Wednesday, August 17, 2022

प्रयागराज में दुष्‍कर्म का आरोपित सीएमपी डिग्री कालेज का असिस्टेंट प्रोफेसर गिरफ्तार

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प्रयागराज में सीएमपी डिग्री कालेज के असिस्टेंट प्रोफेसर मदन यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है, उससे पूछताछ चल रही है। आरोपी मूल रूप से गाजीपुर का रहने वाला है। वह काफी दिनों से फरार चल रहा था। मदन यादव के खिलाफ दो साल पूर्व एक प्रतियोगी छात्रा ने कर्नलगंज थाने में दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। उस मुकदमे में पुलिस ने आरोपी मदन यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जेल से निकलने के बाद वह पीड़िता और उसके परिवार वालों को परेशान करने लगा। इसी बीच इस मामले में नया-नया तथ्य सामने आने लगा।

पीड़िता का आरोप है कि मदन यादव ने हंडिया इंस्पेक्टर बृजेश यादव व अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर उसके मुकदमे में गवाह को फर्जी तरीके से जेल भिजवाया और उसे परेशान किया। इसको लेकर प्रतियोगी छात्रा की तहरीर पर कुछ दिन जार्जटाउन थाने में मदन यादव, बृजेश यादव व अन्य के खिलाफ एससी एसटी एक्ट समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसी मुकदमे में मदन यादव फरार था, जिसकी गिरफ्तारी की गई है। इससे पहले गवाह को फर्जी ढंग से जेल भेजने और पीड़िता के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने के मामले में आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया था।

कर्नलगंज निवासी दुष्कर्म पीड़िता ने सीएमपी डिग्री कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर मदन यादव व चार अज्ञात पर इसी साल 29 सितंबर को मारपीट, धमकी देने समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कराया था। सुनवाई न होने पर उसने कोर्ट में गुहार लगाई थी और कोर्ट के आदेश पर ही यह केस दर्ज किया गया था। इसमें पीड़िता ने आरोप लगाया है कि वह प्रयागराज स्टेशन जा रही थी तभी सीएमपी गेट पर रोककर मदन यादव व उसके तीन-चार साथी उसे जबरन कॉलेज के भीतर घसीट ले गए और मीटिंग हाल में बंद कर अभद्रता करते हुए पूर्व में दर्ज मुकदमे में गवाही देने पर जान से मारने की धमकी दी।

वहां से जार्जटाउन थाने जाते वक्त 100 मीटर पहले ही रोककर जान से मारने की नीयत से नाले में फेंक दिया। साथ ही ईंट-पत्थर से वार किए। पीड़िता का आरोप है कि उसे धमकाने, मारपीट आदि में पांच अन्य प्रोफेसरों ने मदन की मदद की और उसने उनका नाम अपने बयान में पुलिस को बताया है। मदन यादव की गिरफ्तारी के बाद ऐसे में उसके मददगारों प्रोफेसरों पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है। उसने बताया कि उससे दुष्कर्म का आरोपी मदन यादव अपने पद व प्रभाव के चलते उसके साथ ही उसके गवाह, परिवारीजनों फर्जी मुकदमा दर्ज कराकर अपने मुकदमे में सुलह के लिए दबाव बना रहा है। इसी के तहत उसने पहले फूलपुर में उसके भाई व गवाह पर दुष्कर्म का फर्जी केस दर्ज कराया।

इस मामले में एफआर लगने के बाद उसने हंडिया इंस्पेक्टर रहे बृजेश सिंह के साथ मिलकर उसके गवाह को हंडिया में दर्ज दुष्कर्म के मामले में फर्जी तरीके से जेल भेज दिया। यही नहीं आरोप यह भी है कि इसके अलावा भी उसके खिलाफ मदन यादव की तहरीर पर जार्जटाउन थाने में दो फर्जी मुकदमे लिखवा दिए। तहरीर में मांग की गई कि मदन यादव व इस साजिश में शामिल इंस्पेक्टर बृजेश सिंह, एसआई बलवंत यादव व अन्य लोगों पर विधिक कार्रवाई कर उसकी व उसके गवाह व परिवारीजनों की जान-माल की सुरक्षा की जाए।

निलंबित इंस्पेक्टर-दरोगा व असिस्टेंट प्रोफेसर पर कुल 14 धाराओं में केस दर्ज किया गया है। इनमें लोकसेवक का किसी व्यक्ति को क्षति पहुंचाने के आशय से कानून का उल्लंघन करना, लोकसेवक का क्षति कारित करने के आशय से अशुद्ध दस्तावेज रचना, लोकसेवक द्वारा किसी व्यक्ति को दंड से या किसी संपत्ति के समपहरण से बचाने के आशय से विधि के निर्देश की अवज्ञा करना, किसी व्यक्ति को दंड या किसी सपंत्ति की समपहरण से बचाने के आशय से लोकसेवक द्वारा अशुद्ध अभिलेख या लेख की रचना करना, किसी व्यक्ति को गलत तरीके से प्रतिबंधित करना समेत अन्य धाराएं शामिल हैं। जिनमें आपराधिक षड्यंत्र और एससी-एसटी एक्ट भी शामिल है।

पीड़िता की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत में बताया गया है कि उसके मुकदमे का आरोपी मदन यादव व निलंबित इंस्पेक्टर बृजेश सिंह दोनों गाजीपुर के करीमुद्दीनपुर गांव के रहने वाले हैं। इसी के तहत दोनों ने मिलकर यह साजिश रची, जिसमें अपने अन्य सहयोगियों को भी शामिल कर लिया। इसके साथ ही दबाव बनाने के लिए उसके गवाह को फर्जी तरीके से जेल भेजा और उस पर फर्जी केस भी दर्ज कराए।

गौरतलब है कि इस मामले में कुल आठ पुलिसकर्मी निलंबित किए जा चुके हैं। इनमें पूर्व सर्विलांस प्रभारी संजय सिंह यादव, इंस्पेक्टर शिशुपाल शर्मा, एसआई महेश चंद्र निषाद, हेड कांस्टेबल पन्नालाल यादव, अजय यादव व कांस्टेबल केके यादव भी शामिल हैं। विवेचना निष्पक्ष ढंग से हुई तो साजिशकर्ताओं के रूप में इन पुलिसकर्मियों का नाम आना लगभग तय है।

इस प्रकरण में पुलिस के आला अफसरों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। बड़ा सवाल यह है कि विवेचना में खेल होता रहा तो पर्यवेक्षण अफसरों को इसकी जानकारी कैसे नहीं हो सकी। फूलपुर में अगर विवेचना के दौरान मामला फर्जी पाया गया तो फिर फर्जी मुकदमा दर्ज कराने वाले पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। हंडिया में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद 169 की रिपोर्ट भेजकर फर्जी तरीके से जेल भेजे गए गवाह को रिहा कराया गया, तो उसी समय इस फर्जीवाड़े का संज्ञान लेकर दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

गाजीपुर की मूल निवासी पीड़िता ने दो साल पहले कर्नलगंज थाने में असिस्टेंट प्रोफेसर के विरुद्ध दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था, लेकिन एक साल बाद वह जमानत पर जेल से बाहर आ गया। आरोप है कि असिस्टेंट प्रोफेसर ने सर्विलांस प्रभारी व अन्य पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर छात्रा के सीनियर छात्र जो गवाह था, उसके विरुद्ध पहले फूलपुर में दुष्कर्म का फर्जी मुकदमा दर्ज कराया। इसके बाद हंडिया थाने में दर्ज दुष्कर्म के मुकदमे में गवाह को फर्जी ढंग से गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। साथ ही उसके पास से बरामद स्कूटी का नंबर बदलकर कूटरचना के मुकदमे में भी फंसाने की कोशिश हुई। हालांकि पीड़िता की शिकायत पर जांच हुई तो पुलिसकर्मियों की कारस्तानी का भंडाफोड़ हुआ।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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