Wednesday, October 5, 2022

बंगाल की निर्भया: सीबीआई को सौंपी गयी जांच

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल की निर्भया की जांच सीबीआई को सौंप दी है। इस कांड में हाथरस का अक्श नजर आता है तो उन्नाव की झलक भी मिलती है। तृणमूल कांग्रेस के एक प्रभावशाली नेता के पुत्र ने अपने साथियों के साथ नदिया जिले के हासखाली में एक 14 वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार किया है। इसके अलावा हाईकोर्ट की दस महिला एडवोकेट ने नाबालिग बच्चियों से बलात्कार की घटनाओं की जांच सीबीआई से कराने की मांग करते हुए एक जनहित याचिका दायर की है।

हासखाली कि इस दरिंदगी का ब्योरा देने से पहले हम तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व सांसद सौगत राय के एक बयान का जिक्र करते हैं। उन्होंने कहा है कि बंगाल में एक महिला मुख्यमंत्री हैं और इस तरह की एक भी घटना राज्य सरकार को शर्मसार करती है। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना पर लीपापोती करने में कोई कसर नहीं छोड़ा है। तृणमूल कांग्रेस के नेता समर कायली के पुत्र सोहेल ने अपने जन्मदिन के जश्न को मनाने के लिए कक्षा नौ की इस छात्रा को भी आमंत्रित किया था। रात को सोहेल और उसके साथियों ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया और देर रात को रक्त से लथपथ बच्ची को उसके घर छोड़ आए। बच्ची को इस हाल में देखकर उसकी मां बदहवास हो गई। इतना ही नहीं इस बच्ची को अस्पताल ले जाने से भी रोका गया। लाचार मां एक लोकल डॉक्टर के पास गई और जब तक दवा ले आई तब तक बच्ची मर चुकी थी। 

बच्ची के मरने की खबर सुनते ही सोहेल और उसके साथी गांव में वापस आए और चादर में लिपटी हुई बच्ची को घर से बाहर गांव में ही जला दिया। जंगल से कुछ लकड़ियां और पत्तियों को इकट्ठा किया और फिर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा दिया। मां-बाप को बच्ची की लाश के पास फटकने भी नहीं दिया। हाथरस और उन्नाव में तो कुछ ऐसा ही हुआ था। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस मामले में सख्त कार्रवाई करने के बजाए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की तरह बचाव करने में लग गईं। उनकी दलील थी कि हो सकता है दोनों में प्रेम रहा हो और सरकार किसी को प्रेम करने से भला कैसे रोक सकती है। फिर कहती हैं कि हो सकता है वह गर्भवती रही हो और अधिक रक्तस्राव होने के कारण मर गई हो। आगे सवाल करती हैं कि घटना के छह दिनों बाद एफआईआर दर्ज क्यों दर्ज कराई गई।

इस मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने के बाद हुई सुनवाई में मुख्यमंत्री को उनके सारे सवालों के जवाब मिलने के साथ ही सरकार भी नंगी हो गई। मुख्यमंत्री का सवाल है कि एफआईआर दर्ज करने में देर क्यों हुई। घटना चार अप्रैल को घटी थी और एफआईआर दस अप्रैल को दर्ज की गई थी। इसकी वजह यह है कि तृणमूल कांग्रेस के नेता के प्रताप के कारण ही पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की थी। इसके साथ ही परिवार को थाने में जाने से रोकने के लिए धमकी भी दी गई थी। बात जब मीडिया में फैल गई तब एफ आईआरदर्ज करना मजबूरी हो गई। चीफ जस्टिस ने अपने आदेश में कहा है कि केस डायरी में यह उल्लेख नहीं किया गया है कि एफआईआर दर्ज करने में देर क्यों हुई। चीफ जस्टिस सवाल करते हैं कि बच्ची को इलाज की सुविधा क्यों नहीं उपलब्ध कराई गई तो सरकारी वकील जवाब देते हैं कि अस्पताल वहां से 11 किलोमीटर दूर है। चीफ जस्टिस सवाल करते हैं कि लाश श्मशान में क्यों नहीं जलाई गई तो जवाब आता है कि गांव में लोग इसी तरह लाश का अंतिम संस्कार करते हैं। इस झूठ का खुलासा करते हुए चीफ जस्टिस ने अपने आदेश में कहा है कि गांव से थोड़ी दूर पर श्यामनगर अतिरपुर में श्मशान घाट है जहां लोग शव का अंतिम संस्कार करते हैं।

चीफ जस्टिस सवाल करते हैं कि क्या सोहेल के कमरे से, यानी जहां सामूहिक बलात्कार हुआ था, वहां से खून और वीर्य की दाग़ लगी चादर जब्त की गई। सरकारी एडवोकेट कहते हैं कि चादर जब्त की गई पर यह वह चादर नहीं है। यानी पुलिस ने खानापूरी की थी। दूसरी तरफ सीबीआई ने दो दिन पहले दाग लगी चादर को बरामद किया है। चीफ जस्टिस ने अपने आदेश में कहा है कि निष्पक्ष जांच और पीड़िता के परिवार सहित आम लोगों में भरोसा पैदा करने के लिए यह जांच सीबीआई को सौंपी जाती है।

पर भरोसा कैसे हो। हाईकोर्ट की एडवोकेट मैरि दत्त और एडवोकेट अमृता पांडे सहित करीब दस महिला एडवोकेट ने सामूहिक बलात्कार के चार मामलों का हवाला देते हुए एक जनहित याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि याचिका तैयार करते समय कुछ और नाबालिग बच्चियों से बलात्कार की कुछ और घटनाएं घटी हैं जो इसमें शामिल नहीं की जा सकी हैं। इनमें से एक है दरिंदगी की सारी सीमाओं को लांघ जाने वाली मटिया की घटना। इसमें नाबालिग बच्ची से बलात्कार सामूहिक बलात्कार के बाद उसके गुप्तांग में एक छड़ी घुसा दी गई जिस वजह से उसकी आंत क्षत-विक्षत हो गई थी। उसे इलाज के लिए लंबे समय तक कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा है। मालदा के इंग्लिश बाजार में एक महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। इसके अलावा और बांसड्रोनी ओर देगंगा में नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार किया गया। 

इसकी जांच सीबीआई से कराए जाने की अपील की गई थी। पर चीफ जस्टिस ने कोर्ट की मॉनिटरिंग में इसकी जांच कोलकाता की स्पेशल पुलिस कमिश्नर दमयंती सेन को सौंप दी है। एडवोकेट जनरल को यह नाम रास नहीं आया और उन्होंने एक अन्य महिला आईपीएस अफसर सुमन बाला साहू का नाम प्रस्तावित किया पर डिवीजन बेंच ने दमयंती सेन पर ही भरोसा जताया। इसकी एक वजह है। दमयंती सेन को कोलकाता की बहुचर्चित पार्क स्ट्रीट रेप कांड का खुलासा करने की शोहरत हासिल है। जबकि मुख्यमंत्री ने इस रेप कांड को फर्जी बताते हुए साजिश करार दिया था। इसका ईनाम दमयंती सेन को मिला था। उनका तबादला पुलिस के एक बेहद महत्वहीन विभाग में कर दिया गया था।

पर भरोसा कैसे हो। रिपोर्ट लिखे जाते समय खबर मिली कि बीरभूम जिले में विश्वभारती विश्वविद्यालय से कुछ दूरी पर एक 14 वर्षीय आदिवासी बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया है। उधर जलपाईगुड़ी में एक 14 वर्षीय बच्ची ने आग लगाकर खुदकुशी करने की कोशिश की है। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस मामले में पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस के एक नेता विजय राय को गिरफ्तार किया है। आज तक इस बच्ची ने उनके खिलाफ यौनशोषण का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया था। इसे वापस लेने के लिए उस पर दबाव बनाया जा रहा है।इस वजह से उसने खुदकुशी करने की कोशिश की है।

बलात्कार के चार मामलों की सुनवाई के दौरान पैरवी करते हुए एडवोकेट जनरल ने कहा था कि महिलाओं की असुरक्षा के मामले में पहले दिल्ली का नाम आता था पर बंगाल ऐसा नहीं था। हां एजी साहब अब बन गया है।

(कोलकाता से वरिष्ठ पत्रकार जेके सिंह की रिपोर्ट।)

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