढ़ से पूरी तरह या आंशिक रूप से प्रभावित थे। करीब 2 लाख 10 हजार परिवारों के लगभग 9 लाख 15 हजार लोग सीधे बाढ़ की चपेट में थे। हजारों घरों में पानी घुस गया है या पानी दरवाजे तक पहुंच चुका है। सैकड़ों एकड़ में लगी मक्का, धान और सब्जियों की फसल बर्बाद हो गई है।
नेताओं ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों को तत्काल भोजन, पीने का पानी, दवा, पशुचारा, नाव और सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने की जरूरत है। लेकिन अनेक इलाकों में राहत कार्य जरूरत के अनुपात में नहीं पहुंच रहा है। जहां राहत कार्य चल भी रहे हैं, वहां राहत सामग्री के वितरण में अनियमितता और लूट की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। बाढ़ जैसी गंभीर आपदा के समय सरकार और प्रशासन को युद्धस्तर पर राहत कार्य चलाना चाहिए, लेकिन जमीनी स्तर पर बड़ी आबादी अब भी मदद का इंतजार कर रही है।
भाकपा माले ने कहा कि बाढ़ से हुई सभी मौतों का जिला एवं प्रखंडवार आधिकारिक आंकड़ा तत्काल सार्वजनिक किया जाए, मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए और बाढ़ प्रभावित हर परिवार तक पर्याप्त राहत सामग्री पहुंचाई जाए। किसानों की बर्बाद फसल का तत्काल सर्वे कर मुआवजा दिया जाए। जिन परिवारों के घर बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाए।
पार्टी ने मांग की कि राहत वितरण में किसी भी तरह की अनियमितता और भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाए तथा पंचायत स्तर पर राहत वितरण की पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। बाढ़ उतरने के बाद बीमारी और महामारी की आशंका को देखते हुए प्रभावित इलाकों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएं।
भाकपा माले ने कहा कि बिहार सरकार बाढ़ की भयावहता को केवल आंकड़ों तक सीमित न रखे, बल्कि जमीन पर राहत और बचाव कार्यों को तेज करे। बाढ़ पीड़ितों को उनके हाल पर छोड़ना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पार्टी ने बाढ़ पीड़ितों की तत्काल मदद, राहत कार्यों में तेजी, बाढ़ से हुई मौतों के वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक करने, मृतकों के परिवारों को मुआवजा देने, फसल एवं मकान क्षति का उचित मुआवजा देने तथा राहत कार्यों में जारी कथित लूट और अनियमितता पर रोक लगाने की मांग को लेकर 18 और 19 सितंबर को पूरे बिहार में राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की।
(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)