कलकत्ता हाई कोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले की नंदीग्राम विधानसभा सीट के लिए होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 20 अक्टूबर तक अंतरिम जमानत दे दी।
मिलन प्रधान को अंतरिम जमानत देते हुए जस्टिस तीर्थंकर घोष की सिंगल-जज बेंच ने कहा कि यह जमानत इसलिए दी गई है ताकि वह दूसरे उम्मीदवारों की तरह आजादी से उपचुनाव लड़ सकें और चुनाव प्रचार में हिस्सा ले सकें। जस्टिस घोष ने यह भी साफ किया कि यह अंतरिम जमानत उनके खिलाफ दर्ज सभी छह मामलों के संबंध में है। मिलन पश्चिम बंगाल में बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली तत्कालीन लेफ्ट फ्रंट सरकार के समय नंदीग्राम में जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े 2007 के दो पुराने हत्या के मामलों में उपचुनाव से ठीक पहले 18 सितंबर को गिरफ्तार किए गए थे और न्यायिक हिरासत में थे। उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि 5 अक्टूबर तक थी।
मिलन प्रधान को अंतरिम जमानत देते हुए जस्टिस घोष की बेंच ने उन पर कई शर्तें लगाईं। शर्तों में कहा गया है कि चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के तुरंत बाद मिलन को पूर्वी मिदनापुर जिले के हल्दिया जिला कोर्ट में सरेंडर करना होगा। हर दिन सुबह 8:30 बजे और रात 9:30 बजे संबंधित पुलिस स्टेशन में फोन करना होगा और जांच अधिकारी से बात करनी होगी। जस्टिस घोष की बेंच इस मामले पर 11 अक्टूबर को फिर से सुनवाई करेगी।
मिलन प्रधान को 18 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। यह गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस ऐलान के कुछ घंटों बाद हुई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनका तृणमूल कांग्रेस गुट नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन करेगा। यह घोषणा तृणमूल की उम्मीदवार संचिता डे प्रधान के चुनाव से नाटकीय रूप से नाम वापस लेने के बाद की गई थी। इ
विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल के मौजूदा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दक्षिण कोलकाता की नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। बाद में उन्होंने भवानीपुर सीट अपने पास रखने का फैसला किया, जिसके कारण नंदीग्राम में उपचुनाव कराना पड़ा। नंदीग्राम और मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव 6 अक्टूबर को होंगे और वोटों की गिनती 9 अक्टूबर को होगी।
(जनचौक ब्यूरो)