Tuesday, October 4, 2022

JANCHOWK IMPACT: छत्तीसगढ़ में उजाड़े गए दलित गणेश राम को प्रशासन देगा मकान

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बालोद/रायपुर। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में जनचौक की एक खबर का असर हुआ है। दरअसल यहां डौंडी ब्लाक में स्थित सुरडोंगर के गणेशराम बघेल के घर को सरपंच ने बुल्डोजर से धराशायी कर दिया था। तब से यह परिवार न्याय के लिए दर-दर भटक रहा था। लेकिन इस परिवार का संघर्ष तब रंग लाया जब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के सदस्यों के एक दल ने घटनास्थल का दौरा किया और उसने प्रशासन को जरूरी निर्देश दिए। इस मामले में उसने डौंडी थाना प्रभारी अनिल ठाकुर, तहसीलदार डौंडी नेहा ध्रुव, एसडीएम डौंडी प्रेमलता चंदेल को भी तलब किया।

उपरोक्त घटना की जानकारी छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष नेसूबे के गृहमंत्री ताम्रध्वज साह, महिला व बाल विकास मंत्री व स्थानीय विधायक अनिला भेडिया, कांकेर सांसद मोहन मंडावी सहित अनेक नेताओं और अधिकारियों को भेजी गयी अपनी रिपोर्ट में दी है। जनचौक ने इस घटना की विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट प्रकाशित की थी।जिसे एक संदर्भ रूप में भी दर्शाया गया था। इसके पूर्व सामाजिक संगठनों के एक दल ने एसडीएम राजहरा व एसएसपी दल्लीराजहरा से मिल कर उन्हें मामले की गंभीरता से अवगत कराया था।

क्या है पूरा मामला

उक्त घटना 30 जनवरी, 2022 को महात्मा गांधी के शहादत दिवस के दिन की है, जब मोची समुदाय से ताल्लुक रखने वाले सूरडोंगर ग्राम पंचायत के निवासी गणेशराम बघेल के घर को जातिगत साजिश के तहत सरपंच, उप सरपंच व अन्य ने जेसीबी से ढहा दिया।

घटनास्थल पर मौजूद आयोग की उपाध्यक्ष पद्मा मनोहर और अन्य

बेघर गणेशराम कई दिनों तक ठंड में खुले आसमान के नीचे सोते रहे और शासन-प्रशासन का दरवाजा खटखटाते रहे। इस मामले में एक एफआईआर भी दर्ज हुई। लेकिन जब प्रशासन की तरफ से उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई, तब पीड़ित परिवार 27 फरवरी से डोंडी थाना परिसर में धरने पर बैठ गया। इसके साथ ही यह मामला बड़ा बन गया। जिसकी सूचना अनुसूचित आयोग के सदस्यों तक पहुंची। और उसने घटनास्थल का मुआयना करने का फैसला लिया।

प्रशासन गणेश का पुनर्वास करेगा: पद्मा मनहर

दल का नेतृत्व आयोग की उपाध्यक्ष पद्मा मनहर ने किया। दल ने सुरडोंगर पहुंचकर गणेश के तोड़े गए मकान का मुआयना किया। मनहर ने इस बात को माना कि गणेशराम बघेल के साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने कहा कि बेजा कब्ज़ा हर जगह होता है। उसके और परिवार के साथ मारपीट और आंखों के सामने अपनी सारी दुनिया के उजड़ जाने से वह बेहद डर गया है। उन्होंने बताया कि वह इस कदर डर गया है कि अब डौंडीलोहरा विधानसभा क्षेत्र में रहना ही नहीं चाहता है।

घटनास्थल की तस्वीर

मनहर के इस वक्तव्य के बाद जिले के प्रशासनिक अमले में हडकंप मच गया। आयोग ने पूरे मामले की गहराई से छानबीन की। पीड़ित परिवार के सदस्यों ने आयोग को बताया कि किस तरह से सरपंच कोमेश कोर्राम के भड़कावे में आकर ग्राम वासियों द्वारा जेसीबी से उनके घर को तोड़ा गया। इसमें दैनिक उपयोग की वस्तुओं मसलन गंजी, बर्तन को कुचलना, बच्चों की पुस्तक कॉपी को फाड़कर उनमें आग लगा देना, ओढ़ने-बिछाने व पहनने के कपड़ों तक को नष्ट कर देना, चावल की गंजी में मिट्टी मिलाने समेत तमाम बदसलूकियां शामिल थीं।इतना ही नहीं परिवार के सदस्यों को जातिगत गालियां भी दी गयीं। इस दौरान स्थानीय मोची समाज के पदाधिकारी और अन्य सामाजिक संगठन के लोग भी उपस्थित थे। पीड़ित परिवार के सदस्यों ने इस पूरे मसले में डौंडी पुलिस के संवेदनहीन रवैये और उसके द्वारा बरती गयी बेरुखी के बारे में विस्तार से बताया। उनका कहना था कि परिवार का मेडिकल भी ठीक से नहीं कराया गया।

दल ने स्थानीय प्रशासन के अलावा सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधि मंडल और सुरडोंगर ग्राम समिति के सदस्यों से भी मुलाकात की। विभिन्न स्तरों की चर्चा के बाद मनहर ने पीड़ित परिवार को बालोद जिला मुख्यालय में आवास का प्रस्ताव दिया। जिसे गणेशराम ने मान लिया। मनहर ने इस तरह से इस मसले का समाधान निकालने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि गणेशराम को जिला प्रशासन की ओर से बालोद जिले में नया मकान बनवाकर दिया जायेगा।

आयोग की उपाध्यक्ष पद्मा मनहर एसडीएम प्रेमलता चंदेल और अन्य के साथ।

मिली जानकारी के अनुसार आयोग ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह इस प्रकरण में एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 की धाराओं को भी जोड़ दे। क़ानूनी सलाह केंद्र के अधिवक्ता शोभाराम गिलहरे के अनुसार यह मामला बहुत पेंचीदा है, पर इसमें एससी/एसटी की धारायें जुड़ सकती हैं। उनका कहना है कि सरपंच आदिवासी समाज से होने के कारण उन पर तकनीकी तौर से एट्रोसिटी की धाराएं नहीं लगेंगी, पर जो गैर-आदिवासी या गैर-दलित हैं, उन सब पर यह लगना जायज होगा। इसमें कोई कानूनी अड़चन नहीं होनी चाहिए। वे आगे कहते हैं कि अतिक्रमण हटाने का कानूनी आधार सरपंच को नहीं है। यह अधिकार केवल एक राजस्व अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में आता है।

कुछ सार्थक कार्यवाही, पर अभी भी बहुत कुछ है बाकी

मकान बनाकर देने के संदर्भ में अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है। रुखमनी बघेल (गणेशराम की पत्नी) कहती हैं कि “आयोग ने हमको बालोद जिला मुख्यालय में घर बनाने की बात कहा है पर यहां तो बात कुछ और ही हो रहा है।” आयोग के जाने के बाद डौंडी के प्रशानिक अधिकारियों ने परिवार को सूचित किया कि बालोद और दल्ली में जमीन नहीं है, इसलिए अब माकन के लिए जमीन डौंडी में ही देखी जायेगी।

इस बात कि पुष्टि के लिए जब एसडीएम डौंडी प्रेमलता चंदेल से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि इसमें प्रार्थी की पात्रता की जांच कर आगे कार्यवाही की जायेगी। सूत्रों से यह भी पता चला है कि चंदेल का क्षेत्राधिकार डौंडी तक ही सीमित है, इसलिए वह इसके आगे के मामले में अपना हाथ डालने से बच रही हैं और खुद को सुरक्षित रखना चाहती हैं।

रुखमनी आगे बताती हैं कि दो दिन पहले तहसीलदार नेहा ध्रुव और पटवारी ने डौंडी में मकान बनाने के लिए जमीन देखने के वास्ते परिवार को साथ ले गए और एक सुनसान जगह पर मकान बनाकर देने की बात कही। इस जगह पर कोई आबादी नहीं है, बल्कि इसके समीप केवल एक शराब भट्टी है। ध्रुव के इस प्रस्ताव को परिवार ने सिरे से ठुकरा दिया।

बुल्डोजर से मकान के गिराने की तस्वीर

मनहर ने पीड़ित गणेशराम के परिवार के लिए तत्काल आवास की व्यवस्था की भी बात कही। एसडीएम डौंडी चंदेल ने इस संदर्भ में बताया कि परिवार को मौजूदा समय में डौंडी नगर पालिका के एक पुराने कार्यालय में ठहराया गया है। गणेशराम के बड़े पुत्र साहिल ने भी इस बात की पुष्टि की।

14 साल का साहिल 8वीं के बाद घर की माली हालत ठीक न होने के चलते पढ़ाई छोड़कर पिता के साथ वेल्डिंग का काम करने लगा है। अभी वेल्डिंग का काम भी बंद है। साहिल के दोनों छोटे भाईतामेश्वर और सागर क्रमश: 8वीं और 5वीं कक्षा में पढ़ते हैं।उनकी पढ़ाई इस घटना के बाद बंद हो गयी है। डौंडी स्थित मोची समाज के अध्यक्ष जीवधन जगनायक ने बताया कि प्रशासन के साथ चर्चा के दौरान यह मामला भी सामने आया जिसका एक हल ऐसा निकला गया कि दोनों बच्चे डौंडी में ही इस साल की परीक्षा देंगे।

प्रकरण के एक अन्य पहलू पर जगनायक ने बताया कि थाने के पुलिसवाले घर ढहाने की पूरी घटना का वीडियो क्लिप लेकर गए हैं, ताकि अपराधियों की पहचान की जा सके। साथ ही पीड़ित व्यक्ति “मोची समाज” से ताल्लुक रखने वाला है, इसे मूल एफआईआर में दर्ज करने की कार्यवाही भी हुई।

परिवार की वर्तमान स्थिति

कुल मिलाकर अभी परिवार में घर निर्माण को लेकर एक असमंजस की स्थिति बनी हुई है। रुखमनी कहती हैं कि जिस तरह का प्रशासनिक रवैया और व्यवहार दिख रहा है इससे संदेह पैदा होता है कि मकान बनाकर देंगे भी या नहीं। और अगर बनेगा तो कहां? मकान आयोग की उपाध्यक्ष के द्वारा बताए गए स्थान पर यानी बालोद में बनेगा या फिर कहीं और?

थाने के सामने धरने पर बैठा गणेश राम का परिवार

गणेशराम इस बात की पुष्टि करते हुए सवालिया लहजे में पूछते हैं कि क्या यह सब हमारे द्वारा थाने के सामने किए जाने वाले आंदोलन को शिथिल करने के लिए था? लेकिन साथ ही उन्होंने कहा किहालांकि वर्तमान में जो अस्थाई निवास दिया गया है उसमे 3 कमरे, 1 हाल और रसोईघर शामिल है।पर क्या कोई पूछता भी है कि मेरे घर में खाना कैसे पकेगा? कोई जनता भी है कि मेरे सारे बर्तन और अनाज भी सुरडोंगर के मकान टूटने के साथ ही खत्म कर दिए गए? यहां तो पीने का पानी तक नहीं है। घर में खाने को नहीं है। ऐसे में इस 3 कमरे, 1 हाल और रसोईघर का मैं क्या करूँगा?”

हालांकि आयोग ने अपने दौरे के बाद तहसीलदार विनय देवांगन और टीआई अनिल ठाकुर से इस दलित परिवार को तत्काल सहायता पहुंचाने का निर्देश दिया था।लेकिन गणेशराम के परिवार को किसी प्रकार का आर्थिक सहयोग प्रशासन की ओर से नहीं प्राप्त हुआ। जगनायक ने दावा किया कि समाज की ओर से तत्काल 2700 रूपये सहायता राशि पीड़ित परिवार को प्रदान की गयी।

बातचीत के दौरान गणेशराम बताते हैं कि आज कल एक अफवाह फैली हुई है कि एसडीएम ने आर्थिक सहायता के रूप में 20000 की नगद राशि दी। लेकिन यह बात पूरी तरह से झूठ है।

कुल मिलकर इस दलित परिवार का जीवन काफी कठिन परिस्थितियों से गुजर रहा है। एक दलित परिवार का पूरा सपना तहस-नहस हो गया। इसके साथ ही स्थानीय एवं सूबे के शासन की असंवेदनशीलता भी स्पष्ट तौर पर जाहिर हो रही है। जबकि घटना को अंजाम देने वाला सरपंच और उसका गिरोह सरेआम सीना तानकर घूम रहा है। ऐसे में दलितों का संवैधानिक अधिकार किस तरह से सुरक्षित रहेगा, यह सवाल आज भी छत्तीसगढ़ में गूंज रहा है।

पीड़ित गणेशराम बघेल एक भूमिहीन हैं और वेल्डिंग का काम कर अपना जीवन यापन करते हैं। एक छोटी वेल्डिंग मशीन के सहारे घर-घर जाकर वह काम कर अपने परिवार के साथ विगत 20 वर्ष से उस गांव में रहते आ रहे थे। तकरीबन 7-8 साल पहले मेहनत-मजदूरी करके सार्वजनिक जमीन पर ईंट और खपरैल से उन्होंने अपना घर बनाया था, जिसे गांव वालों ने कुछ ही पल में ध्वस्त कर दिया।

गणेश राम आपबीती बताते हुए।

परिवार के अनुसार घर को ढहाए जाने के पूर्व किसी प्रकार की कोई नोटिस या सूचना उन्हें नहीं दी गयी। अचानक ही गांव के सरपंच, उपसरपंच, पंच और अन्य समेत लगभग 150 ग्रामीण आये और घर तोड़ने के लिए जेसीबी चलाने लगे। रोकने की कोशिश करने पर सभी ने मिलकर पूरे परिवार की जमकर पिटाई की। गणेश बघेल का कहना था कि “बचाव के लिए जब डौंडी थाने में फ़ोन किया तो पुलिस वाले बोले कि वो मुझे बचाने के लिए नहीं आ सकते। तब मैं अपने परिवार को लेकर खुद थाने गया और शिकायत दर्ज करायी। इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई तो मैं और पूरा परिवार 27 फ़रवरी से थाने के सामने धरने पर बैठ गए।” कई दिनों तक न्याय की गुहार लगाते हुए थाना परिसर में धरना देने के बावजूद शासन-प्रशासन मौन धारण किए हुए था।

इस पूरे घटनाक्रम पर मोची समाज की अपनी अलग राय है। मोची समाज के एक पदाधिकारी का मानना है कि यह घटना केवल अतिक्रमण हटाने के लिए नहीं थी, बल्कि यह दलित समाज के खिलाफ बढ़ रहे जातिगत भेद-भाव का नतीजा था। लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि यदि अतिक्रमण हठाना ही था, तो इस काम को विधिवत तहसीलदार, एसडीएम, थाना प्रभारी की उपस्थिति में करना चाहिए था, ना कि बिना किसी सूचना के अचानक। तहसीलदार प्रेमलता चंदेल ने इस बात की पुष्टि की कि वह स्वयं घटना के समय मौका-ए-वरदात पर उपस्थित नहीं थीं।

बुल्डोजर से गिराया जाता गणेश राम का मकान।

प्रारंभिक प्राथमिकी में अनुसूचित जाति अत्याचार अधिनियम की धाराएं नहीं हैं। दलित संगठनों के अनुसार घटना को संपूर्णता से समझें तो अपराध में जातिगत रंजिश स्पष्ट है। इन संगठनों की मानें तो मामला दलित अत्याचार का है, लेकिन इसको अत्याचार के दायरे से बहार रखकर देखा जा रहा है। इसे केवल अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही कर दिखने का प्रयास जारी है। जिन धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी थी उनमें भारतीय दंड संहिता की धराएं 147, 148, 294, 506, 323, 427 दर्ज हैं। आपको बता दें कि इस मामले में शामिल सुरडोंगर के सरपंच कोमेश कोर्राम स्वयं कांग्रेस पार्टी के डौंडी ब्लाक कमेटी के सदस्य हैं और वह खुलकर गणेशराम को चुनौती देते रहे हैं।

(रायपुर से डॉ. गोल्डी एम जॉर्ज की रिपोर्ट।)

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