Friday, December 2, 2022

books

भारत की तर्ज़ पर अमेरिका के कई राज्यों में उठी हाशिये के समाज के लेखकों की किताबों को जलाने और बैन करने की मांग

दक्षिणपंथ ऐसी गंदगी है जो भारत जैसे पिछड़े देश और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे उन्नत देशों के बीच वैचारिक और वैज्ञानिक सोच के फर्क़ को खत्म कर देता है। भले ही संयुक्त राज्य अमेरिका में फासीवादी डोनाल्ड ट्रंप का बोरिया...

संविधान के बुनियादी सिंद्धातों के खिलाफ है शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में धार्मिक ग्रंथों का शामिल किया जाना

मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश के महाविद्यालयों में धार्मिक ग्रंथों रामचरितमानस तथा महाभारत के कुछ अंशों को पढ़ाने का फैसला किया है। हमारे देश की  धर्म,संस्कृति, भाषा और वेशभूषा के क्षेत्र में कई विशेषताएं हैं जो दुनिया के किसी भी अन्य...

नॉर्थ ईस्ट डायरीः गुवाहाटी पुस्तक मेले में लाखों पाठकों की उमड़ी भीड़, 8 करोड़ की बिकीं किताबें

लगभग दस महीने से गुवाहाटी शहर के लोग कोरोना की दहशत के बीच जिस तरह घर के अंदर कैद थे, उसके अवसाद को काफी हद तक गुवाहाटी पुस्तक मेले ने दूर किया है। 30 दिसंबर 2020 से 10 जनवरी...

राजनीतिक बंदियों के साथ भेदभाव का आरोप, जेल में नहीं मिल रहीं किताबें और अखबार

भीमा कोरेगाँव मामले में मुंबई के तलोजा जेल में बंद राजनैतिक बंदियों के साथ जेल प्रशासन का व्यवहार सही न होने की शिकायतें लगातार आ रही हैं। इन सभी बंदियों की शिकायत है कि जेल प्रशासन उन्हें किताबें और...

किताब ‘कैदखाने का आईना’: जेल में भ्रष्टाचार ही सिस्टम है

स्वतंत्र पत्रकार और लेखक रूपेश कुमार सिंह 7 जून, 2019 से 5 दिसंबर, 2019 तक बिहार की दो जेलों में छह महीने तक काला कानून ‘यूएपीए’ के तहत कैद थे। 6 दिसंम्बर, 2019 को ये जमानत पर बाहर निकल...

किताबें मत जलाइए, ऐसा इंतज़ाम कीजिए कि लोग उन्हें पढ़ ही न पाएं!

‘आप भले मेरी किताबें और यूरोप के सबसे उन्नत मस्तिष्कों की किताबें जला देंगे, लेकिन उन विचारों का क्या जो उन किताबों में समाई थीं और जो करोड़ों रास्तों से आगे बढ़ चुका है और बढ़ता ही रहेगा।’’-हेलेन केलर,...

किताबों से लेकर उत्तराखंड की सड़कों पर दर्ज है त्रेपन सिंह के संघर्षों की इबारत

उत्तराखंड के जुझारू जन-आन्दोलनकारी और सुप्रसिद्ध लेखक कामरेड त्रेपन सिंह चौहान नहीं रहे। का. त्रेपन सिंह चौहान का जाना उत्तराखंड के आम जनों के संघर्षों के लिए और जन-पक्षधर साहित्य के लिए एक अपूरणीय क्षति है। का. त्रेपन सिंह चौहान...

आजादी की लड़ाई में जेलें होती थीं नेहरू का दूसरा घर

सोशल मीडिया पर यह बात भी गाहे-बगाहे कही जाती है कि जवाहरलाल नेहरू को किसी नियमित जेल में नहीं बल्कि आरामदायक डाक बंगले में रखा जाता था। उन्हें ब्रिटिश सरकार विशेष सुविधा देती थी। यह बात सच नहीं है। नेहरू...

डाॅ. श्याम बिहारी राय: प्रकाशन जगत का ध्रुवतारा

डाॅ. श्याम बिहरी राय का जाना मात्र एक प्रकाशक का जाना नहीं है बल्कि यह प्रकाशन के साथ समाज, साहित्य आौर विचार की दुनिया की बड़ी क्षति है। उन्हें सामान्य प्रकाशक के रूप में न कभी देखा गया और...
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देश के लिए आपदा है संघ-भाजपा का कारपोरेट-साम्प्रदायिक फासीवाद: सीपीआई (एमएल)

मुजफ्फरपुर। भाकपा (माले) महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य समेत देश के कोने-कोने से आये वरिष्ठ माले नेताओं की भागीदारी के साथ...
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