दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को पत्रकार अंजना ओम कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क की ओर से परीक्षा कोचिंग टीचर फैजल ख़ान उर्फ़ ख़ान सर व अन्य के ख़िलाफ़ मानहानि मामले में आपत्तिजनक टिप्पणियों वाली सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का अनुरोध करने वाली अंतरिम राहत देने से इनकार किया लेकिन सभी पक्षों को नोटिस जारी किया।
यह अर्जी कश्यप द्वारा खान सर और अन्य प्रतिवादियों अभिनय शर्मा, बबीता त्यागी, अरविंद भदौरिया, मनीष यादव और कुछ एक्स अकाउंट यूज़र्स के खिलाफ़ दायर मानहानि के मुकदमे में दी गई।
हालांकि, जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने अर्जी पर कोई अंतरिम राहत देने से इनकार किया और मामले की सुनवाई के लिए 17 जून की तारीख तय की। यह मुकदमा खान सर द्वारा पत्रकार के खिलाफ़ “स्टार टीचर्स” पर उनकी कवरेज के संदर्भ में की गई कथित अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर दायर किया गया।
कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने कहा कि प्रतिवादी 1-4 सोशल मीडिया पर “अपमानजनक और ज़हरीला कंटेंट” पोस्ट कर रहे थे, जिसे बाद में दूसरे लोग उठाते हैं और फैलाते हैं।
इस बीच प्रतिवादी 4-6 की ओर से पेश एडवोकेट राकेश मल्होत्रा ने वादी (अंजना ओम कश्यप) द्वारा किए गए पोस्ट की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि अगर प्रतिवादी का पोस्ट हटाया जाना है, तो वादी का पोस्ट भी हटाया जाना चाहिए।
इस चरण पर कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा, “यह बहुत सीधा मामला है। वे कह रहे हैं कि सोशल मीडिया पर अपमानजनक सामग्री पोस्ट की गई है। यह स्थापित कानून है कि अगर कोई चीज़ अपमानजनक है, तो उसे हटाया जाना चाहिए… शिकायत बहुत स्पष्ट है। वे कह रहे हैं कि अपमानजनक सामग्री पोस्ट की गई और उनके खिलाफ़ खास आरोप लगाए गए हैं। आपको जो कहना है कहने का अधिकार है, लेकिन अगर यह पहली नज़र में अपमानजनक है तो इसे हटाया जाना चाहिए।”
मल्होत्रा ने प्रतिवादी 5 के खिलाफ़ आरोपों को पढ़ा और तर्क दिया, “क्या यह मानहानिपूर्ण है? बल्कि वादी ने ही मानहानिपूर्ण (पोस्ट) किया। अगर इसे हटाया जाना है तो दोनों पोस्ट हटाए जाने चाहिए।”
इस पर कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी अपने जवाब में अपनी बात रख सकते हैं। हालांकि, मल्होत्रा ने तर्क दिया कि मान लीजिए कोई आदेश पारित किया जाता है तो क्या प्रतिवादी उसके बारे में नहीं लिख सकता? क्या ऐसा करना मानहानिपूर्ण होगा?
मल्होत्रा ने तर्क दिया, “अनुच्छेद 19 के तहत मुझे अपनी सुरक्षा प्राप्त है। क्या उन सभी के खिलाफ रोक लगाई जा सकती है? उन्हें यह बताना होगा कि वे किसके खिलाफ रोक चाहते हैं और उन पर क्या विशिष्ट आरोप हैं।”
इस बीच प्रतिवादी 7 (फेसबुक अकाउंट ऑपरेटर) की ओर से पेश वकील ऋषभ राजन ने कहा कि वादी ने कंटेंट को दोबारा पोस्ट करने को भी आपत्तिजनक बताया है और मेरे खिलाफ व्यापक रोक की मांग की। प्रतिवादी नंबर 8 ‘4PM न्यूज़ नेटवर्क’ के वकील सुधांशु तिवारी ने तर्क दिया कि ऑनलाइन शिक्षकों पर वादी की कवरेज के जवाब में कुछ प्रतिवादियों ने वीडियो पोस्ट किए।
उन्होंने कहा”उनके (वादी के) अनुसार, हमारी प्रतिक्रियाएं मानहानिपूर्ण हैं। उनका मामला यह है कि 8 प्रतिवादियों ने अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर 18 कंटेंट पोस्ट किए। इन सभी अलग-अलग कंटेंट के लिए कार्रवाई का कारण (कॉज़ ऑफ़ एक्शन) भी अलग-अलग है। उन्होंने इन सबको एक ही मुकदमे में मिला दिया। यह मुकदमा चलने योग्य नहीं है। उन्हें अलग-अलग मुकदमे दायर करने चाहिए।”
इस बीच कश्यप के वकील ने “सभी प्रतिवादियों द्वारा इस्तेमाल की गई ज़हरीली भाषा” की ओर इशारा करते हुए कहा कि यह भाषा “वास्तव में हिंसा भड़काने वाली” थी।उन्होंने तर्क दिया, “वे मेरे बच्चों को इसमें घसीट रहे हैं। धमकी दे रहे हैं कि हम तुम्हें और तुम्हारी बेटी को गोली मार देंगे।”
जब अदालत ने नोटिस जारी किया तो वकील ने आग्रह किया कि इस बीच प्रतिवादियों को कंटेंट हटा देना चाहिए।हालांकि, अदालत ने कहा कि उसे इस बिंदु पर मामले की सुनवाई करनी है और कहा, “इसीलिए मैं कह रहा हूं कि क्या इसे जुलाई या अगले सप्ताह के लिए रखा जाए।”
जब कश्यप के वकील ने आग्रह किया कि अभी सुनवाई की जाए तो अदालत ने कहा कि आज 60 मामले सूचीबद्ध हैं और प्रतिवादियों को आवेदनों पर अपना जवाब दाखिल करने दिया जाए। इस बीच कुछ प्रतिवादियों की ओर से पेश वकीलों ने आग्रह किया कि कोई तात्कालिकता नहीं है और वादी किसी व्यापक आदेश (ब्लैंकेट ऑर्डर) की मांग नहीं कर सकता। हाईकोर्ट ने मामले को 17 जून के लिए सूचीबद्ध किया।
अंजना ओम कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क की ओर से सीनियर वकील के साथ वकील ऋषिकेश बरुआ पेश हुए। कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क ने खान सर द्वारा “स्टार टीचर्स” पर उनकी कवरेज के बारे में की गई कथित मानहानि वाली टिप्पणियों – जैसे “बिकाऊ”, “चाटुकार”, “दलाली”, “फेक न्यूज़ की दुकान” आदि – को हटाने की मांग की।
यह विवाद नीट परीक्षा प्रणाली पर एक लाइव डिबेट के दौरान शुरू हुआ, जब कश्यप ने कथित तौर पर ऑनलाइन टीचर्स की आलोचना करते हुए उन्हें “धोखेबाज़” और सिर्फ़ व्यूज़ के पीछे भागने वाले “सिर्फ़ समझाने वाले” कहा था। 2 करोड़ रुपये के मानहानि के इस मुक़दमे में ऑनलाइन सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से कथित मानहानि वाली सामग्री को हटाने की मांग की गई।
(जनचौक ब्यूरो)