अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग यानी यूएससीआईआरएफ़ ने भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ आतंकवाद से जुड़े क़ानूनों के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है। आयोग ने उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे अल्पसंख्यकों के बिना ट्रायल ही यूएपीए में जेल में रखे जाने का जिक्र किया है। इसके साथ ही इसने अपनी 2026 की सालाना रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि विदेश विभाग भारत को ‘खास चिंता वाले देश’ यानी सीपीसी के तौर पर घोषित करे। इसने कहा है कि ऐसा इसलिए क्योंकि यहाँ धार्मिक आज़ादी का व्यवस्थित और गंभीर उल्लंघन हो रहा है।
यूएससीआईआरएफ़ ने ताज़ा बयान जारी कर ब्रिटिश-सिख एक्टिविस्ट जगतार सिंह जोहल को करीब नौ साल बाद जमानत मिलने का स्वागत किया है। जगतार सिंह जोहल ब्रिटिश नागरिक हैं, जिन्हें 2017 में पंजाब में गिरफ्तार किया गया। उन पर खालिस्तान लिबरेशन फोर्स से जुड़े टारगेट किलिंग्स और फंडिंग के आरोप हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने नौ साल बाद सात यूएपीए मामलों में जमानत दी। हालाँकि, आयोग ने भारत में धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
यूएससीआईआरएफ़ ने आरोप लगाया कि भारत में आतंकवाद से जुड़े कानूनों का इस्तेमाल धार्मिक अल्पसंख्यकों को हिरासत में रखने और असहमति को दबाने के लिए किया जा रहा है। आयोग ने उमर खालिद और शरजील इमाम समेत अन्य लोगों की रिहाई की भी अपील की है।
यूएससीआईआरएफ़ ने अमेरिकी विदेश विभाग से भारत सरकार के साथ बातचीत कर ऐसे लोगों की रिहाई के लिए दबाव बनाने को कहा है, जिन्हें आयोग धार्मिक स्वतंत्रता या आस्था से जुड़े मामलों में पीड़ित मानता है। आयोग ने अपनी 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में भारत को ‘कंट्री ऑफ पार्टिकुलर कंसर्न यानी सीपीसी घोषित करने की सिफारिश भी दोहराई है।
यूएससीआईआरएफ़ का यह बयान दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा जोहल को जमानत दिए जाने के कुछ दिन बाद आया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने 18 सितंबर 2026 को जोहल को राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा दर्ज सात मामलों में जमानत दी थी। वह 2017 से जेल में थे। अदालत ने लंबे समय तक चली हिरासत और मुकदमों की धीमी रफ्तार समेत कई परिस्थितियों को जमानत के फैसले में ध्यान में रखा।
यूएससीआईआरएफ़ के चेयरमैन आसिफ महमूद ने कहा कि आयोग जोहल को जमानत मिलने का स्वागत करता है, लेकिन उनके लिए अभी पूरी तरह राहत की स्थिति नहीं है।
आयोग के मुताबिक, जमानत की शर्तों के तहत जोहल को अपना पासपोर्ट जमा करना पड़ा है और उन पर मीडिया से बातचीत को लेकर भी प्रतिबंध है। आयोग ने यह भी कहा कि उनके खिलाफ कुछ मामलों में गंभीर आरोप अभी लंबित हैं। जोहल को नवंबर 2017 में पंजाब में उनकी शादी के लिए भारत आने के बाद गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ हत्या और आतंकवाद से जुड़े आरोपों में यूएपीए समेत कई कानूनों के तहत मामले दर्ज किए गए। दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत देते समय यह भी देखा कि इतने लंबे समय में मुकदमे की प्रक्रिया काफी धीमी रही थी।
यूएससीआईआरएफ़ ने जोहल की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ यूएपीए के इस्तेमाल पर सवाल उठाया। आयोग ने दावा किया कि संयुक्त राष्ट्र के कई विशेष रैपोर्टियर पहले भी यूएपीए को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों और भारत की अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों के अनुरूप न होने की बात कह चुके हैं।
आयोग के मुताबिक, गिरफ्तारी से पहले जोहल भारत में सिख समुदाय के मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों पर ब्लॉग लिखते थे। यूएससीआईआरएफ़ ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आने वाली गतिविधि बताया है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये यूएससीआईआरएफ़ के आरोप और आकलन हैं। भारत की अदालतों में जोहल के खिलाफ चल रहे मामलों का अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अलग-अलग मामलों में लंबित या प्रक्रिया में है।
यूएससीआईआरएफ़ ने जगतार सिंह जोहल के मामले को अकेला मामला नहीं बताया। आयोग की उपाध्यक्ष सीसी हिल ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम समेत अन्य लोग भी यूएपीए से जुड़े मामलों में लंबे समय से प्री-ट्रायल हिरासत में हैं। यूएससीआईआरएफ़ ने दावा किया कि इन मामलों में शांतिपूर्ण विरोध और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर आतंकवाद विरोधी कानूनों का इस्तेमाल किया गया है। आयोग ने ऐसे मामलों में बंद लोगों की रिहाई की दिशा में काम करने के लिए अमेरिकी सरकार से भारत के साथ बातचीत करने को कहा है।
यूएससीआईआरएफ़ ने अपने बयान में विदेशों में रहने वाले सिख समुदाय को लेकर भी भारत पर गंभीर आरोप लगाए। आयोग ने उत्तर अमेरिका में सिख समुदाय के सदस्यों के खिलाफ कथित हत्या और हत्या के प्रयासों को ‘ट्रांसनेशनल रिप्रेशन’ यानी सीमा-पार दमन से जोड़ने का दावा किया। आयोग ने कहा कि ऐसे कदमों का उद्देश्य विदेशों में रहने वाले लोगों को डराना, दबाव डालना या परेशान करना हो सकता है।
यूएससीआईआरएफ़ ने अपनी 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में अमेरिकी विदेश विभाग से भारत को कंट्री ऑफ पार्टिकुलर कंसर्न यानी सीपीसी घोषित करने की सिफारिश की है। आयोग का कहना है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन की स्थिति उसके आकलन के मुताबिक व्यवस्थित, लगातार और गंभीर है। यूएससीआईआरएफ़ ने मई में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति पर एक सुनवाई भी की थी और अगस्त में भारत पर एक अलग ‘कंट्री ब्रीफ’ जारी किया था।
यूएससीआईआरएफ़ अमेरिकी कांग्रेस द्वारा स्थापित एक स्वतंत्र और द्विदलीय आयोग है। इसका काम दुनिया के अलग-अलग देशों में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति की निगरानी करना और अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री तथा कांग्रेस को विदेश नीति से जुड़ी सिफारिशें देना है। यूएससीआईआरएफ़ की सिफारिशें अपने आप में अमेरिकी सरकार की अंतिम नीति नहीं होतीं। किसी देश को सीपीसी घोषित करने का अंतिम निर्णय अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है।
(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं।)