Tuesday, August 9, 2022

अनिल सिन्हा

क्या यूपी में योगी हिंदुत्व का चेहरा नहीं होंगे?

इन दिनों देश का मीडिया, खासकर उत्तर प्रदेश का, इस बहस में उलझा हुआ है कि योगी आदित्यनाथ को आरएसएस और बीजेपी वाले आने वाले चुनावों में अपना चेहरा बनाएंगे या नहीं। मौजूदा बहस इसी का एक उदाहरण है...

मोदी का हिंदुत्व हारा है कोरोना से, सिस्टम नहीं

यह अंदाजा किसी को नहीं रहा होगा कि हिंदुत्व के रथ के सामने कोई अदृश्य शक्ति खड़ी हो जाएगी और उसे हरा देगी। आक्सीजन के लिए तड़प कर मर रहे लोगों तथा गंगा में तैरती लाशों को मौजूदा मीडिया...

बिहार में कारपोरेट बनाम जनता का नया दौर

पिछले 23 मार्च को बिहार विधान सभा के भीतर पुलिस की ओर से की गई विधायकों की पिटाई को विपक्ष लगातार उठा रहा है। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने स्पीकर को पत्र लिख कर दोषी अधिकारियों को बर्खास्त...

शैबाल गुप्ताः बिहार के पिछड़ेपन से युद्ध

पटना का शोध संस्थान आद्री इतना बड़ा हो चुका है कि उसके संस्थापक शैबाल गुप्ता के निधन से बिहार के बौद्धिक जगत में खालीपन महसूस किया जाना स्वाभाविक है। मुझे इस संस्थान के जन्म की उस घटना की याद...

सरकारी कंपनियों की बिक्रीः कारपोरेट गणतंत्र बनाम लोकतंत्र

दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे किसानों के चारों ओर सीमेंट के कांटेदार अवरोध खड़े कर दिए गए हैं, कांटे के बाड़ लगा दिए गए हैं, इंटरनेट बंद कर दिया गया है, और इन्हें पुलिस छावनी में तब्दील...

किसान रैलीः राजधानी की बंजर होती जमीन पर लोकतंत्र की खेती

छिटपुट हिंसा की घटनाओं और लाल किले पर तिंरगा के नीचे किसानों तथा सिख समुदाय से जुड़े झंडे लहराने की घटना ने किसानों की ट्रैक्टर रैली की ऐतिहासिक भूमिका से लोगों का ध्यान हटा दिया है। सामने आए तथ्यों...

लोकतंत्रः ट्रंप से ज्यादा बड़ा खतरा हैं मोदी

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों की ओर से की गई हिंसा पर अमेरिका में तेज राजनीतिक बहस जारी है। ट्रंप को दंड देने के विभिन्न विकल्पों की ओर भी लोगों का ध्यान लगा हुआ है। इन विकल्पों में नए...

नीतीश कुमारः दुर्गति सहने की मजबूरी

एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चर्चा में हैं। यह चर्चा पूर्वोतर के सीमांत अरुणाचल प्रदेश में जेडीयू के सात में से छह विधायकों के भाजपा में शामिल होने से शुरू हुई है और दिल्ली तथा पटना...

त्रासदियों के लिए याद किया जाएगा बीत रहा साल

बीता साल इतनी निराशा से भरा था कि किसी ने शायद ही उम्मीद की होगी कि वह जाते-जाते लोकतंत्र को जगा कर जाएगा। भारत की हालत यह है कि सरकार की सारी संस्थाएं सत्ताधारी पार्टी की शाखा में तब्दील...

किसान आंदोलनः सिर्फ समर्थन मूल्य या लोकतंत्र की रक्षा भी?

किसानों के आंदोलन के साथ मोदी सरकार वही कर रही है जो उसने प्रतिरोध की आवाज को दबाने के लिए पिछले साढ़े छह सालों में किया है। वह इसे देश और समाज के खिलाफ काम करने वाले तत्वों के...

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बिहार में सियासत करवट लेने को बेताब

बिहार में बीजेपी-जेडीयू की सरकार का दम उखड़ने लगा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस दमघोंटू वातावरण से निकलने को...