पटना। भाकपा (माले) महासचिव कॉ. दीपंकर भट्टाचार्य ने गया में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा फैलाए जा रहे झूठ का पर्दाफाश करते हुए कहा कि बिहार में चल रहे एसआईआर के तहत अब तक एक भी बांग्लादेशी घुसपैठिया पकड़ा नहीं गया है। फिर भी प्रधानमंत्री बार-बार झूठ बोलकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।
जहां एसआईआर के नाम पर प्रवासी मजदूरों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, वहीं मोदी जी झारखंड चुनाव की तरह ‘बांग्लादेशी घुसपैठ’ का हौवा खड़ा करने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।
हकीकत यह है कि अब तक घुसपैठ का एक भी प्रमाण सामने नहीं आया है। इसके बावजूद सरकार दुष्प्रचार में लगी है। यह पूरी कवायद लोगों को मताधिकार से वंचित करने की साजिश है।
इस परिस्थिति में बिहार की जनता को सजग रहकर हर वोट के लिए संघर्ष करना होगा। बीएलओ से लेकर चुनावी पदाधिकारियों तक, हर स्तर पर लड़ाई लड़नी होगी और भाजपा-जदयू द्वारा चुनाव चुराने की साजिश को विफल करना होगा।
उन्होंने कहा कि वोटर अधिाकार यात्रा को जबरदस्त जनसमर्थन मिल रहा है। वोट चोर, गद्दी छोड़ – आज देशभर का नारा बन चुका है। जनता से अपील है कि इस यात्रा को और मजबूती दें और बिहार विधानसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन को निर्णायक बहुमत दिलाएं-
चुनाव आयोग के अनुसार भाकपा (माले) के पास करीब 1500 बीएलए-2 हैं, लेकिन बिहार सीईओ डैशबोर्ड पर 2265 बीएलए-2 स्वीकृत दिखाए गए हैं। 25 जून से शुरू एसआईआर के दो महीने बाद भी 1168 शिकायतें लंबित हैं। यह तो चुनाव आयोग का हाल है।
माले महासचिव ने कहा कि जब हमारी पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को सिर्फ दो आपत्तियों को आधिकारिक रूप से स्वीकार करवाने में 20 दिन लग गए, तो यह राजनीतिक दलों की निष्क्रियता का नहीं, बल्कि चुनाव आयोग की पारदर्शिता के अभाव और प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।
हमारी मांग है कि भाकपा (माले) के सभी बीएलए-2 को तत्काल मान्यता दी जाए, और प्रत्येक आपत्ति पर समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)