एनटीए छात्रों के लिए सुविधा के नाम पर बनी संस्था, अब खुद बन गयी बोझ?

नीट का मामला अभी पूरी तरह बीता भी नहीं था कि जून में आयोजित यूजीसी– नेट की परीक्षाओं में भी गड़बड़ियां पायी गयी। 

16 अगस्त की रात फोन बजा, उधर से एक सहपाठी बात कर रहे थे, जिनकी यूजीसी-नेट अंग्रेजी की परीक्षा दोबारा कराने की तारीख 9 सितंबर रखी गई है। इस बार अंग्रेजी के साथ समाजशास्त्र और कॉमर्स की परीक्षा भी फिर से कराई जाएगी। (एनटीए ने इन तीनों विषयों की परीक्षाओं में गंभीर खामियां सामने आने के बाद पुनर्परीक्षा का फैसला लिया है)।

वे बहुत व्यथित होकर बोले, “तीन साल में करीब 20 हजार रुपये केवल नेट की परीक्षा देने में खर्च हो गए। ऊपर से दो बार परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों का मामला सामने आया।”

हालांकि इस बार जब से परीक्षा हुई थी, तभी से प्रश्नपत्रों को देखकर ही कई छात्रों की शिकायतें आनी शुरू हो गई थीं।

अंग्रेजी की परीक्षा पर भी सवाल उठने लगे थे। उम्मीदवारों ने दावा किया कि जून 2026 की परीक्षा में पिछले वर्षों के प्रश्नों की बड़ी संख्या दोहराई गई थी। बाद में सामने आई रिपोर्टों में अंग्रेजी के 150 में से 67 प्रश्नों के पिछले प्रश्नपत्र से हूबहू समान होने का दावा किया गया। 

समाजशास्त्र के एक विद्यार्थी ने बताया कि परीक्षा में कई सवालों और उनकी भाषा को लेकर गंभीर गड़बड़ियां थीं। विद्यार्थियों ने वर्तनी और अनुवाद की गलतियों की शिकायत की। कुछ प्रश्नों में विषय विशेषज्ञों के नाम तक गलत लिखे जाने की बात सामने आई।  

इन शिकायतों के बाद मामले की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की गई। समिति की जांच के आधार पर एनटीए ने अंग्रेजी, समाजशास्त्र और कॉमर्स की परीक्षाएं दोबारा कराने का फैसला किया। इन विषयों की पुनर्परीक्षा 9 और 10 सितंबर को प्रस्तावित है और इसके लिए उम्मीदवारों से कोई अतिरिक्त परीक्षा शुल्क नहीं लिया जाएगा। बाकी 84 विषयों की परीक्षा इससे प्रभावित नहीं होगी। 

एनटीए, एक ऐसी संस्था जो उच्च शिक्षा में प्रवेश और फेलोशिप की परीक्षाओं को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से आयोजित करने के उद्देश्य से गठित हुई थी, आज खुद छात्रों के लिए परेशानी का कारण बनती दिखाई दे रही है। आए दिन किसी न किसी परीक्षा में गड़बड़ी, पेपर लीक या प्रश्नपत्र से जुड़ी शिकायतों की खबरें सामने आती रहती हैं।

कभी आंसर की गलत प्रकाशित होने, कभी परीक्षा स्थगित होने और कभी प्रश्नपत्र से जुड़ी अनियमितताओं के चलते एनटीए की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। 2024 में नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बाद सरकार ने एनटीए में सुधार के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन भी किया था। संसद की एक समिति ने भी एनटीए की परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं परीक्षार्थियों के बीच व्यवस्था को लेकर भरोसा पैदा नहीं करतीं। 

क्या है एनटीए? क्यों हुआ इसका गठन?

एनटीए यानी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी का गठन उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश और फेलोशिप से जुड़ी परीक्षाओं को आयोजित करने के लिए किया गया था। जिस पर 2013 में पहली बार केंद्रीय शिक्षा सलाहकार समिति द्वारा चर्चा की गयी। सरकार ने इसे एक ऐसी विशेषज्ञ, स्वायत्त और आत्मनिर्भर संस्था के रूप में स्थापित करने का उद्देश्य रखा था, जो परीक्षाओं में दक्षता, पारदर्शिता और त्रुटिरहित व्यवस्था सुनिश्चित कर सके। 

इसके गठन से पहले अलग-अलग संस्थाओं और विश्वविद्यालयों द्वारा कई प्रवेश परीक्षाएं आयोजित की जाती थीं। एनटीए के माध्यम से देशभर में कई राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं को एक विशेषज्ञ एजेंसी के जरिए आयोजित करने की व्यवस्था विकसित की गई। इसका उद्देश्य परीक्षा संचालन में एकरूपता और बेहतर मानक स्थापित करना था।

एनटीए को लेकर चर्चा 2017 में केंद्र सरकार के बजट ऐलान के बाद आगे बढ़ी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 नवंबर 2017 को एनटीए के गठन को मंजूरी दी। इसके बाद एनटीए को एक सोसायटी के रूप में 15 मई 2018 को पंजीकृत किया गया। सितंबर 2018 के सरकारी आदेश में इसे उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने वाली स्वायत्त और आत्मनिर्भर संस्था के रूप में स्थापित किए जाने की पुष्टि की गई।

एनटीए ने शुरुआत में उन परीक्षाओं को संभालना शुरू किया जिन्हें पहले सीबीएसई आयोजित करता था। बाद में इसके दायरे में जेईई मेन, नीट-यूजी, यूजीसी-नेट और सीयूईटी जैसी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षाएं भी आईं। यूजीसी-नेट का आयोजन एनटीए दिसंबर 2018 से कर रहा है। 

जिस संस्था को परीक्षा व्यवस्था के लिए अधिक भरोसेमंद, पारदर्शी और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था, उसमें ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली होने के बावजूद भी पेपर लीक जैसे बड़े मुद्दे कई बार सामने आए। 

हालांकि, तीनों विषयों की परीक्षा तिथि फिर से तय होने के बाद नव–नियुक्त केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रहलाद जोशी ने एनटीए की परीक्षा और उसकी पूरी प्रणाली को लेकर जाँच और बदलाव का निर्देश दिया है। 

इस घटना के अगले दिन ओखला स्थित एनटीए ऑफिस के बाहर एनएसयूआई और लेफ्ट के छात्र संगठनों (एसएफआई, एआईएसए, एआईएसएफ आदि) ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें कई छात्रों को हिरासत में भी लिया गया । इस प्रोटेस्ट में भाग लेने वालों छात्रों ने एनटीए को खत्म करने और परीक्षा में सुधार करने की बात की।

ऐसे में पूरी शिक्षा प्रणाली पर कई सारे सवाल उठते हैं कि प्रधानमंत्री अगर परीक्षा पर चर्चा करने पर इतने पैसे खर्च करते हैं और मेनस्ट्रीम मीडिया भी कवरेज देती तो उसी चरमराई परीक्षा प्रणाली पर क्यों चर्चा नहीं हो पाती। 

एक सरकारी जवाब के मुताबिक (शिक्षा मंत्रालय के लोकसभा में दिए गए लिखित जवाब) , “परीक्षा पे चर्चा” कार्यक्रम के पहले पांच एडिशन पर 28 करोड़ से ज्यादा रुपए खर्च किए गए जिसमें बल्क मैसेजिंग से लेकर सोशल मीडिया प्रमोशन भी शामिल हैं। जिसे लेकर यह भी सवाल उठाये जा रहे हैं कि इस तरह के इवेंट में प्रधानमंत्री द्वारा छात्रों को “एग्जाम वॉरियर” कहकर बुलाया जाता है वहीं दूसरी तरह एग्जाम लीक होने पर कोई जवाबदेही नहीं होती।

(तस्वीर : साभार सोशल मीडिया से)

(अभिषेक मिश्रा स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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