Monday, August 8, 2022

छात्रसंघ पर ताला डालने की जेएनयू प्रशासन की कोशिशों को छात्रों ने किया नाकाम

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नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, दिल्ली (जेएनयू) में छात्रों ने बुधवार को जेएनयूएसयू के ऑफिस पर ताला लगाने की विश्वविद्यालय प्रशासन की कोशिशों को नाकाम कर दिया है। निर्वाचित स्टूडेंट यूनियन पर सवाल खड़ा कर नया विवाद पैदा करने पर आमादा विश्वविद्यालय प्रशासन को जेएनयूएसयू के पदाधिकारियों ने आंदोलन और कानूनी कार्यवाही की चेतावनी दी है। जेएनयू के डीन ऑफ स्टूडेंट्स अफेयर्स अशोक कदम के दस्तखत वाला एक नोटिस मंगलवार को जेएनयूएसयू के दफ्तर पर चस्पा कर दिया गया था।

लिंग्दोह कमेटी की संस्तुतियों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा था कि उसने न पिछले साल की ओर न इस साल की जेएनयूएसयू को नोटिफाई किया है। नोटिस में विश्वविद्यालय संपत्ति का दुरुपयोग रोकने का हवाला देते हुए बुधवार शाम के 5 बजे तक जेएनयूएसयू का दफ्तर खाली करने के लिए कहा गया था। नोटिस के मुताबिक, बुधवार शाम तक इस दफ्तर को डबल लॉक कर दिया जाना था। डीन के नोटिस से नाराज़ जेएनयूएसयू के पदाधिकारियों के आह्वान पर करीब 500 छात्रों ने जेएनयूएसयू के दफ्तर के बाहर इकट्ठा होकर नारेबाजी की और यूनियन दफ्तर पर ताला लगाने आए गार्ड्स को लौटने पर मज़बूर कर दिया।

प्रशासन की नोटिस।

जनचौक से बात करते हुए जेएनयूएसयू के सचिव सतीश चंद्र यादव ने कहा कि डीन की तरफ़ से जारी किया गया नोटिस अवैध है। चुनाव आयोग की देखरेख में हुए मतदान के बाद गिनती रुकवाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन पहले ही कोर्ट की फटकार खा चुका है। उन्होंने कहा कि देश के इस बेहतरीन विश्वविद्यालय से शत्रुता रखने वाली सरकार और उसका वीसी तमाम हथकंड़ों के बावजूद स्टूडेंट्स के बीच एबीवीपी की जगह नहीं बना पाए तो नतीजे रुकवाने के लिए तरह-तरह की साजिशें की गईं। यादव ने याद दिलाया कि 17 सितंबर 2019 को दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दो पिटीशंस के निपटारा कर दिए जाने और जेएनयू इलेक्शन कमेटी को नतीजे जारी करने का आदेश दिए जाने के बाद लेफ्ट अलायंस को निर्वाचित घोषित किया गया था।

यादव ने कहा कि जब तक नोटिस वापस नहीं लिया जाता प्रतिरोध जारी रहेगा। इस नोटिस को अदालत में भी चुनौती दी जाएगी। जेएनएसयू ने बयान जारी कर कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को पता होना चाहिए, जेएनयूएसयू दफ्तर डीन की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है। छात्र समुदाय के प्रतिनिधित्व और उनके यूनियन बनाने के अधिकार के इस प्रतीक को विश्वास के साथ जेएनयूएसयू को सौंपा गया है। दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले से भी जेएनयूएसयू के छात्रों द्वारा निर्वाचित और वैधता प्राप्त होने पर मुहर लग चुकी है।

जेएनयू प्रशासन की जेएनयूएसयू के खिलाफ किसी भी साजिश को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। जेएनयूएसयू पदाधिकारियों ने आगाह किया है कि पहले ही छात्रों के सार्वजनिक स्पेस को बहुत हद तक खत्म कर चुके प्रशासन को जेएनयूएसयू दफ्तर नहीं छीनने दिया जाएगा। गौरतलब है कि 15 अक्तूबर को जेएनयूएसयू को अकेडेमिक काउंसिल (एसी) की बैठक में भी नहीं बुलाया गया था। तब भी जेएनयूएसयू और छात्रों ने विरोध दर्ज कराया था। ऑल इंडिया स्टूडेंट असोसिएशन (आइसा) ने जेएनयू की निर्वाचित स्टूडेंट यूनियन के दफ्तर पर तालाबंदी की कोशिश की निंदा की है।

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