भारत छोड़ो आंदोलन की 83 वीं वर्षगांठ के अवसर पर देश के किसान “बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत छोड़ो- कॉरपोरेट कंपनियां खेती छोड़ो” का नारा बुलंद करेंगे। इस बार 9 अगस्त को रक्षा बंधन का पर्व होने के चलते 13 अगस्त 2025 को मांग दिवस मनाने का आह्वान किया गया है। इस दिन बहुराष्ट्रीय कंपनियों की समर्थक नीतियों का पुतला दहन करने के साथ देश भर में उठायी जा रही 11 मांगों के साथ मध्य प्रदेश में अतिवृष्टि, जल भराव, खाद बीज की काला बाजारी सहित स्थानीय मांगें भी उठायी जायेंगी।
मध्य प्रदेश संयुक्त किसान मोर्चे की कल किसान जागृति संगठन के नेता इरफ़ान जाफरी की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस आह्वान को प्रदेश के सभी जिलों में कामयाब बनाने का निर्णय लिया गया। इस संबंध में एसकेएम ने प्रदेश के जिला तथा संभागीय स्तर के सभी किसान संगठनों को इस आन्दोलन से जोड़ने का मंसूबा भी बनाया है।
मांग दिवस की मांगों में अमेरिका सहित भारत के हितों को नुकसान पहुंचाने वाले विशेष व्यापार समझौते न करने, अमेरिका द्वारा थोपे गए 25% टैरिफ का विरोध करने, नेशनल पॉलिसी फ्रेमवर्क ऑन एग्रीकल्चरल मार्केटिंग तथा नई नेशनल कोऑपरेटिव पॉलिसी रद्द करने, सी-2 फार्मूले पर सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी और सरकारी खरीद सुनिश्चित करने, समग्र कर्ज माफी करने, माइक्रो फाइनेंस कंपनियों द्वारा उत्पीड़न बंद करने, बिजली क्षेत्र के निजीकरण और स्मार्ट मीटर पर रोक लगाने, लंबित बिजली बिलों को माफ करते हुए ग्रामीण क्षेत्र को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने और ग्रामीण इलाकों को प्रति दिन 18 घंटे बिजली उपलब्ध कराने, पंजाब सहित सभी जगह लैंड पूलिंग नीति को खारिज करते हुए 2013 का भूमि अधिग्रहण अधिनियम सख्ती से लागू करने, सभी सरकारी पेंशन ₹10,000 प्रति लाभार्थी देने, कानून बनाकर पेंशन (वृद्धावस्था, विधवा, विकलांग) को मौलिक अधिकार बनाने, पुराने ट्रैक्टरों पर प्रतिबंध लगाने की सरकारी नीति को वापस लेने, वन अधिकार अधिनियम 2006 को इसकी मूल भावना में लागू करते ही आदिवासी और अन्य वनवासियों का विस्थापन तथा जंगलों की कटाई रोकने और कॉरपोरेट खनन कंपनियों और रियल एस्टेट द्वारा किये जा रहे पर्यावरणीय विनाश को बंद करने। प्राथमिक स्कूलों को बंद करने की नीति पर रोक लगाने, पुलिस और प्रशासन द्वारा समर्थित साम्प्रदायिक हिंसा को रोकने, मछुआरा समुदाय से मुफ्त में नदी में मछली पकड़ने के अधिकार छीनने का आदेश वापस लेने की मांगें शामिल हैं।
इस बैठक में इरफ़ान जाफरी के अलावा अखिलेश यादव, अशोक तिवारी (मप्र किसान सभा बीटीआर भवन) प्रहलाद बैरागी, जनक राठौर (मप्र किसान सभा शाकिर सदन), मनीष श्रीवास्तव (आल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन) रवि वर्मा प्रवक्ता, (भारतीय किसान यूनियन टिकैत) आराधना भार्गव (किसान संघर्ष समिति), उमेश तिवारी (टोको, रोको, ठोको संगठन), विजय कुमार (आल इंडिया किसान क्रांतिकारी सभा), बुद्धसेन सिंह गोंड, राम नारायण कुररिया (मप्र आदिवासी एकता महासभा), राम जगदीश दांगी (बीकेयू) आदि शामिल हुए। इनके अलावा नर्मदा बचाओ आन्दोलन, एनएपीएम, क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन ने भी अपनी सहमति जताई है ।
इस बैठक में अखिल भारतीय किसान सभा (अजय भवन) के अध्यक्ष राजेन्द्र क्षीरसागर, किसान संघर्ष समिति के डॉ. सुनीलम तथा अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव बादल सरोज ने भी राय रखी।
(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)