Friday, December 2, 2022

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आजादी के बाद भी अंडमान जेल से छूटे त्रैलोक्यनाथ के तेवर रहे तल्ख

कर्नाटक राज्य स्कूल बोर्ड की किताब में, सावरकर द्वारा अंडमान जेल की कोठरी से, एक बुलबुल पर सवार होकर, रोज वहां से निकल कर भारत आने और चले जाने की रूपक कथा का, जब उपहास उड़ा तो कर्नाटक सरकार...

आजादी की लड़ाई में कई तरक्कीपसंद शायरों ने सीधे तौर पर की थी हिस्सेदारी

देश की आज़ादी लाखों-लाख लोगों की कु़र्बानियों का नतीज़ा है। जिसमें लेखक, कलाकारों और संस्कृतिकर्मियों ने भी एक अहम रोल निभाया। ख़ास तौर से तरक़्क़ीपसंद तहरीक से जुड़े लेखक, कलाकार आज़ादी के आंदोलन में पेश-पेश रहे। अपने गीत, ग़ज़ल, नज़्म, नाटक, अफ़सानों और आलेखों के...

सचमुच में नींव की ईंट थे बहुआयामी व्यक्तित्व के मालिक रामवृक्ष बेनीपुरी

रामवृक्ष बेनीपुरी का व्यक्तित्व बहुआयामी था। उन्होंने गद्य-लेखक, शैलीकार, पत्रकार, स्वतंत्रता सेनानी, समाज-सेवी, हिंदी प्रेमी, निबंधकार और नाटककार के रूप में अपनी प्रतिभा की अमिट छाप छोड़ी। बेनीपुरी जी एक महान विचारक, चिन्तक, क्रान्तिकारी, साहित्यकार, पत्रकार और संपादक के...

चली गयी पहाड़ की आवाज

प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सुंदरलाल बहुगुणा नहीं रहे सुंदरलाल बहुगुणा उत्तराखंड में रह रहे थे उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में हिस्सा लिया और बाद में गांधीजी के सर्वोदय आंदोलन का वह हिस्सा रहे जब चंडी प्रसाद भट्ट और सुंदरलाल बहुगुणा ने देखा की...
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देश के लिए आपदा है संघ-भाजपा का कारपोरेट-साम्प्रदायिक फासीवाद: सीपीआई (एमएल)

मुजफ्फरपुर। भाकपा (माले) महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य समेत देश के कोने-कोने से आये वरिष्ठ माले नेताओं की भागीदारी के साथ...
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