बीच बहस

राजनीतिक यथार्थ गूंगा नहीं है, राजनेताओं का लोकतांत्रिक बोध क्या बहरा है! 

समझदार लोगों ने बार-बार कहा है, देश कागज पर खींचा हुआ लकीर या नक्शा ही नहीं होता… Read More

फॉक्सकॉन और विवाहित महिलाएं : प्रिय पुरुषों, आप कार्यस्थल पर चमक सकें, इसके लिए आपकी पत्नियों ने क्या-क्या त्यागा? 

वर्षों तक, ‘प्रगतिशील पुरुष’ ‘महिलाओं को कार्य करने देने’ के लिए प्रशंसा पाते रहे हैं जबकि हमेशा… Read More

जिन्हें चमत्कारों के भरोसे छोड़ दिया गया है, वे चमत्कारी बाबा के शरण में न जाएं तो कहां जाएं?

पिछले करीब 48 घंटों से देश का हर संवेदनशील इंसान व्याकुल और बेचैन है। 50 मरे, 70… Read More

हाथरस त्रासदी: क्या मोदी जी, देश के बुनियादी सवालों से भाग नहीं रहे हैं?

दो जुलाई की हाथरस ट्रेजेडी ने ‘मोदी-शाह ब्रांड भाजपा, गुजरात विकास मॉडल और डबल इंजन सरकार का… Read More