लखनऊ, 17 जुलाई। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पर प्रस्तावित बुलडोजर कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा है कि यह कदम शिक्षा, छात्रों और रोजगार—तीनों के हितों के विरुद्ध होगा। पार्टी ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए जिससे हजारों छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो और शिक्षकों व कर्मचारियों की आजीविका पर संकट आ जाए। सरकार को यूनिवर्सिटी को बचाने का रास्ता निकालना चाहिए, न कि उसे ध्वस्त करने का।
पार्टी के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा नक्शा स्वीकृत न होने का हवाला देते हुए यूनिवर्सिटी के 40 में से 38 भवनों को ध्वस्त करने का आदेश वस्तुतः पूरे शैक्षणिक परिसर को समाप्त करने जैसा है। उन्होंने कहा कि यदि भवन निर्माण संबंधी कोई तकनीकी या कानूनी खामियां हैं तो उनका समाधान विनियमितीकरण अथवा अन्य वैधानिक उपायों से किया जाना चाहिए।
नियमों की आड़ में वर्षों से संचालित एक बड़े उच्च शिक्षण संस्थान को मिटा देना शिक्षा-विरोधी कदम होगा और इससे राष्ट्रीय संसाधनों की भी भारी क्षति होगी।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब देश में उच्च शिक्षा संस्थानों का विस्तार होना चाहिए, तब एक स्थापित विश्वविद्यालय को बुलडोजर से ध्वस्त करने की सोच न केवल अनुचित बल्कि दूरगामी रूप से नुकसानदेह भी है। सरकार को दंडात्मक कार्रवाई के बजाय ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे कानून का पालन भी हो और छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित न हो।
सुधाकर यादव ने आरोप लगाया कि जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई के पीछे केवल प्रशासनिक या कानूनी कारण नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध की भावना भी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि भाजपा लंबे समय से आजम खान को राजनीतिक रूप से निशाना बना रही है और अब उनके द्वारा स्थापित विश्वविद्यालय को भी समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों की कीमत छात्रों और शिक्षा व्यवस्था को नहीं चुकानी चाहिए।
माले नेता ने कहा कि आज देशभर के छात्र शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर रोक, शिक्षा के बढ़ते बाजारीकरण के खिलाफ तथा नई शिक्षा नीति को वापस लेने जैसी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र संगठनों का आंदोलन पिछले 28 दिनों से जारी है और बीस दिनों से भूख हड़ताल भी चल रही है, लेकिन सरकार उनकी मांगों की लगातार उपेक्षा कर रही है।
ऐसे समय में जौहर यूनिवर्सिटी जैसी संस्था को बुलडोजर से ध्वस्त करने की कार्रवाई हजारों छात्रों के भविष्य पर सीधा प्रहार होगी और छात्र-युवा आंदोलन की भावना के भी विपरीत होगी।
भाकपा (माले) ने मांग की कि सरकार बुलडोजर कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाए, वैधानिक समाधान के जरिए सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कराए तथा विश्वविद्यालय, छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करे।
(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)