Thursday, October 6, 2022

बुलंदशहर हत्या-रेप मामला: दबाव के बाद पुलिस हुई सक्रिय, लेकिन मामले को दिया नया ट्विस्ट, प्रियंका का दौरा

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बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के छेतारी थाने के अंतर्गत आने वाले एक गांव डिबाई ग़ालिबपुर में 21 जनवरी को हाथरस जैसी एक और घटना को अंजाम दिया गया। 21 जनवरी को लोधी समुदाय की एक 16 वर्षीय नाबालिग किशोरी का अपहरण कर लिया जाता है, और बलात्कार के बाद उसकी गोली मारकर हत्या कर दी जाती है। बलात्कार और हत्या के इस जघन्य घटना को गांव के प्रधान के स्वामित्व वाले ट्यूबवेल के पास अंजाम गया। आज कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी इलाके का दौरा किया और उन्होंने पीड़िता के परिजनों से मुलाकात की।

पीड़िता के परिवार वालों का इस बारे में कहना है कि पुलिस के दबाव के चलते आधी रात को ही आनन-फानन में लड़की के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। लड़की पिछड़ी जाति से संबद्ध लोधी समुदाय की है और बलात्कार के मुख्य आरोपी के रूप में सौरभ शर्मा (ब्राह्मण) का नाम आ रहा है। मामला ब्राह्मण बनाम लोधी राजपूत का बनता जा रहा है। सीओ वंदना शर्मा का बयान है कि दो लोगों को अब तक इस मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। पीड़िता के परिवार सहित ग्रामीणों में भारी आक्रोश है, और उनकी बस एक ही मांग है कि पिंकी लोधी को न्याय दो, पिंकी लोधी को न्याय दो।

पीड़िता की मां ने बताया कि पुलिस घर आयी और उसने बताया कि आपकी पिंकी का प्रधान के टोले के पास गोली मारकर हत्या कर दी गयी है। वहां पहुंचने पर पुलिस ने बेटी का मुंह तक नहीं देखने दिया और धक्का मार कर मुझे पीछे गिरा दिया। फिर लाश को जबरन अपने कब्जे में ले लिया। और शव को गाड़ी में रख कर चल दिए। फिर बाद में कुछ पुलिस वाले मेरे घर पर आए और उन्होंने पूछा कि कहां हैं तुम्हारे बेटे? बेटी का शव पुलिस के साथ आया और पुलिस के साथ ही रहा। उसने किसी अनहोनी का डर दिखाकर रात में ही उसका जबरन अंतिम संस्कार करवा दिया।

पीड़ित परिवार की वकील लखनऊ उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाली लक्ष्मी राजपूत का कहना है कि “21 जनवरी को ऐसी जघन्य घटना घटने के बाद भी पुलिस की ओर से कोई सक्रियता नहीं दिखाई गयी। घटना के तकरीबन 11 दिनों के बाद जाकर कहीं 1 फरवरी को पुलिस के द्वारा पीड़िता के परिवार का बयान दर्ज किया गया। पुलिस की ओर से किसी तरह लेन-देन के जरिये समझौता कर लेने की मंशा बनी हुई है। एक बार फिर से हाथरस कांड को दुहराया गया है।” उन्होंने यह भी कहा कि हम पीड़िता और उसके परिवार को न्याय दिलाएंगे। यह मेरा व्यक्तिगत और अधिवक्ता संघ का वादा है।

इसी प्रकार 1 फरवरी को जब इस मामले में विभिन्न समाचार पत्रों सहित राष्ट्रीय लोकदल अध्यक्ष एवं भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद के द्वारा इस लोमहर्षक घटना पर सोशल मीडिया के जरिये ट्वीट किया गया तो उसके बाद से इस मुद्दे पर सोशल मीडिया और समाचार पत्रों में बड़ी उथल-पुथल मचनी शुरू हो गई।

पुलिस के जवान।

मंगलवार को स्थानीय लोगों की ओर से इस विषय पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। जिसमें मामले की जांच पर पुलिस की भूमिका पर प्रश्नचिन्ह खड़े किये गए। विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए और मामले के तूल पकड़ लेने की आशंका को देखते हुए डिबाई पुलिस स्टेशन से उसे जहांगीराबाद कोतवाली के थाना प्रमुख को स्थानांतरित कर दिया गया है। साथ ही पुलिस प्रशासन की ओर से एक के बाद एक ट्वीट और बयान दिए जा रहे हैं।

पीड़िता की मां।

पुलिस प्रशासन की तरफ से इस पूरे मामले की एक अलग ही तस्वीर पेश की जा रही है। पुलिस के अनुसार यह मामला पुराने प्रेम-प्रसंग का है। लड़के को इस बीच लड़की की बेवफाई का शक पैदा हो गया था, और ट्यूबवेल के पास उसने लड़की की गोली मारकर हत्या कर दी और खुद की भी जान लेने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहा। पुलिस के मुताबिक जांच में बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई है। परिवार वालों ने बिना पुलिस के दबाव के खुद ही लड़की का अंतिम दाह संस्कार कर दिया है।

मामले में अब सक्रियता दिखाते हुए बुलंदशहर पुलिस की ओर से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह का एक वीडियो संदेश ट्वीट के जरिये टैग किया गया, “सोशल मीडिया पर कतिपय ट्विटर चलाने वाले लोगों के द्वारा थाना छतारी की एक घटना को बहुत ही गलत तरीके से और बिना तथ्यों के अलग-अलग तरीके से ट्वीट किया जा रहा है। घटना का क्रम यह है कि 21 जनवरी की यह घटना है। थाना छतारी के धराऊ गाँव के सौरभ शर्मा का प्रेम प्रसंग थाना डिबाई के ग़ालिबपुर गाँव की एक लड़की के साथ था।

उस लड़की का गाँव धराऊ में है, जहाँ से इन दोनों के बीच में संपर्क हुआ था। लड़की अपने ननिहाल में न रह करके अपने मूल गाँव गालिबपुर में रहती है। दोनों गाँवों के बीच में करीब 15-16 किमी की दूरी है। 21 जनवरी को लड़की लड़के और उसके एक साथी के साथ एक मोटरसाइकिल पर बैठकर धराऊ गाँव आई और गाँव के एक ट्यूबवेल पर ये लोग गए, जहाँ पर लड़के के द्वारा लड़की की गोली मारकर हत्या कर दी गई। और अपनी गर्दन और हाथ की नसों को ब्लेड से काटा गया। सूचना प्राप्त होने पर उसे अलीगढ़ भेजा गया, और उसकी जान बच गई और उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है”।

आगे उन्होंने कहा है कि “परिवार ने जो तहरीर दी, उसमें बिना किसी छेड़छाड़ किये उसे दर्ज किया गया। लड़की का अंतिम संस्कार परिवार की मर्जी से स्वतः गंगाघाट कर्णवास पर कर दिया गया था। मीडिया पर कतिपय ट्विटर चलाने वाले लोगों द्वारा यह दर्शाया जा रहा है कि पुलिस द्वारा रात में जबरन अंतिम संस्कार करवा दिया गया। इस बारे में हमारा कहना है कि अंतिम संस्कार के वक्त कोई भी पुलिस कर्मी मौजूद नहीं था, किसी के पास इसका कोई वीडियो साक्ष्य भी नहीं है, वरना लोग उसे भी ट्वीट कर देते।”

मौजूदा विधानसभा चुनावों को देखते हुए, महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर बेहद असंवेदनशील प्रशासन और सरकार के लिए इस मुद्दे को किसी भी तरह से दबाने के प्रयास किये जा रहे हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि क्या परिवार की ओर से लगाये गए आरोपों का सरकार के पास उचित जवाब है। क्या पीड़िता का पोस्टमार्टम हुआ था या नहीं? यदि हुआ था तो उसकी रिपोर्ट घर को दी गई या नहीं? जैसा कि परिवार का आरोप है कि पोस्टमार्टम के बाद परिवार वालों को इस बारे में सूचित किया गया, क्या वह बात सही है? लड़की के परिवार वालों को पुलिस वालों ने क्यों जबरन चुनाव को ध्यान में रखते हुए रात के अँधेरे में अंतिम दाह-संस्कार के लिए दबाव डाला?

इन सबके समाधान के लिए मामले की जांच का काम किसी दूसरे थाने में स्थानांतरित कर देने के बजाय इसकी निष्पक्ष जांच के जरिये ही संभव है। देखना है आने वाले कुछ दिनों में इस मामले में सरकार और प्रशासन का क्या रुख होता है, क्योंकि यह पहले चरण में पश्चिमी यूपी में होने वाले चुनावों में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है।

प्रियंका गांधी पीड़िता के परिवार के साथ।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के दौरे को इसी नजरिये से देखा जा रहा है। आज उन्होंने वहां जाकर पीड़िता के परिजनों से मुलाकात की। पीड़ित परिवार ने प्रियंका गांधी को अपना दर्द सुनाया। उन्होंने बताया कि पुलिस ने जबरन शव जला दिया। इसके साथ ही FIR में बलात्कार की धारा भी नहीं लगाई। प्रियंका गांधी ने कहा कि वह उनके न्याय की लड़ाई लड़ेंगी।

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)

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