Wednesday, December 7, 2022

कांग्रेस ने चुनाव आयोग की धज्जियां उड़ायीं, कहा- ‘चुनावी रेवड़ियों पर नहीं, स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव पर दें ध्यान’

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कांग्रेस ने चुनाव आयोग कि उस चिट्ठी पर उसकी धज्जियां उड़ा दी जिसमें राजनीतिक दलों से कहा गया था कि कि वे अपने चुनावी वादों की वित्तीय व्यावहारिकता की जानकारी मतदाताओं को दें। इस चिट्ठी में आयोग ने दलों से राय मांगी थी कि क्यों न चुनावी वादों को लेकर एक प्रारूप बना दिया जाए? कांग्रेस ने कहा है कि चुनाव आयोग के पास रेवड़ी यानि मुफ्त उपहार जैसे मुद्दों को विनियमित करने का अधिकार नहीं है और आयोग से स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित कराने पर ध्यान केंद्रित करने को कहा है।

चुनाव आयोग ने 4 अक्टूबर को आदर्श आचार संहिता में संशोधन का प्रस्ताव दिया था ताकि राजनीतिक दलों से मतदाताओं को उनके चुनावी वादों की वित्तीय व्यवहार्यता पर प्रामाणिक जानकारी प्रदान करने के लिए कहा जा सके। रेवड़ी संस्कृति को लेकर चर्चा के बीच चुनाव आयोग की ओर से राजनीतिक दलों को लिखी गई यह चिट्ठी महत्वपूर्ण है कि वे अपने चुनावी वादों की वित्तीय व्यावहारिकता की जानकारी मतदाताओं को दें। इस चिट्ठी में उसने दलों से इस बारे में राय मांगी है कि क्यों न चुनावी वादों को लेकर एक प्रारूप बना दिया जाए? यह एक ऐसा कदम था जो मुफ्त बनाम कल्याणकारी उपायों की बहस के बीच आया था, जिसने एक राजनीतिक बहस को जन्म दिया था।

कांग्रेस ने कहा कि इस तरह के मुद्दे एक जीवंत लोकतांत्रिक प्रणाली के द्वंदवाद का हिस्सा हैं और यह मतदाताओं की बुद्धिमत्ता, विवेक और विश्लेषण पर निर्भर करते हैं, जिन्हें कभी भी कम नहीं आंका जाना चाहिए। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने चुनाव आयोग को लिखा कि यह वास्तव में कुछ ऐसा है जिसे तय किया जाना है, चाहे वह चुनाव से पहले हो या चुनाव के बाद, चुनावी सजा या चुनावी स्वीकृति और ईनाम के रूप में हो। मतदाता ऐसे चुनावी वादों या आश्वासनों पर समझदारी से फैसला करता है।

उन्होंने कहा, न तो चुनाव आयोग, न ही सरकार, और न ही वास्तव में अदालतों के पास ऐसे मुद्दों को न्यायसंगत और विनियमित करने का अधिकार है। इसलिए आयोग के लिए ऐसा करने से बचना सबसे अच्छा होगा। चुनाव आयोग ने यह भी कहा था कि चुनावी वादों के दूरगामी प्रभाव होते हैं, वित्तीय स्थिरता पर चुनावी वादों अवांछनीय प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

आयोग ने सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों को लिखे पत्र में 19 अक्तूबर तक प्रस्तावों पर अपने विचार पेश करने को कहा था।

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि रेवड़ी यानि मुफ्त उपहार का मुद्दा पीएम मोदी ने 16 जुलाई को उठाया था, जिसके बाद चुनाव आयोग ने इस मुद्दे को उठाया और पार्टियों को पत्र लिखकर उनकी प्रतिक्रिया मांगी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में रेवड़ी के मुद्दे पर बहस बेमानी है क्योंकि यह किसी भी सरकार का कर्तव्य है कि वह गरीब और उत्पीड़ित वर्गों की देखभाल करे और उनके उत्थान के लिए योजनाएं तैयार करे।

कांग्रेस ने चुनाव आयोग के प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि यह मुद्दा चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है और पूछा कि चुनाव आयोग मुफ्त की परिभाषा पर कैसे निर्णय ले सकता है। उन्होंने कहा कि इसे पहले मौजूदा चुनाव कानूनों को ठीक से लागू करना चाहिए एवं और भी ज्वलंत मुद्दे हैं जिन पर ध्यान देने की जरूरत है। चुनाव आयोग को पार्टी की प्रतिक्रिया में जयराम रमेश ने उल्लेख किया है कि आयोग ने अतीत में इस शक्ति के प्रयोग में बहुत समझदारी और संयम का प्रदर्शन किया है।

मुफ्त उपहारों पर चुनाव आयोग को दिए अपने जवाब में कांग्रेस ने कहा है कि मुफ्त उपहार एक जीवंत लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। अदालत, सरकार या चुनाव आयोग को मुफ्त उपहारों को विनियमित करने का अधिकार नहीं है।

सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि रेवड़ी पर चर्चा गलत दिशा में जा रही है। हम एक लोकतंत्र में रहते हैं। जहां पर जनमत सर्वोपरि है। रेवड़ी हो या गजक, इसका फैसला जनता के मत और विवेक पर छोड़ देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर रेवड़ी क्या है? लोग बेरोजगारी, कम आय और बढ़ती महंगाई से जूझ रहे हैं।

ऐसे में सरकार कुछ सहयोग करती है, तो क्या यह रेवड़ी है ? सुप्रिया ने कहा कि अगर यह रेवड़ी है तो फिर भाजपा सरकार ने अमीरों का दस लाख करोड़ का कर्ज माफ किया है, वह क्या है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने अपना जवाब चुनाव आयोग को भेज दिया है। आयोग को मुफ्त उपहारों के बजाए निष्पक्ष चुनाव कराने पर ध्यान देना चाहिए।

पार्टी का कहना है कि हमारा कानून कहता है कि सैन्य बलों का इस्तेमाल चुनाव में कोई भी राजनीतिक दल नहीं कर सकता। पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भाजपा के कई नेताओं ने पोस्टर और भाषणों के जरिए सैन्य बलों का इस्तेमाल किया। कांग्रेस ने इस मुद्दे को आयोग के सामने उठाया और आयोग ने भाजपा को क्लीन चिट दे दी।

कांग्रेस का कहना है कि राजनीतिक पार्टियां लोगों से क्या वादे करती हैं, इन वादों से प्रभावित होकर कितने लोग उन्हें वोट करते हैं, यह चुनाव आयोग के कार्यक्षेत्र के दायरे में नहीं आता है।

चुनाव आयोग को भेजे अपने पत्र में पार्टी ने मुफ्त उपहारों पर आयोग के क्षेत्राधिकार के साथ मुफ्त उपहरों की परिभाषा का भी मुद्दा उठाया है। इसके साथ पार्टी ने आयोग को सलाह दी है कि वह नए नियम बनाने के बजाए पहले पुराने नियमों को लागू करने के लिए कदम उठाए। पार्टी ने कहा कि आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए।

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)

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