Sunday, December 4, 2022

कठुआ रेप केस में आरोपी शुभम सांगरा पर बालिग की तरह चलेगा मुकदमा

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सुप्रीम कोर्ट ने कठुआ रेप केस में अहम फैसला देते हुए आरोपी सांगरा को घटना के समय जुवेनाइल मानने से इनकार कर दिया है। अब आरोपी शुभम सांगरा पर बालिग की तरह मुकदमा चलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, कठुआ और जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि कठुआ बलात्कार-हत्या मामले में एक आरोपी किशोर है। जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने सीजेएम और हाईकोर्ट के आदेशों के खिलाफ केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर द्वारा दायर अपील को स्वीकार कर लिया।

जस्टिस जेबी पारदीवाला ने आदेश के ऑपरेटिव हिस्से को पढ़ा जिसमें कहा गया है कि किसी आरोपी की उम्र तय करने के लिए अगर कोई पुख्ता सबूत नहीं है। ऐसे स्थिति में ‘मेडिकल राय’ को ही सही तरीका माना जाएगा।

जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि यह माना जाता है कि प्रतिवादी आरोपी अपराध के समय किशोर नहीं था और उस पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए जिस तरह से अन्य सह-आरोपियों पर कानून के अनुसार मुकदमा चलाया गया था।जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि आरोपी की उम्र के बारे में मेडिकल एक्सपर्ट का अनुमान सबूत का वैधानिक विकल्प नहीं है और यह केवल एक राय है।

सुप्रीम कोर्ट ने 7 फरवरी 2020 को कठुआ रेप केस के एक आरोपी पर जुवेनाइल कोर्ट में चल रही कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। जुवेनाइल कानून के तहत कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी। जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा की गई अपील पर कोर्ट ने नोटिस जारी किया था। राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील की थी।

आरोपी शुभम सांगरा को हाईकोर्ट ने जुवेनाइल ही माना था। हाईकोर्ट से पहले सीजेएम कठुआ ने भी आरोपी को जुवेनाइल ही माना था। राज्य सरकार ने नगरपालिका और स्कूल रिकॉर्ड के बीच अंतर का हवाला दिया था। जनवरी 2018 में कठुआ में 6 लोगों पर 8 साल की बच्ची का अपहरण, सामूहिक बलात्कार के बाद हत्या का आरोप लगा था।

यह मामला 2019 में कठुआ गांव में आठ साल की बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या से संबंधित है। जून 2019 में पठानकोट की एक विशेष अदालत ने इस मामले में तीन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने सबूत नष्ट करने के आरोप में तीन पुलिस अधिकारियों को 5 साल कैद की सजा भी सुनाई। शुभम सांगरा के मुकदमे को किशोर न्याय बोर्ड में स्थानांतरित कर दिया गया था।

शुभम सांगरा मुख्य आरोपी सांजी राम का भतीजा है, जो उस मंदिर का केयरटेकर था, जहां अपराध हुआ था। वकीलों द्वारा न्याय में बाधा डालने के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई कठुआ से पंजाब के पठानकोट में स्थानांतरित कर दी थी।

फांसी पर रोक

इस बीच चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस जेबी पारदी वाला की पीठ ने हाल ही में मौत की सजा पाए दोषी की फांसी पर रोक लगा दी और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली के प्रोजेक्ट 39ए के प्रतिनिधि को उसके मनोरोग और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन के लिए पुणे की यरवदा जेल में बंद अपराधी से मिलने की अनुमति दी। चीफ जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने प्रोजेक्ट 39ए द्वारा दायर आपराधिक विविध याचिका की अनुमति दी, जिसे नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली के तत्वावधान में विशेष रूप से मौत की सजायाफ्ता दोषियों को निशुल्क कानूनी प्रतिनिधित्व प्रदान करने के लिए बनाया गया है।

प्रोजेक्ट 39ए की नूरिया अंसारी को यरवदा सेंट्रल जेल में दोषी राम कीरत मुन्नी लाल गौड़ से मुलाकात करने और सूचना एकत्र करने और सजा से संबंधित उद्देश्य के लिए साक्षात्कार रिकॉर्ड करने के उद्देश्य से कई व्यक्तिगत साक्षात्कार आयोजित करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई। अंसारी प्रोजेक्ट 39A के साथ मिटिगेटिंग इन्वेस्टिगेटर के रूप में काम करती हैं और एप्लाइड साइकोलॉजी में मास्टर्स डिग्री रखती हैं।

मनोज बनाम मध्य प्रदेश राज्य के फैसले के संबंध में जहां मृत्युदंड के दोषी की मनोवैज्ञानिक जांच के लिए दिशानिर्देश जारी किए गए, न्यायालय ने निर्देश पारित किये कि  1. “प्रतिवादी-राज्य आठ सप्ताह की अवधि के भीतर अपीलकर्ता से संबंधित सभी परिवीक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट इस न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेगा। 2. यरवदा सेंट्रल जेल के अधीक्षक जेल में रहते हुए अपीलकर्ता द्वारा किए गए कार्य की प्रकृति के संबंध में रिपोर्ट और जेल में रहने के दौरान अपीलकर्ता के आचरण और व्यवहार के संबंध में आठ सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। 3. ससून जनरल हॉस्पिटल, पुणे के प्रमुख अपीलकर्ता का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन करने के उद्देश्य से उपयुक्त टीम का गठन करेंगे। मूल्यांकन की रिपोर्ट आठ सप्ताह की अवधि के भीतर महाराष्ट्र राज्य के सरकारी वकील के माध्यम से इस न्यायालय को प्रस्तुत की जाएगी। 4. नूरिया अंसारी को अपीलकर्ता से मिलने की अनुमति दी जाती है, जो वर्तमान में यरवदा सेंट्रल जेल, पुणे में अपीलकर्ता के मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन के संबंध में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए बंद है।

गौड़ ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सजा को चुनौती देते हुए याचिका दायर की। गौड़ पर तीन साल की बच्ची के साथ बलात्कार करने और उसकी हत्या करने का आरोप है। ट्रायल कोर्ट ने गौड़ को भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो एक्ट के विभिन्न प्रावधानों के तहत दोषी ठहराया और उसे 2019 में मृत्युदंड दिया। मृत्युदंड को बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2021 तक बरकरार रखा।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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