Wednesday, August 10, 2022

लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड में एसआईटी की रिपोर्ट के बाद गृह राज्य मंत्री को इस्तीफा देना ही होगा!

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लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड की सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार गठित एसआईटी की रिपोर्ट आ गई है। जिसमें स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि अब तक की विवेचना व संकलित साक्ष्यों से यह प्रमाणित हुआ है कि अभियुक्त गणों द्वारा अपराधिक कृत्य लापरवाही या उपेक्षा से नहीं बल्कि जानबूझकर पूर्व से नियोजित योजना के अनुसार जान से मारने की नीयत से कारित किया गया है। जिसमें पांच लोगों की मृत्यु हो गई है एवं कई घायल हुए हैं। लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड में एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद क्या इस्तीफा देंगे गृह राज्य मंत्री? तथा कई मजरूबों के फ्रैक्चर होना पाया गया। मुख्य विवेचक विशेष अनुसंधान दल निरीक्षक विद्या राम दिवाकर द्वारा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जनपद खीरी के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने लखीमपुर खीरी किसान हत्याकांड के साजिशकर्ता की तत्काल बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग करते हुए इस मुद्दे पर संघर्ष जारी रखने का ऐलान किया है। यह बयान संयुक्त किसान मोर्चा की 9 सदस्यीय समिति के सदस्य बलबीर सिंह राजेवाल, डॉ दर्शन पाल, गुरनाम सिंह चढूनी, हन्नान मोल्ला, जगजीत सिंह डल्लेवाल, जोगिंदर सिंह उगराहां, शिवकुमार शर्मा (कक्का जी), युद्धवीर सिंह, योगेंद्र यादव द्वारा जारी किया गया।
संयुक्त किसान मोर्चा के नेता लगातार यह दोहरा रहे हैं कि यूपी, उत्तराखंड मिशन के तहत चलाए जा रहे अभियान में एमएसपी की कानूनी गारंटी और अजय मिश्र टेनी की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी का मुद्दा मुख्य होगा। इसके बावजूद गोदी मीडिया यह दुष्प्रचार कर रहा है कि संयुक्त किसान मोर्चा ने आंदोलन समाप्त कर दिया है तथा लखीमपुर खीरी का मुद्दा ठंडे बस्ते में चला गया है । गोदी मीडिया द्वारा पूरे मुद्दे को इस तरह से उठाया जा रहा है, जिससे लगता है , हत्यारों को सजा दिलाने तथा गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी कराने की जिम्मेदारी केवल संयुक्त किसान मोर्चा की ही है।
यह सही है यदि संयुक्त किसान मोर्चा ने इसे मुख्य मुद्दा नहीं बनाया होता और सर्वोच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप नहीं किया
होता तो मामला रफा दफा कर दिया जाता। अब एसआईटी की रिपोर्ट आने के बाद सर्वोच्च न्यायालय को हत्याकांड की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराने के लिए अजय मिश्र टेनी को मंत्रिमंडल से हटाने का निर्देश देने की अपेक्षा देश कर रहा है ।
क्या अजय मिश्रा को रिपोर्ट आने के बाद खुद इस्तीफा नहीं दे देना चाहिए? परन्तु यह वही कर सकता है जो नैतिकता में विश्वास रखता हो ।
इस्तीफ़े का मुद्दा भाजपा की पार्टी के तौर पर नैतिकता में विश्वास के साथ जुड़ा हुआ है साथ ही केंद्र सरकार और उत्तरप्रदेश सरकार के मंत्रिमंडलों की नैतिकता से जुड़ा हुआ है।
क्या पूरे समाज और देश के लिए यह शर्मनाक नहीं है कि हत्याकांड का षडयंत्रकर्ता मंत्री रहे और विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया चुपचाप सब देखता रहे?
विपक्षी दलों ने अजय मिश्रा टेनी के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है लेकिन यह सर्वविदित है कि बयान तक सीमित रहने से पीड़ितों को न्याय नहीं मिलने वाला है।
देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री सहित भाजपा के शीर्षस्थ नेता 3 दिन के लिए वाराणसी में हैं। लेकिन धार्मिक कर्मकांड और राजनीति से आगे बढ़कर अजय मिश्र टेनी से इस्तीफा लेना तो दूर एसआईटी की रिपोर्ट का संज्ञान तक लेने को तैयार नहीं हैं। मोदी और योगी दोनों कोई टिप्पणी करने को तैयार नहीं हैं।
यहां विचारणीय प्रश्न यह है कि वाराणसी में जुटे धार्मिक और राजनीतिक व्यक्तियों में यह नैतिक साहस नहीं है कि वे प्रधानमंत्री को इस मुद्दे को लेकर सार्वजनिक तौर पर सलाह दे । हिंदू होने के नाते या मोदी या पार्टी समर्थक होने का मतलब क्या यह है कि नेता के सामने चाटुकारिता करने के अलावा मुंह बंद रखा जाएगा, क्या भाजपा का आचरण एक आपराधिक गिरोह की तरह का नहीं है जो अपने गिरोह के सदस्य द्वारा किए गए हर अपराध को जायज ठहराता है?
ब्राह्मणों के संगठनों का खुलकर हत्यारों और षड्यंत्रकर्ताओं के खिलाफ खुलकर सामने नहीं आना भी बतलाता है कि जातिगत समूह भी आपराधिक गिरोह के तौर पर कार्य कर रहे हैं ।
क्या अजय मिश्रा टेनी के इस्तीफे या बर्खास्तगी और गिरफ्तारी का मुद्दा उत्तर प्रदेश चुनाव का मुख्य मुद्दा नहीं होना चाहिए ? यह मुद्दा किसी पार्टी का नहीं है बल्कि प्रदेश या देश कानून और संविधान से चलेगा या कुछ लोगों को कानून हाथ में लेकर खुद न्याय करने की इजाजत दी जाएगी। उत्तर प्रदेश पुलिस ने अलग-अलग रिपोर्टों के अनुसार एक हजार से अधिक लोगों को घुटने के नीचे गोलियां मारी गई।150 से ज्यादा मुठभेड़ बताकर निर्दोष नागरिकों की हत्या कर दी गई है तथा 50 से अधिक निर्दोष नागरिक मॉब लिंचिंग के शिकार हुए हैं।
अजय मिश्र टेनी ने सार्वजनिक तौर पर 2 मिनट में ठीक कर देने की धमकी को अमलीजामा पहनाते हुए अपने बेटे और गुर्गों से दिनदहाड़े चार किसानों और एक पत्रकार की दिनदहाड़े कुचलकर हत्या करवा दी यानी कानून हाथ में लेकर खुद ही सजा दिलवा दी। यह लिखना गलत नहीं होगा कि गोडसे वादियों से इससे ज्यादा और कुछ अपेक्षा नहीं की जा सकती लेकिन यही सिलसिला यदि चलता रहा तो आने वाले समय में गृहयुद्ध की स्थिति बनने से कौन रोक सकेगा?
इस मुद्दे को लेकर किसान संगठन तो अपना काम करेंगे ही परंतु उत्तर प्रदेश के जन संगठनों और विपक्षी दलों को सड़कों पर उतरकर अजय मिश्रा टेनी के इस्तीफे के लिए आंदोलन चलाना होगा। तीन किसान विरोधी कानूनों को रद्द कराने के लिए चले 380 दिन के संघर्ष की सफलता से यह भी साबित हो गया है कि जनता की ताकत सरकार को झुकाने के लिए मजबूर कर सकती है। सोशल मीडिया भी यदि ठान ले तो मोदी जी को अजय मिश्र टेनी को ज्यादा लंबे समय तक मंत्रिमंडल में बनाए रखना संभव नहीं होगा।

(डॉ सुनीलम, अध्यक्ष, किसान संघर्ष समिति का लेख।)


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