लखनऊ, 14 जुलाई। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) ने बलिया जिले के रेवती थाने में दलित युवक कामजी गोंड (42 वर्ष) की कथित पुलिस पिटाई के बाद हुई मौत पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच, दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा चलाकर कठोर दंड देने तथा पीड़ित परिवार को न्याय और समुचित मुआवजा देने की मांग की है।
पार्टी के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि मेरठ में दलित छात्रा की हत्या के मामले में न्याय की मांग कर रहे लोगों पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि बलिया में पुलिस हिरासत में दलित की मौत की एक और गंभीर घटना सामने आ गई। उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम उत्तर प्रदेश में कानून के राज के बजाय पुलिस की निरंकुशता और दंडमुक्ति की संस्कृति को उजागर करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन में पुलिस संविधान और कानून की सीमाओं से बाहर जाकर खुद ही न्यायाधीश और जल्लाद की भूमिका निभा रही है। हिरासत में मौत, फर्जी मुठभेड़ और पुलिसिया हिंसा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जबकि मानवाधिकारों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि कानून का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों को दंडित करने के बजाय सरकार उन्हें संरक्षण देती है, जिससे पुलिस का मनोबल जवाबदेही के बजाय निरंकुशता की ओर बढ़ता है।
भाकपा (माले) ने कहा कि रेवती थाना क्षेत्र के गायघाट गांव निवासी कामजी गोंड को पुलिस एक मामूली विवाद के सिलसिले में थाने ले गई थी। परिजनों का आरोप है कि थाने में उनकी बेरहमी से पिटाई की गई। गंभीर रूप से घायल होने के बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें ग्राम प्रधान के हवाले कर दिया। आरोप है कि ग्राम प्रधान उन्हें रास्ते में ही अचेत अवस्था में छोड़कर चला गया। बाद में परिजन उन्हें बलिया जिला अस्पताल ले गए, जहां से गंभीर हालत के कारण वाराणसी रेफर किया गया। उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
शव गांव पहुंचने के बाद 12 जुलाई को परिजनों और ग्रामीणों ने न्याय की मांग को लेकर बलिया-रेवती मार्ग पर शव रखकर प्रदर्शन किया। अब तक की कार्रवाई में दो पुलिसकर्मियों, ग्राम प्रधान लालू सिंह सहित छह लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है।
भाकपा (माले) ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए, सभी दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार कर उनके विरुद्ध निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई की जाए तथा पीड़ित परिवार को न्याय, सुरक्षा और उचित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)