पटना। अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) सब प्लान की राशि में हेराफेरी पर रोक लगाने, एससी-एसटी सब प्लान कानून बनाने, प्रोन्नति में आरक्षण पर तत्काल रोक हटाने, आरक्षित पदों पर भर्ती तुरंत शुरू करने, सभी भूमिहीनों को 10 डिसमिल जमीन देने और पक्का मकान देने के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर आज पटना के जगजीवन संस्थान में नेशनल दलित समिट की ओर से दलित अधिकार सम्मेलन का आयोजन किया गया।
इस सम्मेलन में सेंटर फॉर दलित स्टडीज, हैदराबाद के एम. लक्ष्मणैया, बिहार विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी, नैकडोर के अध्यक्ष अशोक भारती, विधायक सत्यदेव राम, महबूब आलम, एमएलसी शशि यादव, पूर्व विधायक मनोज मंजिल, कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद, सीपीआई विधायक सूर्यकांत पासवान, पूर्व मुख्य अभियंता विश्वनाथ चौधरी, हरिकेश्वर राम, अनुसूचित जाति-जनजाति कर्मचारी संघ के धर्मेंद्र कुमार दास, भासू के पूर्व अध्यक्ष रामप्यारे प्रसाद आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व कुलपति प्रो. रमाशंकर आर्य ने की। उनकी दो पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया। संचालन ओमप्रकाश मांझी ने किया।
सम्मेलन में निम्नलिखित प्रस्ताव पारित किए गए:
1. दलित कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और खेत एवं ग्रामीण मजदूर संगठनों का यह समागम मांग करता है कि सरकार एससी-एसटी सब प्लान के पिछले पांच वर्षों के व्यय पर श्वेत पत्र जारी करे। इस संबंध में कानून न बनाना दलित और आदिवासी समाज के साथ विश्वासघात है। बिहार सरकार तत्काल अध्यादेश लाकर इस मुद्दे पर कानून बनाए।
2. बिहार सरकार ने प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन करते हुए एससी-एसटी को छोड़कर अन्य समूहों को प्रोन्नति दी है, जो सरासर अन्याय है। सुप्रीम कोर्ट में मामले को लंबित दिखाकर यह कदम उठाया गया। प्रोन्नति की प्रक्रिया सभी के लिए समान होनी चाहिए थी। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के आधार पर जो फैसला होता, वह सभी पर लागू होना चाहिए था। इस नीति ने भर्ती प्रक्रिया को भी बाधित किया है, जिससे एससी-एसटी समुदाय से भर्तियां रुक गई हैं। दलित अधिकार समागम मांग करता है कि इस अन्यायपूर्ण निर्णय को सरकार तत्काल वापस ले।
3. दलित और वंचितों के आवास के अधिकार को संवैधानिक दर्जा दिया जाए। जहां लोग बसे हैं, वहां भौतिक सर्वेक्षण कर उन्हें जमीन का पट्टा दिया जाए। बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाई जाए और वैकल्पिक व्यवस्था के बिना किसी का आशियाना न उजाड़ा जाए। सभी दलित और वंचितों को कम से कम 5 डिसमिल जमीन और पक्का मकान उपलब्ध कराया जाए।
4. भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त मतदान के अधिकार को छीनने वाली विशेष सघन पुनरीक्षण प्रक्रिया को चुनाव आयोग तत्काल वापस ले। आम गरीबों के पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, राशन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र को चुनाव आयोग मान्यता दे। प्रवासी बिहारियों के मतदान अधिकार छीनना अलोकतांत्रिक और संविधान विरोधी है। समागम इसकी कड़ी निंदा करता है।
5. दलित और वंचित बच्चियों के साथ बलात्कार और हत्या की बढ़ती घटनाओं पर दलित अधिकार समागम गहरा आक्रोश व्यक्त करता है। एससी-एसटी अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमों की त्वरित और तीव्र सुनवाई हो। यह समागम बढ़ते अपराधों और कमजोर वर्गों के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर अंकुश लगाने की मांग करता है।
(प्रेस विज्ञप्ति)