संस्कृति-समाज

मजनूं गोरखपुरी की शख़्सियत एक संस्था की हैसियत रखती थी 

मजनूं गोरखपुरी की शख़्सियत एक संस्था की हैसियत रखती थी तरक़्क़ीपसंद तहरीक में मजनूं गोरखपुरी का नाम बड़े… Read More

एक प्रोफेसर की डायरीः शिक्षा व्यवस्था की सीमाओं और उसकी क्रूरताओं को दर्ज करती किताब

शिक्षा पर रबीन्द्रनाथ टैगोर की एक प्रसिद्ध उक्ति हैः ‘सर्वोत्तम शिक्षा वही है जो संपूर्ण सृष्टि से… Read More

पुस्तक समीक्षा: लोक शाहीर अण्णा भाऊ साठे की संघर्षमय ज़िंदगी और अदबी कारनामे

अण्णा भाऊ साठे की पहचान एक लोक शाहीर की है। जिन्होंने ‘स्टालिनग्राड’ ‘तेलंगणा’ जैसे जोशीले पंवाड़े और… Read More

लोकतंत्रः जाति के लिए, जाति के द्वारा और जाति का

अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने उन्नीसवीं सदी में लोकतंत्र को परिभाषित करते हुए कहा था, “लोकतंत्र का… Read More

स्मृति शेष: सत्यजीत राय- वह जीनियस फ़िल्मकार जिसने पहली फिल्म से इतिहास रचा

सत्यजित राय देश के ऐसे फ़िल्मकार हैं, जिनकी पहली ही फ़िल्म से उन्हें एक दुनियावी शिनाख़्त और… Read More

ग्राउंड रिपोर्ट: अपनी विरासत सहेजने की जद्दोजहद करता कालबेलिया समुदाय

राजस्थान। भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहां सबसे अधिक संख्या में धर्म, जाति और समुदाय… Read More

पुस्तक समीक्षा: निष्‍ठुर समय से टकराती औरतों की संघर्षगाथा दर्शाता कहानी संग्रह

शोभा सिंह का कहानी संग्रह, 'चाकू समय में हथेलियां', विविध समाजिक मुद्दों पर केंद्रित है, जैसे पितृसत्ता,… Read More