बच्चो, साहिबे-आलम माफ़ कर रहे हैं!  

अरे जांबाज़ जेन जेड वालो कुछ तो शर्म करो ना प्लीज। बेचारे साहिबे आलम तुम्हें माफ़ करने तैयार हैं पर एक तुम हो कि अपनी जवानी के गुरुर में ‘बच्चो’ सुनकर उत्तेजित हो गए हो। गाली देने वालों पर ही कुछ रहम कर लो उनकी दिल्ली पुलिस कितनी कुटाई कर रही है घर में, तो हिरासत पर क्या कर डालेगी। गालियों का तो बकौल सुबोध श्रीवास्तव उपयोग भारी क्रोध में हथियार की तरह इस्तेमाल होता है।जो स्वाभाविक है। विधूड़ी की याद तो होगी ही जब सांसद को माफी मिल जाती है।

खुद आपको भी विदेशी नस्ल, बारबाला, पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड, दीदी ओ दीदी कहने पर गांधी परिवार, शशि थरूर की पत्नी और ममता ने माफ़ कर दिया तो बच्चे तो यकीनन माफी के पात्र हैं। कहने की क्या जरूरत? उनका दिल पिघल जाता।

वैसे आपके मीठे बोल लोगों को आगत खतरे से डूबे हुए लगते हैं। क्योंकि जब जब आपने जनता से मीठा बोला है उनके साथ छल हुआ है मसलन 15 करोड़ खाते में जमा होंगे, प्रति वर्ष एक करोड़ बेरोजगारों को नौकरी मिलेगी। उल्टा सब कुछ अपने कारोबारी दोस्त को सौंप दिया।

अब जब लोकतंत्र में वोट चोरी और संवैधानिक पदों पर खरीद फरोख्त की बात बामुश्किल बारह साल में जनता के सामने आई है तब भला जवान बच्चे कैसे सहन कर सकते हैं।राम मंदिर की आड़ में चढ़ावा चोरी ने तो आपके तीर्थाटन वाले लोगों की नींद भी उड़ाई है।भक्त भी आहत हैं।

इसलिए वाकई जनाबे आली आपकी नींद उड़ गई है तथा आधी रात में बोलने की बीमारी हावी हो गई है। सबसे ज़्यादा दुख तो देश की समझदार जेन जेड एवं प्लस वालों को हुआ है जिसके होते आपने डोनाल्ड ट्रम्प के आगे कई बार सरेंडर किया। ऐप्स्टीन फाईल ने भी आपकी महामानव और विश्वगुरु की छवि को आहत किया है।

इन बच्चों ने तो सिर्फ़ पेपर लीक के लिए आवाज़ उठाई थी लेकिन इसके साथ उनके हाथ ऐसे ऐसे मामले आते जा रहे हैं कि वे चुप नहीं रह सकते। इसलिए धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद गृहमंत्री और प्रधानमंत्री के इस्तीफे के लिए जंतर-मंतर अनेकों अवरोधों के बाद फिर तैयार है। अब तो सरकार से आज़ादी को दूसरी आज़ादी कहा जा रहा है। स्वाधीनता दिवस करीब है अब देखना यह है कि क्या सरकार अपनी गलतियों को स्वीकार कर खुद त्यागपत्र देती है?

यह तय है कि छात्र इनके माफ़ करने वाले फार्मूले से साफ इंकार कर रहे हैं क्यों पहले समझौते में ही सरकार खरी नहीं उतरी। वे अडिग हैं और देश की सभी विपक्षी पार्टियां भी इस मौके पर एकजुट होकर भाजपा सरकार बदलने के मूड में है।

परिस्थितियां ऐसी बन चुकी हैं कि साहिबे आलम भी यदि माफी मांगते हैं तो उसे भी कुबूल नहीं किया जाएगा।जेन जेड का यह निर्णय देश हित में है। अभिजीत का आंदोलन लगता है भारत संविधान और लोकतंत्र को मनुवादियों से बचाएगा।

(सुसंस्कृति परिहार एक्टिविस्ट और राजनीतिक टिप्पणीकार हैं।)

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