Friday, August 12, 2022

कश्मीर मसले पर प्रदर्शन से पहले सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडेय और एनपीएम सचिव अरुंधति धुरू नजरबंद

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नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडेय और एनएपीएम की सचिव अरुंधति धुरु को आज पुलिस ने लखनऊ में उनके ही घर में नजरबंद कर लिया। वे आज शाम को लखनऊ में होने वाले कश्मीर एकता कार्यक्रम में भाग लेने वाले थे। उससे पहले ही उनके घर पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। और उस दौरान किसी को अंदर से बाहर या बाहर से भीतर नहीं आने जाने दिया जा रहा था। हालांकि बाद में प्रशासन ने वहां से पुलिस को हटा लिया। सीपीआई एमएल ने इसे उत्तर प्रदेश प्रशासन द्वारा खुद ही कानून को हाथ में लेने की गैर क़ानूनी कार्रवाई बताया है। 

रिहाई मंच के महासचिव राजीव यादव ने जनचौक से बातचीत में बताया कि कल शाम से ही लखनऊ का प्रशासन इस कार्यक्रम को रद्द करवाने पर लग गया था। उन्होंने बताया कि अमीनाबाद और कैसरगंज की पुलिस पूरी तरह से सक्रिय हो गयी थी। इस सिलसिले में रिहाई मंच और सोशलिस्ट पार्टी के नेताओं से उसने संपर्क भी करना शुरू कर दिया। इसी कड़ी में जब उन्हें पता चला कि कार्यक्रम की अगुआई संदीप पांडेय और अंरुधति धुरू कर रही हैं तो पुलिस ने सुबह से ही उनके घरों पर जवानों का पहरा बैठा दिया।

और फिर उनके अपने घरों से निकलने पर रोक लगा दी। न तो दोनों कहीं आ जा सकते थे और न ही कोई उनके घर में प्रवेश कर सकता था। एक तरह से दोनों को पूरी तरह से नजरबंद कर दिया गया। लेकिन इस बीच आयोजकों ने प्रशासन द्वारा ईद के त्योहार का हवाला देने और शहर की कानून व्यवस्था को बनाए रखने में मदद की विनती पर कार्यक्रम को स्थगित कर दिया। उसके कुछ समय बाद बताया जा रहा है कि शाम को 4 बजे के आस-पास पुलिस उनके घरों से हट गयी।

जनचौक से संदीप पांडेय ने बताया कि ईद को देखते हुए कार्यक्रम को 16 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम अब 16 अगस्त को उसी जगह पर आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आज अगर कार्यक्रम होता तो उन्होंने अपने घर पर ही विरोध प्रदर्शन करने का मन बना लिया था। और उसकी उन्होंने पूरी तैयारी भी कर ली थी। लेकिन कार्यक्रम के स्थगित होने के बाद उन्होंने अपना फैसला वापस ले लिया।

माले ने इस पूरे प्रकरण पर प्रशासन के रवैये की निंदा की है। उसने कहा है कि यह लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने की साजिश है। कश्मीर एकता कार्यक्रम के आयोजकों में एक मो. शोएब पर इस कार्यक्रम को न करने के लिए दवाब डाला जा रहा था जो किसी भी रूप में लोकतंत्र के भविष्य के लिए स्वस्थ संकेत नहीं है। पार्टी ने कहा कि कश्मीर से शुरू हुआ दमन का यह दौर दूसरे राज्यों तक पहुंच गया है। लेकिन लोकतंत्र पसंद ताकतें इसे कत्तई बर्दाश्त नहीं करने जा रही हैं।

मोदी-शाह की सरकार लोकतान्त्रिक विरोधों को दबाने की कार्रवाइयां कर नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों और देश के लोकतान्त्रिक ताने बाने पर हमला कर रही है। केंद्र व उत्तर प्रदेश की योगी सरकार इस तरह की दमनात्मक कार्यवाहियां बंद करे।

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