संस्कृति-समाज

जन्मदिवस पर विशेष: सामाजिक यथार्थ के अनूठे व्यंग्यकार हरिशंकर परसाई

हरिशंकर परसाई हिंदी के पहले रचनाकार थे, जिन्होंने व्यंग्य को विधा का दर्जा दिलाया और उसे हल्के-फुल्के… Read More

पुस्तक समीक्षा: बदलाव को आत्मसात करने के बावजूद अपनी जड़ों से जुड़ी जनजाति

पश्चिम के एक विद्वान हुए हैं चार्ल्स केटरिंग, उनकी स्थापना है कि “दुनिया परिवर्तन से नफरत करती… Read More

कुलदीप नैयर: मानवाधिकार तथा लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए आजीवन संघर्षरत रहे

नई दिल्ली। यह अस्सी के दशक की बात है। मैं गांधीवादियों, समाजवादियों और आंबेडकरवादियों के विभिन्न आंदोलनकारी… Read More