Wednesday, August 10, 2022

अब पराली जलाना अपराध नहीं, किसानों की एक और मांग सरकार ने माना

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आज शनिवार, 27 नवंबर को केंद्र सरकार ने किसानों द्वारा पराली जलाने (Stubble Burning) को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पराली जलाने को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के किसानों की मांग को माने जाने का एलान किया।  

आगे उन्होंने किसान आंदोलन के दौरान किसानों के ख़िलाफ़ दर्ज़ मामलों को वापस लेने पर कहा कि यह राज्यों का विषय है, इसलिए इन मामलों पर संबंधित राज्य सरकारें फैसला करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) देने के लिए प्रधानमंत्री ने कमेटी की गठन की घोषणा की है, उनकी रिपोर्ट आते ही उस पर भी कार्रवाई की जाएगी। 

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगे कहा कि किसानों की लगभग सभी मांगें पूरी हो चुकी हैं। ऐसे में उन्हें अब अपने-अपने घरों को वापस लौट जाना चाहिए। तोमर ने कहा कि जब तीनों कृषि कानून वापसी का ऐलान प्रधानमंत्री कर चुके और संसद में बिल लाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो ऐसे में किसानों के आंदोलन का अब कोई औचित्य नहीं रह गया है। किसान अब बड़े मन का परिचय दें। 

कृषि मंत्री ने आगे कहा, “तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने का विधेयक शीतकालीन सत्र के पहले दिन (29 नवंबर को) संसद में पेश किया जाएगा। पीएम नरेंद्र मोदी ने फसल विविधीकरण, शून्य बजट खेती और एमएसपी प्रणाली को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक समिति गठित करने की घोषणा की है। इस कमेटी में किसान संगठनों के प्रतिनिधि होंगे।

उन्होंने कहा कि इस समिति के गठन के साथ एमएसपी पर किसानों की मांग पूरी हो गई है। किसान संगठनों ने किसानों द्वारा पराली जलाने को अपराध से मुक्त करने की मांग की थी। भारत सरकार ने भी इस मांग को स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की घोषणा के बाद किसानों के आंदोलन को जारी रखने का कोई मतलब नहीं है। मैं किसानों से अपना आंदोलन खत्म करने और घर जाने का आग्रह करता हूं।

पिछले हफ्ते, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा करते हुए कहा था कि केंद्र सरकार इस महीने के अंत में शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र में कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए आवश्यक विधेयक लाएगी। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के नए ढांचे पर काम करने के लिए एक समिति का गठन करेगी।

भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा है कि सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर कानून की उनकी मांग को स्वीकार करने के बाद ही किसान घर जाएंगे। सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर ख़रीद की गारंटी कानून की हमारी मांग को स्वीकार करने से हम अपना विरोध वापस ले लेंगे और प्रदर्शन खत्म कर घर चले जाएंगे। अगर सरकार एमएसपी और धरना के दौरान मारे गए 750 किसानों को मुआवजा देने की हमारी मांग मान लेती है तो हम घर वापस चले जाएंगे।

(जनचौक ब्यूरो की रिपोर्ट।)

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