मेरठ दलित छात्रा हत्याकांड : एसएसपी अविनाश पांडेय को तत्काल निलंबित कर कड़ी कार्रवाई की जाए : भाकपा (माले)

लखनऊ। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) ने मेरठ की दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड के विरोध में न्याय की मांग कर रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ बर्बर, मनुवादी व अपमानजनक व्यवहार करने वाले एसएसपी अविनाश पांडेय को तत्काल निलंबित कर उनके विरुद्ध कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पार्टी ने कहा कि एक संवैधानिक लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों के साथ जिस प्रकार का अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार एसएसपी ने किया, वह न केवल कानून के शासन बल्कि संविधान की मूल भावना पर भी सीधा हमला है।

पार्टी के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने शनिवार को जारी बयान में कहा कि गत 8 जुलाई को मेरठ के जिलाधिकारी कार्यालय पर मृतक दलित छात्रा को न्याय दिलाने की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों तथा हिरासत में लिए गए अधिवक्ता रवि गौतम के साथ एसएसपी का व्यवहार पुलिस अधिकारी का नहीं, बल्कि “वर्दी में गुंडागर्दी” का परिचायक था।

उन्होंने कहा कि घटना के वायरल वीडियो में निहत्थे, गरीब और दलित प्रदर्शनकारियों के प्रति जिस प्रकार की अभद्रता और हिंसक आचरण दिखाई देता है, वह सत्ता के संरक्षण में फल-फूल रही सामंती-मनुवादी मानसिकता को उजागर करता है।

उन्होंने कहा कि जिस जिले में एक दलित छात्रा की निर्मम हत्या हुई हो, वहां पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी अपराधियों को शीघ्र गिरफ्तार कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना होना चाहिए थी। लेकिन इसके उलट न्याय की मांग करने वालों को ही अपमानित और प्रताड़ित किया गया। यह सत्ता के दुरुपयोग, मानवाधिकारों के उल्लंघन और संवैधानिक अधिकारों के दमन का गंभीर मामला है। सवाल उठता है कि यदि प्रदर्शनकारी किसी प्रभावशाली या वर्चस्वशाली समुदाय से होते, तो क्या एसएसपी का व्यवहार भी यही होता?

सुधाकर यादव ने कहा कि योगी आदित्यनाथ सरकार से ऐसे अधिकारी के विरुद्ध निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद करना कठिन है, क्योंकि इस शासन में दमनकारी और कानून से ऊपर उठकर काम करने वाले अधिकारियों को अक्सर संरक्षण और पुरस्कार मिलता रहा है। बुलडोजर और मुठभेड़ की राजनीति को बढ़ावा देने वाली सरकार में संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों का मनोबल बढ़ाया जाता है।

भाकपा (माले) ने उच्च न्यायपालिका, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से इस पूरे प्रकरण का स्वतः संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने, दोषी पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा पीड़ित परिवार और न्याय की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने की अपील की है।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)

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