व्यंग्यात्मक हास्य राजनीति का हिस्सा : राघव चड्ढा की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि अपने विरुद्ध मानहानिकारक सामग्री को लेकर भाजपा राज्य सभा सदस्य राघव चड्ढा की याचिका पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा का मामला नहीं बनता है।

अदालत ने कहा कि कुछ आपत्तिजनक सामग्री शरारतपूर्ण और उनकी छवि बिगाड़ने जैसी लगती है और अदालत ने दो सप्ताह के भीतर इसे हटाने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा कि व्यंग्यात्मक हास्य राजनीति में अपरिहार्य है और यह अपने आप में गलत या मानहानिकारक नहीं हो जाता।

न्यायाधीश सुब्रह्मण्यम प्रसाद ने कहा कि कथित रूप से जिसे मानहानिकारक बताया गया है, उसमें से अधिकांश सामग्री चड्ढा के राजनीतिक निर्णयों पर व्यंग्यात्मक अभिव्यक्ति लगती है और ऐसे निर्णयों को लेकर आपकी सराहना भी हो सकती है और आलोचना भी।

अदालत ने विभिन्न फैसलों के हवाले से कहा कि सार्वजनिक हस्तियों को थोड़ी मोटी चमड़ी का होना चाहिए।

अप्रैल में चड्ढा आम आदमी पार्टी के छह सदस्यों के साथ भाजपा में शामिल हुए थे, जिसके बाद सोशल मीडिया में उनकी आलोचना हुई थी, मज़ाक़ बनाया गया था और उन पर “पैसे के लिए बिक जाने” समेत आरोप लगे थे। इसीके खिलाफ वह अदालत गए थे।

(जनचौक ब्यूरो)

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