संस्कृति-समाज

उद्भावना नेहरू विशेषांक: गालियां खा के बेमज़ा न हुआ

‘उद्भावना’, हिन्दी-उर्दू साहित्य पर केन्द्रित एक वैचारिक पत्रिका है। मैंने इसमें ‘उर्दू साहित्य’ का समावेश इसलिए किया… Read More

फ़िल्म निर्देशक मृणाल सेन का जन्मदिवस: हमें निरंतर इतिहास का पुनर्निरूपण करते रहना चाहिए

भारतीय सिनेमा में मृणाल सेन एक ऐसे निर्देशक हुए हैं, जिन्होंने अपनी प्रयोगशील और समाजी-सियासी तौर पर… Read More

स्‍मृति विशेष : सामाजिक न्‍याय और संविधान को बचाने लिए आजीवन लड़ते रहे चौथीराम यादव

हिंदी साहित्‍य जगत के वरिष्‍ठ मार्क्‍सवादी विचारक, आलोचक और अंबेडकरी विचारधारा के समर्थक प्रोफेसर चौथीराम यादव का… Read More

प्रो.चौथीराम यादवः मौन हो गया खांटी बनारसी अंदाज वाली साहसी आलोचना का सबसे भरोसेमंद स्वर

बनारस। बात-बात पर छोटी-बड़ी लड़ाइयों में, असहमित के पक्ष में, किसी भी सत्ता के खिलाफ, नफा-नुकसान की… Read More

पूर्वाग्रहों से इतिहास और विध्वंस से पुरातत्व का निर्माण नहीं होता

इतिहास कोई सीधी रेखा नहीं होती और इसीलिए वह कालक्रमों में लिखे होने के बावजूद अपने भीतर… Read More