Monday, December 5, 2022

द वायर और इसके संपादकों के घरों में पुलिस तलाशी से प्रेस क्लब, एडिटर्स गिल्ड और आईडब्ल्यूपीसी खफा

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नई दिल्ली। प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया तथा इंडियन विमेन प्रेस कोर (आईडब्ल्यूपीसी) ने अलग-अलग बयान जारी करके कहा है कि भाजपा नेता अमित मालवीय की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने जिस तरह से ‘द वायर’ के संपादकों के घरों और उनके दफ्तर में तलाशी ली है और सामग्री जब्त की है, वह पूरी तरह अनुचित है और प्रेस का गला घोटने का प्रयास है।

भाजपा नेता अमित मालवीय की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने ‘द वायर’ के दफ़्तर और इसके संपादकों के घरों में तलाशी लेते हुए कई डिजिटल उपकरण ज़ब्त किए थे। प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया और एडिटर्स गिल्ड ने दिल्ली पुलिस से जांच में निष्पक्षता बरतने की अपील करते हुए कहा कि वे लोकतांत्रिक सिद्धांतों का अपमान करने वाले तरीके न अपनाएं।

बयान में कहा गया है कि पुलिस ने जिस हड़बड़ी में अनेक जगहों पर तलाशी ली, वह हद से ज्यादा और अनुचित है तथा अनावश्यक पूछताछ के समान है। बयान में दिल्ली पुलिस से इस मामले में दायर सभी शिकायतों की जांच में निष्पक्षता बरतने की अपील की गयी है और ऐसे डराने-धमकाने वाले तरीके नहीं अपनाने को कहा है जो लोकतांत्रिक सिद्धांतों का अपमान करते हों।

बयान में कहा गया है  ‘द वायर’ द्वारा प्रकाशित एक बयान के अनुसार पुलिस कर्मी ने पत्रकारों के घरों और दफ्तर से फोन, कम्प्यूटर और आईपैड जब्त कर लिए तथा अनुरोध के बावजूद उन्हें डिजिटल उपकरणों से जानकारी व आंकड़े नहीं दिए गए। यह जांच की प्रक्रियाओं और नियमों का गंभीर उल्लंघन है। संपादकों और पत्रकारों के डिजिटल उपकरणों में उनके पत्रकारिता सूत्रों से संबंधित संवेदनशील जानकारी तथा उन खबरों से संबंधित सामग्री होगी जिन पर वे काम कर रहे होंगे। इस तरह की जब्ती से इसकी गोपनीयता गंभीर रूप से जोखिम में पड़ सकती है।

बयान में कहा गया है कि ‘द वायर’ ने मालवीय के संदर्भ में मेटा से संबंधित खबरों पर गंभीर चूक को पहले ही स्वीकार कर लिया है। उसने कहा, ‘ये चूक निंदनीय हैं और गलत जानकारी पर आधारित खबरों को द वायर ने वापस ले लिया है ।पुलिस की तलाशी और सामग्री जब्त करने की कार्रवाई स्थापित नियमों का उल्लंघन है और इसमें डराने-धमकाने वाला अंदाज चिंताजनक है”। कानून प्रवर्तन एजेंसियों से अनुरोध किया कि इस मामले में जांच के नियमों का कड़ाई से पालन किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि संवेदनशील पत्रकारिता संबंधी सूचनाओं की गोपनीयता का उल्लंघन नहीं हो, वहीं समाचार संस्था के अन्य कामकाज बाधित नहीं हों ।

दिल्ली पुलिस ने भाजपा पदाधिकारी अमित मालवीय द्वारा ‘द वायर’ के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि की शिकायत पर कार्रवाई के नाम पर यह किया है।

आईडब्ल्यूपीसी ने भी ‘द वायर’ के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर चिंता प्रकट की और कहा कि इस तरह की कार्रवाई प्रेस की स्वतंत्रता के लिए तथा लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के लिए उचित नहीं हैं। उसने कहा कि इस बात में कोई संदेह नहीं कि पत्रकारीय लेखन और रिपोर्टिंग बहुत जिम्मेदारी और जवाबदेही के साथ होनी चाहिए। इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। फिर भी, समाचारों की रिपोर्टिंग में त्रुटियों को दूर करने के और भी तरीके हैं जिनमें तलाशी तथा सामग्री जब्त करने के रूप में इस तरह की पुलिसिया कार्रवाई शामिल नहीं है।

दरअसल दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा के कई सदस्य 31 अक्टूबर को द वायर के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन, एमके वेणु, सिद्धार्थ भाटिया, डिप्टी एडिटर जाह्नवी सेन और दिल्ली व मुंबई में प्रोडक्ट कम बिज़नेस हेड मिथुन किदांबी के घर पहुंचे और भाजपा नेता अमित मालवीय द्वारा उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर के संबंध में जारी धारा 91 के नोटिस के अनुसार विभिन्न उपकरणों को जब्त किया।

दिल्ली के भगत सिंह मार्केट स्थित द वायर के कार्यालय में भी तलाशी ली गई। यह जांच की प्रक्रियाओं और नियमों का गंभीर उल्लंघन है।

अमित मालवीय की शिकायत सोशल मीडिया कंपनी मेटा पर द वायर  द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट्स की एक श्रृंखला से संबंधित है। द वायर ने पहले ही इन खबरों को वापस ले लिया था और घोषणा की थी कि वह उनकी आंतरिक समीक्षा कर रहा है।

इस बीच कल दिल्ली पुलिस ने इस मामले से जुड़े वायर के पूर्व रिसर्चर देवेश कुमार से पूछताछ की। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक यह पूछताछ तकरीबन आठ घंटे चली। आपको बता दें कि वायर ने मेटा से संबंधित अपनी सभी रिपोर्ट इसी रिसर्चर द्वारा मुहैया कराये गए इनपुट के आधार पर दिया था। लेकिन बाद में पता चला कि यह रिसर्चर ही फ्राड है। और उसका मेटा के आधिकारिक पक्षों से कोई संपर्क नहीं है। और उसने जो भी मेल उस कंपनी और उसके अधिकारियों के साथ साझ किए सभी फेक थे।

इस खुलासे के बाद वायर ने पूरे मामले की फिर से छानबीन की। और सब कुछ फर्जी निकलने के बाद उसने न केवल सभी खबरें वापस ले लीं बल्कि उसके लिए माफी भी मांगी। देवेश कुमार की पूरी कार्यप्रणाली ही अब संदेहों के घेरे में आ गयी है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि उसको वायर में प्लांट किया गया था। वायर ने देवेश को संस्था से निकालने के बाद उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दिया था।

लेकिन बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस ने शिकायत तो ले ली लेकिन अभी तक उसे एफआईआर में तब्दील नहीं किया है। जबकि दूसरी तरफ बीजेपी के आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय की एफआईआर न केवल उसने तुरंत दर्ज की बल्कि उस पर कार्रवाई भी तत्काल शुरू कर दी। जिसका नतीजा वायर के संपादकों और पदाधिकारियों के घरों और दफ्तर पर छापे के रूप में सामने आया। और वहां से उनके लैपटॉप और आईपैड समेत तमाम इलेक्ट्रानिक उपकरण उठा लिए गए जो बेहद संवेदनशील थे। मीडिया संगठनों ने पुलिस की इसी कार्रवाई का विरोध किया है और इसके लिए उन्होंने बाकायदा प्रेस विज्ञप्ति जारी की है।

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)

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