आपरेशन सिंदूर पर लोस में बहस के दौरान विपक्ष ने जबर्दस्त तरीके से की सरकार की घेरेबंदी

नई दिल्ली। सोमवार को विपक्ष ने लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर हुई बहस के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को लेकर सरकार को घेरा, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच उन्होंने “संघर्षविराम” कराया है, और यह भी कहा कि इस संघर्ष के दौरान पांच लड़ाकू विमानों को मार गिराया गया था।

विपक्ष ने पहलगाम आतंकवादी हमले को रोक पाने में सरकार की विफलता को लेकर भी उसकी कड़ी आलोचना की।

विपक्ष के वक्ता दर वक्ता अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी की ओर इशारा करते रहे, जबकि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह द्वारा इन बातों को “तुलनात्मक रूप से छोटे मुद्दे” बताकर नजरअंदाज करने की अपील और यह आरोप लगाने को कि “राष्ट्रीय भावना” से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है—विपक्ष ने सिरे से खारिज कर दिया।

राजनाथ सिंह ने ट्रंप के दावों का सीधे तौर पर उल्लेख नहीं किया, लेकिन उन्होंने इतना ज़रूर कहा कि भारत ने किसी बाहरी दबाव में सैन्य कार्रवाई रोक दी, यह बात “पूरी तरह से निराधार” है।

विपक्ष ने सोमवार को लोकसभा में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर हुई बहस के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन बार-बार किए गए दावों को लेकर सरकार को घेर लिया, जिनमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच “संघर्षविराम” करावाया है और यह भी दावा किया था कि इस संघर्ष के दौरान पाँच लड़ाकू विमान मार गिराए गए थे।

विपक्ष ने पहलगाम आतंकी हमले को रोक पाने में सरकार की विफलता को लेकर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया।

राजनाथ सिंह ने लोकसभा में कहा, “कुछ विपक्षी सदस्य पूछ रहे हैं, ‘हमारे कितने विमान गिराए गए?’ मुझे लगता है कि उनका यह सवाल हमारे राष्ट्रीय भावनाओं का उचित प्रतिनिधित्व नहीं करता। उन्होंने यह नहीं पूछा कि हमने दुश्मन के कितने विमान गिराए।”

उन्होंने आगे कहा, “अगर उन्हें कोई सवाल पूछना है तो यह होना चाहिए—‘क्या भारत ने आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया?’ और इसका उत्तर है—‘हां’। उन्हें पूछना चाहिए—‘क्या ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा?’ इसका उत्तर भी—‘हां’। उन्हें पूछना चाहिए—‘क्या आतंकवादी सरगना मारे गए?’ और इसका उत्तर भी है—‘हां’।”

राजनाथ सिंह के बाद जब कांग्रेस नेता गौरव गोगोई बोले, तो उन्होंने सवालों की झड़ी लगा दी, जिससे सत्ता पक्ष कुछ देर के लिए शांत हो गया।

गोगोई ने पूछा, “अचानक संघर्षविराम क्यों घोषित कर दिया गया? हम प्रधानमंत्री से पूछना चाहते थे कि अगर पाकिस्तान घुटनों पर आ गया था तो फिर हमने रुकने का फैसला क्यों किया? किसके दबाव में हमने आत्मसमर्पण किया?”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में मौजूद नहीं थे। जब कांग्रेस नेता बोल रहे थे, तब रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और गृहमंत्री अमित शाह चुपचाप बैठे रहे।

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, “अमेरिकी राष्ट्रपति ने 26 बार दावा किया है कि उन्होंने व्यापार का इस्तेमाल कर भारत और पाकिस्तान को संघर्षविराम घोषित करने के लिए मजबूर किया….हम रक्षामंत्री से जानना चाहते हैं कि हमारे कितने लड़ाकू विमान गिराए गए? भारत के पास केवल 35 राफेल विमान हैं और अगर इनमें से एक भी गिरा है तो यह बहुत बड़ा नुकसान है।”
गोगोई ने कहा कि जनता और सेना को सच्चाई जाननी चाहिए।

बाद में चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए कहा कि 22 अप्रैल (जब पहलगाम हत्याकांड हुआ) और 17 जून (जब मोदी और ट्रंप के बीच फोन पर बात हुई) के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री मोदी के बीच कोई बातचीत नहीं हुई थी।

(ध्यान दें: ऑपरेशन सिंदूर 10 मई को रोका गया था।)

गोगोई ने मई में सिंगापुर में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान की उस टिप्पणी का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि “महत्वपूर्ण यह नहीं कि विमान गिराया गया, बल्कि यह है कि उन्हें क्यों गिराया गया”, और सवाल किया कि अगर सेना के अधिकारी विदेश में ऐसे विषय पर बोल सकते हैं, तो सरकार क्यों नहीं?

तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने भी मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाया।
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी, आप यह क्यों नहीं कह पाए कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो कह रहे हैं वह गलत है?”

उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी ट्रंप से डरते हैं, “जैसे ही आप अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने खड़े होते हैं, आपकी लंबाई 5 फीट हो जाती है और आपका 56 इंच का सीना 36 इंच रह जाता है। आप अमेरिकी राष्ट्रपति से इतना डरते क्यों हैं?”

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद अरविंद सावंत ने पूछा, “सरकार ने ट्रंप का नाम लेकर उसके दावे को खारिज करने वाला एक भी बयान क्यों नहीं दिया?”

उन्होंने यह भी पूछा कि सरकार ने सैन्य कार्रवाई रोककर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) को वापस लेने का अवसर खुद ही क्यों गंवा दिया?
उन्होंने कहा, “सरकार हमेशा PoK को वापस लेने की बात करती रही है। अब कह रही है कि भारत बुद्ध में विश्वास करता है, युद्ध में नहीं। यह सबसे अच्छा समय था PoK को वापस लेने का। हमने यह मौका क्यों गंवा दिया?”

गोगोई ने यह भी कहा कि गृहमंत्री शाह पहलगाम हमले की जिम्मेदारी से जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के पीछे छिपकर बच नहीं सकते, जिन्होंने हाल ही में इस हमले में खुफिया विफलता स्वीकार की है।

गोगोई बोले, “गृहमंत्री बार-बार दावा करते रहे कि अनुच्छेद 370 हटाने से आतंकवाद की कमर टूट गई है और जम्मू-कश्मीर में सब सामान्य है। लेकिन उरी, पुलवामा और अब पहलगाम जैसे हमले हो रहे हैं।”

उन्होंने पूछा, “अब पहलगाम हमले की जिम्मेदारी कौन लेगा? जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल? नहीं। अगर कोई जिम्मेदार है, तो वह आप हैं, गृहमंत्री। आप उपराज्यपाल के पीछे नहीं छिप सकते।”
सदन में शाह के इस्तीफे की मांग भी उठी।

गोगोई ने यह भी कहा कि रक्षामंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर पर तो बहुत विस्तार से बोला, लेकिन यह नहीं बताया कि आतंकवादी पहलगाम तक कैसे पहुंचे और इतना भीषण हमला कैसे कर पाए।

इस पर राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर का मकसद पाकिस्तान से युद्ध छेड़ना नहीं, बल्कि आतंकी ठिकानों को नष्ट करना और पहलगाम हमले का बदला लेना था।

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए पूछा, “तो फिर हमने युद्ध क्यों रोक दिया?”

(ज्यादातर इनपुट द टेलीग्राफ से लिए गए हैं।)

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