Monday, August 15, 2022

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जन्मशती पर विशेष: साहिर न होते तो फ़ासिज़्म और क़रीब होता

(साहिर, 8 मार्च 1921- 28 अक्तूबर 1980; जन्म-शती साल)    साहिर लुधियानवी की बेशुमार लोकप्रियता से रश्क और रंजिश रखने वाली अदीबों की दुनिया में एक बहस उछाली जाती रही है कि साहिर रोमेंटिक शाइर हैं या पॉलिटिकल। यह भी...

वर्मा मलिक की पुण्यतिथि: गीतकार, हर शादी में बजता है जिसका गाना

हिंदी फिल्मी दुनिया के एक सदी से ज्यादा के इतिहास में कई गीतकार और संगीतकारों ने अपने गीत-संगीत से फिल्मों के आंगन को गुल-ओ-गुलज़ार किया है। इस लंबे सफर में बहुत से गीतकार ऐसे रहे, जिन्होंने तुलनात्मक तौर पर बेहद...

शकील बदायूंनी की जयंती पर विशेष: ’‘मैं ‘शकील’ दिल का हूं तर्जुमा…’’

‘‘मैं ‘शकील’ दिल का हूं तर्जुमा, कि मुहब्बतों का हूं राज़दां/मुझे फ़क्र है मेरी शायरी, मेरी जिंदगी से जुदा नहीं’’ शायर शकील बदायूंनी की गजल का यह शानदार शेर वाकई उनकी पूरी जिंदगी और फलसफे की तर्जुमानी करता है।...
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कार्पोरेट्स के लाखों करोड़ की कर्जा माफ़ी क्या रेवड़ियां नहीं हैं मी लार्ड!

उच्चतम न्यायालय ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि फ्रीबीज या रेवड़ियां क्या हैं, मुफ्तखोरी की परिभाषा क्या है? सुप्रीम...
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