रविवार 9 अगस्त को भारत छोड़ो आंदोलन के 84 वें दिवस पर अखिल भारतीय किसान महासभा द्वारा साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के तौर पर “कॉर्पोरेट भारत छोड़ो” के नारों के साथ बिहार के भोजपुर जिला अन्तर्गत आरा शहर के पूर्वी रेलवे गुमटी से विरोध मार्च निकाला गया जो शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए आरा रेलवे स्टेशन परिसर पहुंचकर कर सभा में तब्दील हो गया।
मार्च के दौरान अखिल भारतीय किसान महासभा द्वारा “मोदी सरकार अमेरिका के साथ कृषि व्यापार समझौता करना बंद करो,” “सी 2 + 50% एमएसपी की कानूनी गारंटी की जाए,” “सम्राट चौधरी सरकार सैटेलाइट टाउनशिप के नाम पर कृषि भूमि लूटना बंद करो,” “सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना व उसमें लैंडपुलिंग नीति वापस लो,” आदि नारे लगाए गए।
इसके अलावा “टोपो लैंड के नाम पर दियारे की जमीन हड़पना बंद करो,” रैयतों की मालिकाना बहल करो,” “विकास योजनाओं के नाम पर बिना समुचित मुआवजा के कृषि भूमि हड़पना बंद करो,” “सभी किसानों को रासायनिक खाद और उर्वरक सस्ते दामों पर उपलब्ध कराओ,” “रासायनिक खादों और उर्वरकों की कालाबाजारी पर रोक लगाओ,” “नहरों के अंतिम छोर तक पानी की व्यवस्था की करो,” जैसी मांगों के नारे भी लगे।
इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान महासभा के जिलाध्यक्ष व पूर्व विधायक चंद्रदीप सिंह ने कहा कि “अखिल भारतीय किसान महासभा 9 अगस्त 2026 को आज साम्राज्यवाद विरोधी दिवस पर पूरे देश के जिला मुख्यालय शहरों में किसानों को गुलाम बनाने वाली भारत अमेरिका कृषि व्यापार समझौता रद्द कराने व बिहार में सम्राट चौधरी सरकार द्वारा 12 सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना व उसमें लैंड पुलिंग नीति के माध्यम से 4 लाख एकड़ कृषि भूमि कॉर्पोरेट के लिए हड़पने की कोशिश के खिलाफ विरोध मार्च आयोजित कर मोदी और सम्राट चौधरी का पुतला फूंका गया।”
आगे पूर्व विधायक ने कहा कि “भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौते के जरिये भारत की खेती पर अब तक का सबसे बड़ा हमला होने वाला है। इस समझौते के जरिये अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए देश के कृषि बाजार खोले जा रहे हैं। यह समझौता यदि लागू हुआ तो भारत के 85% छोटे व मध्यम किसानों के लिए यह मौत का सौदा साबित होगा। सस्ते आयातित अमेरिकी अनाज, फल, सब्जियों, दुग्ध उत्पादों और पॉल्ट्री उत्पादों की बाढ़ के आगे पहले से घाटे की खेती वाला भारत का किसान कहीं भी नहीं टिक पाएगा और अंततः देश अपनी खाद्य सुरक्षा खो देगा।”
पूर्व विधायक चंद्रदीप सिंह ने कहा कि “दूसरी ओर संकट ग्रस्त कृषि को उबारने के बजाय सरकारें विकास के नाम पर कृषि भूमि की लूट गैर कृषि कार्य हेतु कर रही है। बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने तो 12 सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना व उसमें लैंडपुलिंग नीति के माध्यम से 4 लाख एकड़ से अधिक कृषि भूमि को आडानी के लिए हड़प करने कि योजना पर कार्य कर रही है।इसके अतिरिक्त 1 लाख एकड़ से अधिक कृषि भूमि (अन सर्वे लैंड) के नाम पर लूट लेने की योजना है। देश में यह अब तक का सबसे बड़ा कॉरपोरेट कृषि भूमि हड़प है।”
सभा को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला सचिव राजू यादव ने कहा कि “जिस राज्य में सिर्फ कृषि भूमि ही है और उस पर आबादी के घनत्व का भारी दबाव है। जहाँ पहले ही हाइवे और औद्योगिक कॉरिडोर के नाम पर 6 लाख एकड़ से अधिक कृषि भूमि नष्ट किया जा चुका है। इस तरह से इस बड़े पैमाने पर कृषि भूमि का नष्ट होते जाना आने वाले समय में न सिर्फ जबरदस्त खाद्यान्न संकट को उत्पन्न करेगा बल्कि पर्यावरण संतुलन खो देगा जिसके भयंकर परिणाम होंगे। इसलिए आज हमें अपने कल को बचाने के लिए इन सरकारों के खिलाफ कमर कसना होगा सड़क पर उतरना होगा!अन्यथा कल कुछ नहीं बचेगा।”
(विशद कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)