Friday, August 12, 2022

मधुबनी: नर्सिंग होम के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले 22 वर्षीय पत्रकार की जलाकर हत्या

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बिहार के मधुबनी ज़िले में नर्सिंग होम और अस्पतालों के ख़िलाफ़ मोर्चा खोलने वाले एक 22 वर्षीय स्थानीय पत्रकार बुद्धिनाथ झा की जलाकर हत्या कर दी गई है। 12 नवंबर को उनकी अधजली हालत में लाश मिली। 

नौ नवंबर की रात बेनीपट्टी निवासी बुद्धिनाथ झा उर्फ अविनाश का अपहरण कर लिया गया था। काफी खोजबीन के बाद भी जब अविनाश का कोई अता-पता नहीं चला तो उनके बड़े भाई त्रिलोक कुमार झा ने बेनीपट्टी थाना में अपहरण की प्राथमिकी दर्ज़ कराई। प्राथमिकी दर्ज़ करने के बाद सक्रिय हुई पुलिस ने शुक्रवार 12 नवंबर की रात अपहृत पत्रकार बुद्धिनाथ झा (अविनाश) का शव बेनीपट्टी -पुपरी स्टेट हाईवे के उड़ेन गांव के निकट सड़क के किनारे से बरामद किया। अपहर्ताओं ने अपहृत बुद्धिनाथ झा उर्फ़ अविनाश की हत्या कर शव को जलाकर सड़क के किनारे फेंक दिया था। साक्ष्य मिटाने की नीयत से अपहर्ताओं ने शव को जला दिया था। ताकि शव की पहचान नहीं हो सके। 

मरहूम पत्रकार के चचेरे भाई बीजे विकास के मुताबिक लाश अधजली हालत में थी। हम लोगों ने उसकी पहचान हाथ की अंगूठी, पैर के मस्से और गले की चेन से की।

मूल रूप से बेनीपट्टी के ही रहने वाले बुद्धिनाथ बीते दो साल से पत्रकार के तौर पर काम कर रहे थे और वो मधुबनी के बेनीपट्टी प्रखंड के ही एक न्यूज़ पोर्टल बीएनएन न्यूज़ बेनीपट्टी से जुड़े हुये थे। जो कि उनके चचेरे भाई बीजे विकास चलाते थे। 

7 नवंबर को बुद्धिनाथ झा ने अपने एक फ़ेसबुक पोस्ट में एक नर्सिंग होम के ख़िलाफ़ लिखा था, ‘द गेम विल रिस्टार्ट ऑन द डेट 15.11.2011. 

माना जा रहा है इस फेसबुक पोस्ट के बाद ही वो हत्यारों के निशाने पर आ गये। 

बुध्दिनाथ के चचेरे भाई और न्यूज़ पोर्टल के प्रमुख बीजे विकास के मुताबिक़ “इस पोस्ट के बाद बुद्धिनाथ झा 9 नवंबर को लापता हो गया। उन लोगों ने इसकी सूचना 10 नवंबर को बेनीपट्टी थाने में दी जो कि 11 नवंबर को दर्ज़ हुई। पुलिस ने बुद्धिनाथ के मोबाइल को ट्रेस किया तो लोकेशन बेनीपट्टी थाने से पांच किलोमीटर दूर बेतौना गांव में मिली। 10 नवंबर की सुबह 9 बजे के बाद उनका फ़ोन भी बंद हो गया। स्थानीय पुलिस ने उनकी अंतिम लोकेशन पर जाकर तलाश की लेकिन कुछ ठोस नहीं मिला। 

सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक़ वो रात 9 बजे से 9.58 बजे तक घर की गली के आगे पड़ने वाली मुख्य सड़क पर फोन पर बात करते दिख रहा है। वो आख़िरी बार रात दस बजकर दस मिनट पर बाज़ार में दिखा। “

वहीं दूसरी ओर पत्रकार बुद्धिनाथ झा के लापता होने की ख़बर सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो 12 नवंबर को बुद्धिनाथ के चचेरे भाई बीजे विकास के फोन पर पड़ोस के उड़ेन नाम के गांव से एक स्थानीय व्यक्ति ने फ़ोन किया और एक अज्ञात लाश के मिलने की सूचना दी।  

मरहूम पत्रकार के परिवार ने लापता होने के वक्त दी शिक़ायत और दर्ज़ कराई एफ़आईआर में कई स्थानीय क्लिनिकों के संचालकों के ख़िलाफ़ आरोप लगाए हैं। परिजनों का आरोप है कि पत्रकार की हत्या अस्पताल संचालकों ने करवाई है।

बेनीपट्टी इलाक़े के एसएचओ अरविंद कुमार के मुताबिक इस मामले में लगातार छापेमारी जारी है और कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है। 

बुद्धिनाथ झा के बड़े भाई त्रिलोक झा के मुताबिक, “पहले उसने एक क्लिनिक शुरू किया था जिसमें बाहर से आए डॉक्टर स्थानीय लोगों का इलाज़ करते थे। लेकिन स्थानीय नर्सिंग होम संचालकों ने उसे इतना परेशान किया कि उसे ये काम बंद करना पड़ा। इसके बाद इसने ठान लिया कि वो फ़र्ज़ी नर्सिंग होम के इस धंधे को ख़त्म करेगा।”

बुद्धिनाथ झा पिछले तीन सालों से लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के पास अपने इलाके के नर्सिंग होम से जुड़ी शिक़ायतें भेज रहे थे। इसके अलावा वो सूचना के अधिकार का भी इस्तेमाल करते थे। 

बिहार राज्य में 5 जून, 2016 को लोक शिकायत निवारण अधिनियम लागू किया गया था। जिसका मकसद 60 कार्य दिवस के अंदर आम लोगों की शिकायतों की सुनवाई करना। 

बेनीपट्टी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी एसएन झा के मुताबिक बुद्धिनाथ झा ने इलाके के निजी नर्सिंग होम और पैथलैब को लेकर लोक शिक़ायत निवारण के तहत बहुत शिक़ायतें की थीं। जिस पर यहां से जांच के बाद कार्रवाई की अनुशंसा भी की गई और नर्सिंग होम के ख़िलाफ़ कार्रवाई भी हुई। 

बुद्धिनाथ झा की शिक़ायत पर फरवरी 2021 बेनीपट्टी और धकजरी के 19 जांच घर और नर्सिंग होम को बंद करने का सरकारी आदेश ज़ारी हुआ। इसी तरह दिसंबर 2019 में हुई जांच में 9 नर्सिंग होम और पैथलैब को बंद करने का आदेश ज़ारी हुआ। अगस्त 2021 में सिविल सर्जन ने 4 निजी नर्सिंग होम पर 50 हज़ार का जुर्माना भी लगाया था। 

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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