Sunday, May 29, 2022

हिमांशु जोशी

डूब गया लोहारी गांव, दर-दर भटकने को मजबूर हैं गांव के लोग

देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून में स्थित गांव लोहारी पिछले कुछ दिनों से देश भर में बड़ी चर्चा में रहा है, हर कोई एक संस्कृति को डूबते देखे जाने से दुखी है। टिहरी की तरह ही लोहारी गांव को भी...

रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी मीडिया का दुष्प्रचार अभियान

रूस ने बहुत से पश्चिमी मीडिया संगठनों तक अपनी जनता की पहुंच प्रतिबंधित कर दी है। रूस की तरफ़ से कहा गया कि यह कदम यूक्रेन पर रिपोर्टिंग के दौरान इन संगठनों की तरफ़ से झूठी जानकारियां फैलाने के...

मानव सभ्यता के ‘विकास’ का आईना ‘काली-वार काली-पार’

यह किताब हिमालय में निवास करने वाली राजी जनजाति की परंपरागत जीवन शैली की अंतिम सांसें गिनने और उनकी पहचान के मिटने की कहानी कहती है। तीसरे खण्ड में इसकी कहानी बहुत तेज़ी के साथ आगे बढ़ती है, जिसे पढ़ते...

उस्ताद और शागिर्द की खूबसूरत कहानी है लपूझन्ना

लपूझन्ना एक उस्ताद के लिए उसके शागिर्द की तरफ़ से लिखी गई खूबसूरत कहानी है। लेखक अपने बचपन की याद अब तक नही भुला सके हैं और उन यादों में लेखक का ख़ास दोस्त भी है। ये वो ख़ास...

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव: बेरोज़गारी और पलायन के शिकार युवा

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (सीएमआईई) के द्वारा जारी बेरोजगारी के आंकड़ों का विश्लेषण करने से पता चलता है कि यूपी, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड में दिसंबर 2021 के दौरान नौकरी पेशा लोगों की कुल संख्या पांच साल पूर्व...

असली मुद्दों से महरूम है उत्तराखंड का चुनाव

उत्तराखंड में कड़ाके की ठंड, बर्फबारी और बरसात के बीच चुनावी बिगुल भी फूंका जा चुका है। प्रदेश के राजनीतिक इतिहास को देखें तो यहां सत्ता में देश की दो बड़ी राजनीतिक पार्टियों का ही वर्चस्व रहा है। उत्तराखंड में...

उत्तराखंड में भूकानून बन गया है बड़ा चुनावी मुद्दा

सोशल मीडिया के चिराग से 'उत्तराखंड मांगे भूकानून' का जिन्न पता नहीं कब बाहर निकल आया और सबकी ज़ुबान पर छा गया। आने वाले विधानसभा चुनाव में भी राजनीतिक पार्टियों के लिए भूकानून एक ऐसा मुद्दा है जिस पर...

किताब में छिपी है गांव की पीड़ा और किसानों का दर्द

लेखक चाहते थे कि पुस्तक प्रसारित हो तो देश में रोज़गारविहीन जन विरोधी विकास नीति पर देशव्यापी बहस छिड़ सकती है और हमारे द्वारा प्रस्तुत वैकल्पिक विकास नीति के पक्ष में जनमत बन सकता है। किताब पढ़ते और आज...

गौरव के उन पलों को फिर से जिंदा कर देती है 83

सिनेमा के सबसे मुख्य कार्य हैं दर्शकों का मनोरंजन करना और कोई सामाजिक संदेश देना। यदि आप सिनेमा को सिर्फ इतिहास समझने या कोई महत्त्वपूर्ण सीख लेने के लिए देख रहे हैं तो आप गलत जगह हैं, आपका रास्ता पुस्तकालय...

कोरोना काल में मेहनतकशों की त्रासदी का जिंदा दस्तावेज है ‘1232 किमी’

गुलज़ार साहब की कुछ चंद लाइनों से शुरू हुई ये किताब आपको इन लाइनों से ही किताब का सार समझा देती है। इसके बाद 'द हिन्दू' के पूर्व प्रधान संपादक एन. राम ने प्रधानमंत्री द्वारा पहले लॉकडाउन की घोषणा...

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अब सावरकर के पर्दाफाश की बारी

आरएसएस/बीजेपी के आईटी सेल ने 2014 के बाद गांधी जी के बारे में मनगढ़ंत प्रोपेगेंडा अभियान चलाया। बीसवीं सदी...