सिस्टम अंधभक्त चाहता है स्टूडेंट नहीं : राहुल गांधी

इंदौर के भारत छोड़ो मैदान में आयोजित छात्रों की गूंज के पाँचवें आयोजन में हज़ारों छात्र-छात्राओं ने उपस्थिति दर्ज कराई। इसमें राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था की बदहाल स्थितियों और अंध भक्तों की पैदाइश के लिए सिस्टम को दोषी ठहराया। इसके केंद्र में थे, शीर्ष स्तर पर बैठे छह प्रमुख लोग थे जो देश को चला रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह संचालित करते हैं, जहाँ फैसलों और नियंत्रण के जरिए युवाओं व छात्रों पर दबाव बनाया जाता है। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कम्युनिकेशन और सूचना तंत्र के जरिए देश की गतिविधियों को नियंत्रित किया जाता है। उन्होंने इसमें आरएसएस और मोहन भागवत का नाम शामिल करते हुए कहा कि यह संगठन देश की वैचारिक दिशा और संस्थानों को प्रभावित करता है।

राहुल गांधी ने उद्योगपति गौतम अडानी और मुकेश अंबानी का हवाला देते हुए कहा कि आर्थिक संसाधन और फंडिंग इस पूरी व्यवस्था तथा राजनीतिक मार्केटिंग को मदद देते हैं।सिस्टम बनाम छात्र राहुल गांधी ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था (सिस्टम) को स्वतंत्र सोच वाले ‘छात्र’ नहीं बल्कि अपनी बात चुपचाप मानने वाले लोग पसंद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा में भ्रष्टाचार, पेपर लीक और कुप्रबंधन के कारण आज का युवा इस भ्रष्ट व्यवस्था के सामने खुद को लाचार महसूस कर रहा है। 

‘हमारी लड़ाई सिस्टम के खिलाफ है’

इंदौर नगर में जो शिक्षा का केंद्र है प्रतिवर्ष हज़ारों की तादाद में बच्चे यहां कोचिंग के वास्ते आते हैं। उनकी समस्याओं से ना केवल छात्र-छात्राओं ने अवगत कराया बल्कि पढ़ने के बाद परीक्षाओं में धांधली, फिर चयन आयोग की गड़बड़ियां को सामने लाया गया। व्यापम के घोटालों का भी विशेष तौर पर ज़िक्र हुआ। शिक्षक परीक्षा में कई बार चयन होने के बाद भी नियुक्ति आदेश ना मिलने जैसी समस्या भी बताई गई।

आदिवासी बच्चों की छात्रावास समस्या और जज जैसी परीक्षा में उनकी उपेक्षा के भी आरोप लगाए गए। सबसे ग़मनाक अवसर था जब हाल में एक प्राईवेट होस्टल दिल्ली की इमारत में मृतक बच्चे की फोटो लेकर उसका परिवार मंच पर पहुंचा। बताया गया कि उसके बच्चे का शव छुपाने की कोशिश हुई बामुश्किल शव मिला। इकलौता पुत्र जिसे परिवार जनों ने उच्च अध्ययन के लिए भेजा था कि वह भी आगे चलकर अच्छी नौकरी पाएगा। हादसे में चला गया। उस परिवार को ना राज्य सरकार ने एक पैसे की मदद की है ना ही दिल्ली सरकार या होस्टल मालिक ने।

तमाम समस्याओं का हल यही है कि इस सिस्टम को छिन्न-भिन्न किया जाए। व्यवस्था बदली जाए। पहली बार राहुल गांधी ने भाजपा की उस रग पर हाथ रखा है जिसे अंधभक्त कहते हैं। इनको सरकार का संरक्षण मिला हुआ है। सरकार चाहती है देश के युवा अंधभक्त बन जाएँ लेकिन पूर्ववर्ती सरकार की बदौलत खोले गए विश्व विद्यालयों और कालेजों से पढ़कर निकले छात्रों के सवाल उन्हें परेशान करते हैं इसलिए वे शिक्षा का बजट कम कर रहे हैं। वहां संघी सोच के कुलपति भेज रहे हैं। एक लाख स्कूल बंद कर दिए गए ताकि गांव-गांव फैल रही शिक्षा को ख़त्म कर दिया जाए। ये इस सिस्टम के लिए घातक है।

सवाल पूछते हैं, यह उन्हें बर्दाश्त नहीं। इसलिए प्रतिपक्ष नेता को सदन में बोलने नहीं देते। मीडिया को खरीद लेते हैं। स्वतंत्र अभिव्यक्ति वाले लेखक, कवि और पत्रकार जेल भेज दिए जाते हैं। राहुल गांधी के सामने स्वतंत्र रुप से अपने विचार रखने वाले छात्र-छात्राओं को भी प्रताड़ित किया जा सकता है उन पर नज़र रखनी चाहिए। आइए बिना डरे इस सिस्टम के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करें। वरना अंधभक्त और उनके आका पढ़े-लिखे लोगों की आवाज़ दबाने का कुचक्र बड़े पैमाने पर शुरू कर सकते हैं।

इस आयोजन में पश्चिमी मध्य प्रदेश के छात्र-छात्राओं को ही बोलने का अवसर मिला महाकौशल, विन्घ्य, बुंदेलखंड और चंबल क्षेत्र के बच्चों की समस्या सामने नहीं आ पाई। इसलिए प्रदेश में एक बार और छात्रों की गूंज कार्यक्रम होना चाहिए। यह बात युवाओं की चर्चा में सामने आई है।

(सुसंस्कृति परिहार एक्टिविस्ट, टिप्पणीकार हैं।)

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