Thursday, August 18, 2022

justice

मैं होता तो पीएमएलए को खारिज कर देता: रिटायर्ड जस्टिस नागेश्वर राव

भारत के 76 वें स्वतंत्रता दिवस पर सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस नागेश्वर राव ने कहा कि उन्होंने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों को बरकरार रखने वाले फैसले में शायद एक अलग दृष्टिकोण लिया होता। जस्टिस...

कार्पोरेट्स के लाखों करोड़ की कर्जा माफ़ी क्या रेवड़ियां नहीं हैं मी लार्ड!

उच्चतम न्यायालय ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि फ्रीबीज या रेवड़ियां क्या हैं, मुफ्तखोरी की परिभाषा क्या है? सुप्रीम कोर्ट ने भी अभी तक यह परिभाषा तय नहीं की है। क्या समाज के गरीब वर्ग को मुफ्त भोजन देना...

नये भारत की नई न्याय व्यवस्था 

विगत दिनों सुप्रीम कोर्ट के अनेक फैसले नकारात्मक कारणों से चर्चा में रहे। इनमें कुछ फैसले जरा पुराने थे और कुछ एकदम हाल के। इन फैसलों के चर्चा में आने का कारण सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस खानविलकर की...

लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति अपनी संकीर्ण सोच के लिए याद किए जाएंगे जस्टिस खानविलकर

जस्टिस एएम खानविलकर रिटायर हो गए हैं। पर रिटायर होने के पहले उन्होंने जिन कुछ मुकदमों का निस्तारण किया है, उनके फैसलों में आए कुछ निष्कर्ष ऐसे हैं, जिन्होंने, कानूनी जानकारों को न केवल हैरान किया है, बल्कि न्याय...

महाराष्ट्र पर चीफ जस्टिस ने कहा-हमने 10 दिन के लिए सुनवाई टाली, आपने सरकार बना ली, स्पीकर बदल गए

महाराष्ट्र के सियासी संकट पर उच्चतम न्यायालय में बुधवार को उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट की ओर से दाखिल 5 याचिकाओं पर दोनों पक्षों के वकीलों में गरमागरम बहस हुई। चीफ जस्टिस एनवी रमना ने शिंदे पक्ष के...

बापू के पास है घायल लोकतंत्र की औषधि

बड़ी संख्या में लोग मानने लगे हैं कि भारतीय लोकतंत्र एक संकट के दौर से गुज़र रहा है। लोकतान्त्रिक संस्थाओं की कार्य शैलियाँ बदल रही हैं, कार्यकारिणी और न्यायपालिका के काम-काज में अनावश्यक हस्तक्षेप हो रहा है और शैक्षणिक...

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सुपर पावर बनी ईडी

उच्चतम न्यायालय के जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सी.टी. रविकुमार की पीठ द्वारा पीएमएलए की धारा 5, 8(4), 15, 17 और 19 के प्रावधानों की संवैधानिक घोषित करने और ईडी को गिरफ्तारी, कुर्की, तलाशी और जब्ती...

क्या पीएमएलए बन गया है उत्पीड़न का औजार?

उच्चतम न्यायालय के जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सी.टी. रविकुमार की पीठ ने पीएमएलए की धारा 5, 8(4), 15, 17 और 19 के प्रावधानों की संवैधानिकता को बरकरार रखा, जो ईडी की गिरफ्तारी, कुर्की, तलाशी और जब्ती की शक्तियों से संबंधित हैं...

व्यवसायिक हित स्वतंत्र पत्रकारिता पर हावी, लोकतंत्र से समझौता:चीफ जस्टिस

चीफ जस्टिस एनवी रमना ने मीडिया पर व्यापारिक घरानों के वर्चस्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब एक मीडिया हाउस के अन्य व्यवसायिक हित होते हैं, तो वह बाहरी दबावों के प्रति संवेदनशील हो जाता है। अक्सर, व्यवसायिक हित स्वतंत्र पत्रकारिता...

आलोचना से परे नहीं है न्यायपालिका 

2014 के बाद देश की राजनीति में ही नहीं, बल्कि न्यायपालिका में भी, कुछ ऐसे परिवर्तन आए हैं, जिन पर लोगों का ध्यान गया है। न्यायपालिका किसी राजनीतिक विचारधारा और सत्ता की राजनीति से प्रेरित होकर काम नहीं करती...
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शीर्ष पदों पर बढ़ता असंतुलन यानी संघवाद को निगलता सर्वसत्तावाद 

देश में बढ़ता सर्वसत्तावाद किस तरह संघवाद को क्रमशः क्षतिग्रस्त कर रहा है, इसके उदाहरण विगत आठ वर्षों में...
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