बढ़ती ही जा रही है, एसआईआर पर गांव-गांव में चौपाल लगाने की ज़रूरत

पिछले साल से वोट चोरी पर एक से बढ़कर एक धमाकेदार प्रेजेंटेशन दे रहे राहुल गांधी ने 24 सितम्बर को एक और धमाका किया, जिसकी अनुगूँज अतीत की तुलना में बहुत ज्यादा सुनाई पड़ रही है। इस बार के धमाके का आधार बनी है इंडियन एक्सप्रेस में छपी रितिका चोपड़ा की रिपोर्ट! इस रिपोर्ट ने राजनीतिक गलियारों और देश की राजनीति में भूचाल पैदा कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के मध्य भारी मतभेद थे। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य दो चुनाव आयुक्तों- सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी – के मध्य पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार गंभीर मतभेद और लिखित आपत्तियां दर्ज की गईं।

यह आंतरिक विवाद मतदाता सूची के पुनरीक्षण और डाटाबेस के केंद्रीकरण जैसे अहम फैसलों पर बिना सहमति के लिए जाने को लेकर सामने आया है। इस प्रक्रिया के तहत देश के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाये गए। रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नए मतदाताओं को जोड़ने से जुड़े क़दमों को अनधिकृत और अवैध बताया। उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि मतदाता डाटाबेस तक पहुँच को दिल्ली में ‘केंद्रीकृत’ किया जा रहा है, जिससे राज्य के अधिकारियों की भूमिका दरकिनार हो सकती है।

चुनाव आयोग के भीतर अभूतपूर्व आंतरिक दरार पर इंडियन एक्सप्रेस की जांच के जनसमक्ष आते ही मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के खिलाफ देश में आक्रोश की लहर दौड़ गई और कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों के साथ सीजेपी नेताओं ने पहले से ही चल रहे सीईसी ज्ञानेश कुमार पर हमले तेज कर दिए। बहरहाल इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट से ज्ञानेश कुमार और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ जो आक्रोश का सैलाब उमड़ा उसकी सही अभिव्यक्ति 24 सितम्बर को राहुल गांधी के प्रेस कांफ्रेंस में हुई!

वोट चोरी पर राहुल गाँधी का एक और ऐतिहासिक धमाका

राहुल गांधी ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ‘मैं पिछले तीन साल से वोट चोरी का आरोप लगा रहा हूँ और अब दो चुनाव आयुक्त भी इसमें मेरे साथ हैं। सीईसी ने जो किया है, वह संविधान और देश के क़ानूनी ढाँचे पर हमला है। सीईसी को तत्काल इस्तीफ़ा देना चाहिए। सरकार बदलने पर उन्हें जेल भेजा जायेगा। वोट चोरी से कानून चोरी और कानून चोरी से संस्था की चोरी हो रही है। हम लोकतंत्र को बर्बाद नहीं होने देंगे।।। दो चुनाव आयुक्तों ने ज्ञानेश कुमार पर जो सवाल उठाए हैं, मैंने भी सवाल उठाए थे, लेकिन तब उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया था। दोनों चुनाव आयुक्त कह रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार जिम्मेदार हैं। वोट हमारे लोकतंत्र की नींव है और चुनाव आयोग इसका रक्षक है। इसके जरिये वह संविधान की रक्षा करता है।

अगर वोट ख़त्म हो गया, तो हमारा संविधान भी ख़त्म हो जायेगा।’ उन्होंने सीईसी को सरकारी गवाह बनने का प्रस्ताव देते हुए कहा कि यही देशभक्ति है। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में मोदी और शाह की विडिओ दिखाए। एक में शाह कह रहे थे कि भाजपा 30 साल सत्ता में रहेगी। वहीं दूसरे में पीएम मोदी अबकी बार 400 पार का नारा लगाते दिख रहे थे। राहुल गाँधी ने कहा कि लोकतांत्रिक माहौल में काम करने वाला कोई भी नेता ऐसे बयान नहीं देता। वोट चोरी के जरिये ही मोदी सत्ता में काबिज हैं, इसे प्रमाणित करने के लिए उन्होंने कहा कि हरियाणा, छत्तीसगढ़, यूपी जैसे राज्यों में हमेशा चुनाव के बाद सरकारें बदलती थी, लेकिन अचानक चुनावों में एंटी–इन्कम्बैंसी ही ख़त्म हो गई। उन्होंने कहा, ‘ऐसा इसलिए है क्योंकि मैं एक राजनीतिक परिवार से आता हूँ और मैंने 50 साल से ज्यादा साल एक राजनीतिक परिवार में बिताये हैं। लोकतांत्रिक माहौल में काम करने वाला कोई भी राजनीतिक नेता ऐसे बयान नहीं दे सकता।

क्योंकि भारत में एंटी–इन्कम्बैंसी नाम की एक बुनियादी ताकत होती है, जो बहुत तेजी से किसी भी सरकार का विरोध करने लगती है और यह किसी को भी नहीं बख्शती। इंदिरा गांधी जी बांग्लादेश युद्ध जीतती हैं। अपनी लोकप्रियता के शिखर पर होती हैं, और फिर अचानक, एक-दो साल के भीतर ही जबरदस्त एंटी–इन्कम्बैंसी और भारी दबाव का सामना करना पड़ता है। एक के बाद एक, कई नेताओं के साथ ठीक यही होता है। ऐसा कांग्रेस नेताओं के साथ होता है, क्षेत्रीय दलों के साथ होता है और खुद भाजपा के अटल बिहारी बाजपेयी के साथ हुआ। लेकिन किसी वजह से, नरेंद्र मोदी के साथ ऐसा कभी नहीं होता, अमित के साथ ऐसा नहीं होता, बीजेपी के साथ ऐसा नहीं होता!’

राहुल गांधी के विस्फोटक प्रेस कांफ्रेंस के जवाब में : चुनाव आयुक्तों ने किया बैठक

राहुल गांधी के विस्फोटक प्रेस कांफ्रेंस के अगले दिन भारी बारिश की उपेक्षा कर देश भर में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और ऐसा लगा अब ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दे देंगे। लेकिन इस्तीफ़ा न देकर उन्होंने तमाम विवादों के बीच अगले दिन अर्थात 26 सितंबर को बड़ी बैठक की, जिसमें संधू और जोशी भी शामिल रहे। बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ अन्य दोनों आयुक्तों ने आम सहमति से एसआईआर की प्रक्रिया में सुधार से जुड़े कई फैसले लिए! बहरहाल उस मीटिंग के बाद जो प्रेस विज्ञप्ति रिलीज हुई, उसमें आयोग ने प्रकारांतर में अपनी कई बड़ी गलतियों और गड़बड़ियों को स्वीकार किया, लेकिन गोदी मीडिया की ओर से कहा गया कि तीनों चुनाव आयुक्तों की बैठक और उसके बाद जारी बयान ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ छेड़े गए विपक्ष के अभियान की हवा निकाल दी!

सबसे बड़ी बात यह हुई कि आयोग का संयुक्त सामने आने के बाद भाजपा हौसला बढ़ गया और वह विपक्ष के खिलाफ आक्रामक हो गई, जिसका उपयुक्त प्रतिबिम्बन भाजपा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के बयान में हुआ। उन्होंने कहा, ‘चुनाव आयोग के संयुक्त बयान ने कांग्रेस और विपक्षी इंडी गठबंधन के झूठ का पर्दाफाश हो गया है। कांग्रेस अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाकर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की 26 सितम्बर को बैठक हुई और उसके बाद चुनाव आयोग ने संयुक्त बयान में स्पष्ट कर दिया कि देश भर में संचालित विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) सहित सभी प्रमुख निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। इसके बावजूद विपक्ष चुनाव आयोग की निष्पक्षता और प्रक्रियाओं पर झूठा कीचड़ उछालने का घिनौना काम कर रहा है!’ वहीं निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व प्रदेश सरकार में मत्स्य मंत्री संजय निषाद ने कहा है कि लगातार हार से विपक्षी दल संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कांग्रेस-सपा समेत विपक्षी दल चुनाव जीतने पर अपनी पीठ थपथपाते हैं, लेकिन हार मिलते ही ईवीएम और चुनाव आयोग को दोष देने लगते हैं!

एसआईआर और वोट चोरी के मुद्दे पर आर-पार की लड़ाई के मूड में: भाजपा

सारांश में कहा जा सकता है कि 26 सितम्बर को हुई तीनों आयुक्तों की बैठक और उसके बाद जारी बयान से भले ही इंडियन एक्सप्रेस में छपा रितिका चोपड़ा आरोप सही होने का संकेत मिलता हो, लेकिन भाजपा ने एसआईआर और वोट चोरी के मुद्दे पर अब विपक्ष के खिलाफ आर-पार की लड़ाई में उतरने का मन बना लिया है। इसलिए योगी आदित्यनाथ और पूर्व भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से लगाए तमाम भाजपा नेता और सहयोगी दल पंकज चौधरी और संजय निषाद वाला ही नैरेटिव खड़ा करने जुट गए हैं कि हार से निराश विपक्ष चुनाव आयोग पर मनगढ़ंत आरोप लगा रहा है। ऐसे में जो हालात बनते दिख रहे हैं, उससे लगता है ज्ञानेश कुमार इस्तीफ़ा देने से बच जायेंगे और मोदी सरकार भी सुरक्षित रहेगी।

स्मरण रहे मोदी सरकार के कार्यकाल में कई ऐसी घटनाएँ हुईं जिससे लगा सरकार गिर जाएगी। इस सिलसिले में जून में अयोध्या के राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी की भयावह घटना के बाद 20 जुलाई से शुरू हुआ पेपर लीक आन्दोलन ने सरकार के संकट को शिखर पर पहुंचा दिया था, पर भाजपा गोदी मीडिया और सहयोगी दलों की सहयोगिता तथा विपक्ष के नकारेपन से इनसे उबर गई। हाल में 23 जून को इंडियन एक्सप्रेस में छपी रितिका चोपड़ा के रिपोर्ट को आधार बनाकर राहुल गांधी ने 24 सितम्बर को जो प्रेस किया, उससे उसका संकट और ज्यादा गहरा गया। वैसे पिछले साल से राहुल गांधी वोट चोरी पर एकाधिक हैरतअंगेज प्रेस कांफ्रेंस करने के साथ जो वोट अधिकार यात्रा निकाला, उससे लगा सरकार कभी भी गिर सकती है। किन्तु हर बार राहुल गांधी के प्रयास पर विपक्षी दलों का अपेक्षित सहयोग न मिलने से भाजपा का संकट टल गया। लेकिन इस बार राहुल गांधी के 24 सितम्बर वाले प्रेस कांफ्रेंस के बाद अभूतपूर्व संकट पैदा हो गया। 30 सितम्बर को दिल्ली में मुख्य रूप से चुनाव आयोग और चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार कुमार के खिलाफ साझा रणनीति पर चर्चा के लिए इंडिया गठबंधन की जो बैठक हो रही है, उसमें जिस तरह सपा प्रमुख अखिलेश यादव व अन्य नेताओं के अनुपस्थित होने की खबरें आ रही हैं, उससे लगता है मोदी सरकार एसआईआर से उठे खतरे से पार पा लेगी।

वैसे भी लम्बे समय से देखा जा रहा कि मोदी सरकार की हर कमियों पर अकेले राहुल गाँधी और कांग्रेस ही लड़ती नजर आई। इस बार भी उसकी पुनरावृति हुई है। यूपी के भावी चुनाव में अखिलेश यादव का रंग-ढंग देखकर लगता है, वह भाजपा के खिलाफ अकेले ही लड़ने का मन बना रहे हैं। अब सवाल पैदा होता कांग्रेस ऐसे में क्या करें? इसका जवाब है कांग्रेस गाँव में चौपाल लगाकर अपने कोर वोटर्स: दलित, आदिवासी, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी, एसआईआर के खतरों के साथ उन्हें यह बताये कि उसका देश को आजाद कराने और आजादी के बाद देश के पुनर्निर्माण और उनके उत्थान में क्या योगदान है है!

कांग्रेस गाँव-गाँव में चौपाल लगाने की बात पहले से ही उठाती रही है

जहां तक गाँव-गाँव में चौपाल लगाने का सवाल है मोदी-राज में चौपाल लगाने की ज़रूरत खुद कांग्रेस भी महसूस करती रही है और उसने सरकार की साजिशों के पर्दाफाश के लिए कई बार इसकी घोषणा भी की पर, अपेक्षित सक्रियता न दिखा सकी! लोकसभा चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए लखनऊ में 2023 के संविधान दिवस पर कांग्रेस की ओर से घोषणा हुआ था कि पार्टी 8000 गांवों में चौपाल लगाकर जानने की कोशिश करेगी कि उनकी सरकार से क्या अपेक्षा है; उनके मन में समाज के हित में क्या विचार आ रहे हैं और उनके उत्थान के लिए क्या पहल की जरूरत है। लेकिन 2023 की वह घोषणा ठीक से परवान न चढ़ सकी। उसके बाद जब 2024 के दिसंबर में अमित शाह ने राज्यसभा में बोलते हुए जब बाबा साहेब आंबेडकर का अपमान किया था तब, लखनऊ के कांग्रेस मुख्यालय में उसका विरोध करते हुए घोषणा किया गया था कि हम गांवों में चौपाल के जरिये भाजपा की दलित विरोधी सोच का पर्दाफाश करेंगे पर, वह घोषणा भी परवान न चढ़ सकी। बाद में 2025 में ही इस आशय की घोषणा लखनऊ में 12 नवम्बर को कांग्रेस के ओबीसी और एससी विभाग की ओर से की गई, जिसकी मीडिया में काफी चर्चा हुई।

उस दिन दोनों विभागों के राष्ट्रीय अध्यक्षों : डॉ. अनिल जयहिन्द और राजेंद्र पाल गौतम ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस करके बताया था कि कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में 26 नवम्बर से हर गाँव में चौपाल लगाकर दलितों के साथ संविधान पर चर्चा करेगी। पार्टी बताएगी कि कांग्रेस के शासन में दलितों को क्या-क्या मिला, जो भाजपा की सत्ता में उनसे छीना जा रहा है! लेकिन इस घोषणा पर भी अपेक्षित मात्रा में अमल न हो सका। लेकिन अब जबकि आरक्षण के बाद भाजपा एसआईआर के जरिये दलित, आदिवासी, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों का वोट अधिकार छीनने की दिशा में जोर-शोर से आगे बढ़ रही है, ज़रूरी हो गया है कि पूरे देश में न सही, कम से कम देश की राजनीति की दिशा तय करने वाले जिस यूपी में 2027 में विधानसभा का चुनाव होना है, वहां के गाँव-गाँव में चौपाल लगाकर कांग्रेस अपने कोर वोटर्स को जागरूक करने का विशेष अभियान चलाए!

एसआईआर के असल निशाने पर : कांग्रेस के कोर वोटर

स्मरण रहे जिस एसआईआर को लेकर आज भारतीय राजनीति में भूचाल आया है, उसके असल निशाने पर कांग्रेस का वह कोर वोटर है, जिसका भरोसा जीतना आज कांग्रेस की सबसे बड़ी जरूरत है। इसके विषय में राहुल गांधी पिछले डेढ़ – दो साल से कई बार दोहरा चुके हैं कि संघ-भाजपा इसलिए सत्ता में हैं क्योंकि कांग्रेस दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यकों के उस भरोसे को कायम नहीं रख सकी, जो भरोसा इंदिरा जी के समय में बरकरार था। इस भरोसे को जीतने के लिए ही कांग्रेस ने 2023 के रायपुर अधिवेशन में सामाजिक न्याय का पिटारा खोला, जिसके बाद उसने सामाजिक न्याय पर चुनाव को केन्द्रित कर कर्नाटक और तेलंगाना में विजय हासिल की।

कर्नाटक और तेलंगाना विजय से उत्साहित होकर राहुल गांधी लोकसभा चुनाव पूर्व 14 जनवरी, 2024 को मणिपुर से ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ पर निकले, जिसकी समाप्ति 16 मार्च, 2024 को मुंबई में हुई। इस यात्रा में उन्होंने सामाजिक न्याय को जो बुलंदी प्रदान की उसका परिणाम 5 अप्रैल को 5 न्याय, 25 गारंटी और 300 वादों से युक्त कांग्रेस के न्याय पात्र नामक घोषणा में सामने आया। कांग्रेस के सामाजिक न्याय केन्द्रित ऐतिहासिक घोषणापत्र ने मोदी सरकार को लगभग सत्ता से आउट कर दिया था। वह तो किसी तरह चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने निर्लज्जतापूर्वक वोट चोरी करके मोदी को बुरी तरह हार से बचा लिया। वित्त मंत्री सीतारमण के पति प्रभाकर परकला के शब्दों में लोकसभा चुनाव 2024 में 79 सीटों की चोरी की गई। राहुल गांधी के शब्दों में तब भाजपा के जीते हुए हर 6 सांसदों में एक वोट चोरी से जीता था। 2024 लोकसभा चुनाव ने संकेत कर दिया कि मोदी जनता का भरोसा खो चुके हैं। उसके बाद ही वह वोट चोरी पर पूरी तरह निर्भर होने के लिए अभिशप्त हुए!

सत्ता में बने रहने के लिए वोट चोरी के सिवाय : मोदी के समक्ष नहीं है कोई विकल्प

लोकसभा में राजीव कुमार के जरिये अपनी हार टालने के बाद मोदी ज्ञानेश कुमार के सहारे एसआईआर की प्रक्रिया चला कर लोकतंत्र को अपहृत करने की दिशा में अग्रसर हुए और बिहार में मनचाहा परिणाम पाने के बाद इस प्रक्रिया को 29-30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक प्रसारित कर दिए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस प्रक्रिया में 11।8 से लेकर 13।37 करोड़ वोटरों के नाम काटे जा चुके हैं। बहरहाल यदि ठीक से अध्ययन हो तो पता चलेगा कि जो 13 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे गए गए हैं, उनमें प्रायः 99% नाम ही कांग्रेस के कोर वोटर्स के होंगे। कारण, भाजपा नेतृत्व को पता है हिन्दू राष्ट्र की लोभ में 99% अपर कास्ट मतदाता उसे ही वोट करेंगे। ज्ञानेश कुमार द्वारा आगे बढ़ाई गई ‘एसआईआर’ की यह प्रक्रिया अब उन दलित, आदिवासी और पिछड़ों को मताधिकार से वंचित करने का जरिया बन गई है, जिनका राजनीति में हस्तक्षेप हिन्दू धर्म में अधर्म घोषित रहा है एवं जो कांग्रेस के लिए वोट करने का लगातार मन बनाते जा रहे हैं।

चूँकि दलित-पिछड़ों इत्यादि का राजनीति में हस्तक्षेप हिन्दू धर्म के विरुद्ध रहा है, इसलिए हिन्दुत्ववादी मोदी सरकार इनको वोटाधिकार से वंचित करने के लिए निर्ममता से वैसा ही लोकतंत्र विरोधी उपक्रम चला रही है जैसा उसने आरक्षण से महरूम करने के लिए सरकारी उपक्रमों को बेचने जैसा देश विरोधी कृत्य अंजाम दिया। यह देश विरोधी काम इसलिए अंजाम दिया गया क्योंकि आरक्षण से दलित-पिछड़ों को उन पेशों को अपनाने का अवसर मिल जाता था, जो पेशे/कर्म हिन्दू धर्मशास्त्रों द्वारा इनके लिए अधर्म घोषित रहे। एसआईआर की प्रक्रिया के जरिये मोदी सरकार हर राज्य में लाखों–करोड़ो वोट दो कारणों से काट रही है। एक तो इससे चुनाव में विजय सुनिश्चित कर लेगी, दूसरा, दलित, आदिवासी, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों को राजनीति के अधिकार से वंचित का पुण्य का काम कर लेगी। एसआईआर के जरिये मोदी सरकार दलित-बहुजनों को उस वोट की शक्ति से महरूम करने जा रही है, जिसे बाबा साहेब आंबेडकर ने संविधान के जरिये सुलभ कराकर दुनिया के सबसे अधिकारविहीन लोगों को शासक बनने की जमीन सुलभ कराई थी।

दलित–बहुजनों की भारत में जो भी अहमियत है, वह वोट की ताकत के चलते हैं। एसआईआर ने इसी ताकत से महरूम होने का खतरा पैदा कर दिया है। ऐसे में आरक्षण के खात्मे के साथ एसआईआर के जरिए मोदी सरकार दलित, आदिवासी, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों का वोटाधिकार ख़त्म करने की जो मुहिम छेड़ी है, उसके प्रति कांग्रेस का गाँव-गाँव में चौपाल लगाना एक ऐतिहासिक जरूरत बन गई है। यहाँ कांग्रेस नेतृत्व को यह नहीं भूलना होगा कि जो सामाजिक न्याय भाजपा को हराने का सबसे बड़ा औजार है, उसे राहुल गाँधी ने ऐसी बुलंदी प्रदान कर दी है कि भाजपा वोट चोरी के बिना सत्ता में आ ही नहीं सकती। ऐसे में कोई लाख दबाव डाले, वह वोट चोरी से पीछे हट ही नहीं सकती। इसलिए कांग्रेस के समक्ष मोदी सरकार को सत्ता से बाहर करने के लिए गाँव-गाँव में चौपाल लगाने से भिन्न कोई विकल्प ही नहीं है।

(लेखक उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के विचार विभाग के चेयरमैन हैं। संपर्क- 9654816191)

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