अहमदाबाद डिमोलिशन ड्राइव: मोदी के अहमदाबाद दौरे से पहले कांग्रेस और सिविल सोसाइटी का आक्रामक मोर्चा    

अहमदाबाद। इस वर्ष के अंत में अहमदाबाद सहित सभी छह महानगर पालिकाओं के चुनाव होने वाले हैं। शहरी क्षेत्रों में मज़बूत भाजपा का सभी नगर निगमों पर कब्ज़ा है। अहमदाबाद में अब तक 20,000 से अधिक मकान अवैध निर्माण और टीपी अमल (टाउन प्लानिंग) के नाम पर तोड़े जा चुके हैं। चुनाव से पहले 8,767 मकान और तोड़े जाने का प्रस्ताव है, जिससे मध्यम वर्ग में भय और आक्रोश व्याप्त है। इसी गुस्से को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को एक दिवसीय दौरे पर अहमदाबाद आ रहे हैं। दौरे को सफल बनाने की ज़िम्मेदारी भाजपा ने कैबिनेट मंत्री ऋषिकेश पटेल और जगदीश पंचाल को सौंपी है।

प्रधानमंत्री के आगमन से पहले ही गुजरात कांग्रेस ने डिमोलिशन मुद्दे पर भाजपा को घेरना शुरू कर दिया है। सबसे अधिक डिमोलिशन प्रस्तावित क्षेत्र साबरमती है, जहाँ संभावित ओलंपिक विलेज बनाए जाने की योजना है। गुजरात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा और शहर अध्यक्ष सोनलबेन पटेल ने साबरमती क्षेत्र का दौरा कर पीड़ितों से संवाद किया और भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोला। चावड़ा के अचानक दौरे से भाजपा ही नहीं, पुलिस प्रशासन भी चिंतित है, क्योंकि एक दिन बाद ही प्रधानमंत्री मोदी का अहमदाबाद दौरा प्रस्तावित है।

साबरमती के प्रभावित लोगों ने कांग्रेस नेताओं को बताया कि नगर निगम और प्राइवेट बिल्डरों ने बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए उनके मकान तोड़ दिए। सरकार केवल 2010 से पहले के दस्तावेज़ों को मान्य कर रही है, जबकि 2012 के बाद राशन कार्ड, वोटर कार्ड सहित अधिकांश दस्तावेज़ डिजिटाइज़ होकर नए जारी किए गए हैं। इस नीति के कारण आम जनता को कोई राहत नहीं मिल पा रही है। चावड़ा ने कई किलोमीटर पैदल चलकर पीड़ितों से मुलाकात की और उन्हें आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी डिमोलिशन के मुद्दे पर सड़क से विधानसभा तक लड़ाई लड़ेगी।

साबरमती दौरे के बाद अमित चावड़ा मुस्लिम बहुल जुहापुरा पहुँचे, जहाँ एक जनसभा आयोजित की गई थी। इस सभा में बड़ी संख्या में महिलाएँ शामिल हुईं, जिन्होंने बताया कि किस प्रकार उनके घर तोड़े गए। 

महिलाओं का कहना था कि टीपी स्कीम के नाम पर नगर निगम अधिकारियों ने कार्रवाई की, जबकि बिल्डरों ने प्रशासन के साथ मिलीभगत कर गरीबों को धोखे से मकान बेचे। उन्होंने मांग की कि उनके मकानों के बदले नए मकान दिए जाएँ और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो।

सभा में सबसे पहले शहर कांग्रेस अध्यक्ष सोनल पटेल ने कहा कि “सरकार ने केवल मकान ही नहीं तोड़े, बल्कि गरीबों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट भी खड़ा कर दिया। लोग अपने घरों से सिलाई, कढ़ाई, बुनाई और छोटी दुकानों का काम कर गुजर-बसर करते थे। अब शिक्षा, शादी-विवाह और आजीविका सब संकट में हैं। उन्होंने कहा, हमारी संवेदनाएँ आपके साथ हैं और हम इस लड़ाई में पूरी तरह आपके साथ खड़े हैं।”

अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में विपक्ष के नेता शहजाद खान पठान ने कहा कि “बीजेपी के इशारे पर गरीबों के घर तोड़ने वाले आईएएस अधिकारियों में हिम्मत है तो सिंधु भवन रोड पर उद्योगपतियों के अवैध मकान, फार्महाउस और निर्माण तोड़कर दिखाएँ। अगर दम है तो अडानी एयरपोर्ट के बाहर अडानी के अवैध निर्माण पर बुलडोज़र चलाएँ। यह सरकार केवल गरीबों के घर तोड़ने का साहस रखती है।”

पूर्व विधायक लाखाभाई भरवाड़ ने कहा कि “भाजपा शासन में गरीबों के झोपड़े तोड़े जा रहे हैं, यह देखकर बहुत दुख होता है। आज इंदिरा गांधी का समय याद आता है, जब उन्होंने कानून बनाकर लोगों को उसी खेत और घर का मालिक बनाया जिसमें वे रहते थे। सरकार का पहला दायित्व लोगों को रोटी, कपड़ा और मकान देना होना चाहिए, लेकिन यह सरकार लोगों के पास जो है, उसे भी छीन रही है।”

विधायक इमरान खेड़ावाला ने कहा कि “अहमदाबाद सहित पूरे गुजरात में सिर्फ गरीबों के आशियाने उजाड़े जा रहे हैं। अमीरों के घरों तक बुलडोज़र नहीं पहुँचता। अगले महीने विधानसभा सत्र शुरू होगा, कांग्रेस इस मुद्दे को सदन के अंदर भी उठाएगी और बाहर जनता के साथ मिलकर विधानसभा का घेराव करेगी। उस समय आपको भी गांधीनगर आना होगा।”

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने कहा, “यही अहमदाबाद था जहाँ से गांधी जी ने दांडी मार्च की शुरुआत की थी। उस समय गांधी जी के साथ केवल 80 लोग थे, लेकिन दांडी पहुँचते-पहुँचते लाखों लोग जुड़ गए। अंततः अंग्रेज़ों को झुकना पड़ा। डिमोलिशन के खिलाफ लड़ाई में भी लोगों की संख्या बढ़ रही है। गांधी जी ने गोरे अंग्रेज़ों से लड़ाई लड़ी थी, आज सत्ता में बैठे काले अंग्रेज़ों के खिलाफ राहुल गांधी लड़ रहे हैं। यह नई आज़ादी की लड़ाई है, जिसे हम सब मिलकर लड़ेंगे—जेल जाने और लाठी-गोली खाने की तैयारी के साथ।”

आप को बता दें इस समय बुलडोज़र नीति के खिलाफ अहमदाबाद में जनता में बहुत नाराज़गी है, अहमदाबाद के जसोदा नगर में 14 अगस्त को नगर निगम की टीम एक मारवाड़ी परिवार की दुकान तोड़ने पहुँची थी। निगम का कहना था कि दुकान अवैध निर्माण वाली है, जबकि परिवार का आरोप है कि पिछले दो वर्षों में भाजपा नेताओं, नगर निगम अधिकारियों और कुछ आरटीआई कार्यकर्ताओं ने उनसे गैरकानूनी कार्यों के नाम पर 16 लाख रुपये वसूले हैं फिर भी इन सबका पेट नहीं भर रहा है। इसी अत्याचार से आहत होकर नर्मदाबेन कुमावत ने बुलडोज़र के सामने आत्मदाह कर लिया। 80 प्रतिशत झुलसने के बाद ईलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने पहले एफआईआर दर्ज नहीं की, लेकिन कांग्रेस नेता लालजी देसाई के हस्तक्षेप के बाद मामला दर्ज हुआ।

नर्मदाबेन की मौत के बाद भाजपा पर दबाव बढ़ गया है और कांग्रेस इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना रही है। भाजपा को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी का अहमदाबाद दौरा चुनावी लाभ देगा और जनता “मोदी मय” हो जाएगी। किंतु यह भी संकेत है कि गुजरात में भाजपा की स्थिति अब पहले जैसी मज़बूत नहीं रह गई है।

(अहमदाबाद से कलीम सिद्दीकी की रिपोर्ट।)

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