Friday, December 2, 2022

भोजपुर: पुलिस कस्टडी में महिला की मौत से लोगों का फूटा गुस्सा, दो पुलिसकर्मी निलंबित

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बिहार के भोजपुर जिला अंतर्गत पीरो थाना में 12 सितंबर को चार दिनों से रखी गई एक महिला की मौत से पूरे क्षेत्र में पुलिस के प्रति आक्रोश पैदा हो गया है। बता दें कि 8 सितंबर को महिला को एक हत्या के संदेह में उसके घर से उठाकर थाने ले आया गया था। 12 सितंबर की सुबह उसकी लाश शौचालय स्थित खिड़की के ग्रिल से लटकी पाई गई।

सूत्रों का दावा है कि इस दौरान चार दिनों तक उसे पीरो थाना परिसर स्थित एक महिला सिपाही के क्वार्टर में रखकर उससे पूछताछ की जा रही थी। यह सब नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा था। नियमानुसार किसी भी संदिग्ध या आरोपित को पुलिस 24 घंटे से अधिक समय तक अपनी हिरासत में नहीं रख सकती है। हिरासत में लिए गए व्यक्ति को 24 घंटे के अंदर न्यायालय में पेश किए जाने का प्रावधान है। लेकिन यहां इस मामले में पुलिस अपनी मनमर्जी चलाती रही। अंतत: उसकी मौत हो गई। 8 सितंबर को बिहार में महिलाओं का बड़ा त्योहार तीज था।

सवाल यह है कि पुलिस हिरासत में महिला के साथ ऐसा क्‍या हुआ जिसके बाद उसने अपनी जिंदगी खत्‍म करने का फैसला कर लिया। बताते चलें कि थाने लाई गई महिला शोभा देवी को महिला सिपाही के थाना परिसर स्थित एलएस क्वार्टर में रखा गया था। उसकी सुरक्षा के लिए तीन महिला सिपाहियों नैना, प्रियंका व खुशबू की ड्यूटी लगाई गई थी। 12 सितंबर की सुबह सभी महिला सिपाही गहरी नींद में सो रही थीं, तभी मौका पाकर शोभा ने शौचालय स्थित खिड़की के ग्रिल में सफेद गमछा बांधकर अपनी इहलीला समाप्त कर ली। महिला सिपाहियों की जब नींद खुली तो शौचालय का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। उन्होंने इसकी सूचना तत्काल थानाध्यक्ष व अन्य सहयोगी पुलिस कर्मियों को दी।

बता दें कि पीरो थाना अंतर्गत मोथी गांव निवासी ग्रामीण चिकित्सक मंतोष कुमार आर्य की हत्या के मामले में पीरो पुलिस ने महिला के अलावा उसके एक बेटे और हत्याकांड के नामजद अभियुक्त रजेयां गांव निवासी वीरेंद्र राम को भी आठ सितंबर से ही हिरासत में रखा था। मृतक मंतोष कुमार के तीन चचेरे भाइयों मंजय कुमार, अरविंद कुमार व नीरज कुमार को संदेह के आधार पर पुलिस ने नौ सितंबर को मोथी गांव स्थित उनके घर से पुलिस ने उठाया था। ये तीनों युवक भी चार दिन से पुलिस की हिरासत में थे।

पीरो पुलिस की हिरासत में मरी महिला चार जवान बेटों और एक बेटी की मां थी। मृतका के चार पुत्र विकास कुमार, आकाश कुमार, प्रकाश कुमार, मंगल कुमार एवं एक पुत्री पुतुल कुमारी हैं। महिला के दो बेटे गुजरात के राजकोट में प्राइवेट जॉब करते हैं। महिला की इकलौती बेटी की शादी हो चुकी है। पुलिस को शक था कि महिला ग्रामीण चिकित्सक मंतोष कुमार आर्य की हत्या में शामिल है।

बेटा बोला : मां से मिलने नहीं दे रही थी पुलिस, मारपीट का भी आरोप

थाने में महिला के खुदकुशी मामले में पीरो पुलिस पर सवाल उठने लगे हैं। लोग पुलिस पर महिला की मारपीट कर हत्या करने के आरोप लगाने लगे हैं। थानाध्यक्ष सहित थाने के सभी दोषी पुलिसकर्मियों को सस्पेंड करते हुए सभी के खिलाफ हत्या का मुकदमा करने की मांग तेज हो गयी है। इधर, एसपी की ओर से भी इस मामले में 24 घंटे में जांच रिपोर्ट तलब की गयी है। बताया जा रहा है कि तीज के दिन मोथी गांव निवासी मुन्ना प्रसाद की पत्नी शोभा देवी को ग्रामीण चिकित्सक मंतोष कुमार की हत्या के मामले में पुलिस थाने लायी थी। उसके बेटे प्रकाश कुमार को भी उसी दिन हिरासत में लिये जाने की बात कही जा रही है। पुलिस दोनों से हत्या के बारे में क्लू लेने का प्रयास कर रही थी। शनिवार सुबह महिला ने खुदकुशी कर ली।

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इधर, धोबहां ओपी क्षेत्र के सलेमपुर गांव निवासी और महिला के भाई मुन्ना प्रसाद ने पुलिस पर कस्टडी में मारपीट कर बहन की हत्या करने का आरोप लगाया है। उनका कहना था कि उसकी बहन को काफी प्रताड़ित किया जा रहा था। इसी दौरान पीट-पीटकर हत्या कर दी गयी। वहीं पुत्र प्रकाश कुमार ने बताया कि पुलिस दोनों को अलग-अलग रखी थी। उसे मां से मिलने नहीं दिया जा रहा था। पुलिस हत्या के बारे में पूछताछ कर रही थी। नहीं बताने पर उससे मारपीट कर रही थी। हालांकि एसपी विनय तिवारी ने महिला के बेटे को हिरासत में लिये जाने से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि पीरो एसडीपीओ अशोक कुमार आजाद से 24 घंटे में जांच रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।

वहीं घटना के बाद थाने में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। इससे पुलिस हंगामे को लेकर आशंकित हो गयी। इसके बाद एहतियात के तौर पर वहां आधा दर्जन थानों की पुलिस कैंप कर रही है। इससे पीरो थाना परिसर छावनी बन गया था। कैम्प करने वाले थानों में अगिआंव बाजार, हसन बाजार चरपोखरी, तरारी और इमादपुर थानों की पुलिस शामिल थी।

बता दें कि पीरो थाना क्षेत्र के मोथी गांव निवासी ग्रामीण चिकित्सक मंतोष कुमार बीते माह 29 अगस्त से लापता चल रहे थे। उनका शव एक सितंबर की शाम मोथी गांव में ही एक बंद पड़े घर से बरामद किया गया था। इसके बाद उनके भाई शेखर सुमन की ओर से एक नामजद और अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी। उसमें व्यावसायिक प्रतिद्वंदिता में साजिश के तहत जहरीला पदार्थ खिला कर हत्या करने का आरोप लगाया गया था। उसी मामले में पुलिस ने संदेह के आधार पर महिला शोभा देवी को हिरासत में लिया था।

पीरो पुलिस की हिरासत में एक महिला के कथित रूप से आत्महत्या किए जाने के मामले में भाकपा माले नेताओं ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में है। माले कार्यकर्ताओं ने पुलिस हिरासत में महिला की मौत की घटना की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए रविवार की शाम पीरो और जितौरा बाजार में विरोध मार्च निकाला। मार्च में शामिल भाकपा माले नेता व पूर्व विधायक चन्द्रदीप सिंह, मनीर आलम, दुदुन सिंह, दिनेश्वर राम और अरुण कुमार सिंह व अन्य ने कहा कि मृतका शोभा देवी को पुलिस ने आठ सितंबर की रात उसके बेटे के साथ हिरासत में लिया था।

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नियमानुसार आरोपित को 24 घंटे से अधिक हिरासत में नहीं रखा जा सकता, लेकिन पीरो पुलिस ने महिला को चार दिनों से हिरासत में लेकर हाजत में रखने की बजाय महिला सिपाही के डेरे में अनधिकृत रूप से रखा। इस दौरान उसे लगातार प्रताड़ित किया गया। महिला आरोपित को इस तरह 24 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा जाना, प्राथमिकी अभियुक्त नहीं होने के बावजूद उसे प्रताड़ित करना पुलिस की मनमानी व अमानवीय आचरण का परिचायक है। पीरो थानाध्यक्ष दूसरे मामलों में भी अपनी मनमानी चलाते आ रहे हैं। पीड़ित पक्ष को ही डराना-धमकाना थानाध्यक्ष की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है। माले नेताओं ने दोषी थानाध्यक्ष पर हत्या का मुकदमा चलाने की मांग करते हुए कहा कि इसके लिए भाकपा माले चरणबद्ध आंदोलन करेगी।

 पीरो थाना परिसर में महिला की हुई मौत की न्यायिक जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है। पूर्व विधायक भाई दिनेश ने न्यायिक जांच की मांग मुख्यमंत्री से की है। उन्होंने भोजपुर एसपी से स्वयं अपने स्तर से इस मामले की जांच कर दोषी थानाध्यक्ष के विरुद्ध कार्रवाई की मांग उठाई है। उन्होंने कहा है कि यदि महिला दोषी थी तो उसे गिरफ्तार कर जेल भेज देना चाहिए था। गिरफ्तार करने के बाद तीन- चार दिन तक थाने में रखकर मारपीट करना मानवाधिकार का उल्लंघन है। छात्र राजद के प्रदेश प्रवक्ता भीम यादव ने कहा है कि पुलिस कस्टडी में तीन-चार दिन तक रखी गई महिला की मौत ने भाजपा-जदयू गठजोड़ का असली चेहरा उजागर किया है। उन्होंने एसपी से पीरो थानाध्यक्ष के निलंबन और उनके विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज किये जाने की मांग की है। उधर, इंसाफ मंच के राज्य सचिव कयामुद्दीन अंसारी ने प्रेस बयान जारी कर कहा है कि पीरो थाना प्रभारी ने महिला को आठ सितंबर को गिरफ्तार किया। लॉक-अप में महिला की पीट कर हत्या की गई है। अत: लॉक-अप में महिला की मौत के जिम्मेवार पीरो थाना प्रभारी पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया जाये।

पुलिस कस्टडी में हुई महिला की मौत मामले में पीरो थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर अशोक चौधरी और OD पदाधिकारी SI रामकुमार हेम्ब्रम को निलंबित कर दिया गया है। पीरो डीएसपी की जांच रिपोर्ट के बाद भोजपुर एसपी विनय तिवारी ने कार्रवाई की है। उन्होंने महिला की मौत के बाद उसकी अभिरक्षा में तैनात तीन महिला कांस्टेबल को पहले ही सस्पेंड कर दिया था।

बता दें कि पीरो थाना कांड संख्या 286/21 के अनुसंधान के क्रम में पूछताछ के लिए लाई गई मोथी गांव निवासी मुन्ना प्रसाद की पत्नी शोभा देवी ने पुलिस अभिरक्षा में 12 सितंबर को आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में पीरो के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी द्वारा जांच प्रतिवेदन दिया गया था। जांच प्रतिवेदन में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी ने पीरो थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर अशोक कुमार चौधरी तथा तत्कालीन ओडी पदाधिकारी दारोगा रामकुमार हेम्ब्रम को उनके द्वारा कर्तव्य निर्वहन में घोर लापरवाह एवं अनुशासनहीन पाया।

इधर महिला की मौत के बाद चंद्रवंशी समाज के लोगों ने आज पीरो थाना का घेराव किया। लोगों ने पहले हाथों में तख्ती लेकर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की मांग करते हुए जमकर नारेबाजी की। उसके बाद पीरो थाने का घेराव किया।

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