द टेलीग्राफ के संपादक संकर्षण ठाकुर नहीं रहे, श्रद्धांजलियों का लगा तांता

नई दिल्ली। भारत के श्रेष्ठ पत्रकारों में से एक संकर्षण ठाकुर का आज दिल्ली में निधन हो गया। वह 63 वर्ष के थे। संकर्षण का जन्म 13 जुलाई, 1962 को पटना में हुआ था। उन्होंने शिक्षा सेंट ज़ेवियर्स, पटना और सेंट ज़ेवियर्स, दिल्ली से प्राप्त की। दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज से उन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की।

इसके तुरंत बाद उन्होंने 1984 में संडे पत्रिका से अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत की। द टेलीग्राफ में 2009 में अपनी दूसरी पारी शुरू करने से पहले उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस, तहलका और थर्ड आई टीवी के साथ काम किया।

उनकी तीक्ष्ण लेखनी और गहन दृष्टिकोण ने दशकों तक भारतीय पत्रकारिता को समृद्ध किया। उन्होंने तीन किताबें लिखीं- एक लालू प्रसाद यादव पर, दूसरी नीतीश कुमार पर और तीसरी कारगिल युद्ध पर आधारित निबंधों का संग्रह।

श्रद्धांजलियों का ताँता लग गया है

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने अपने बयान में कहा कि “एक निडर ज़मीनी रिपोर्टर —कारगिल युद्ध मोर्चे से लेकर भोपाल त्रासदी, 1984 के सिख विरोधी दंगे और इंदिरा गांधी की हत्या तक; कश्मीर की जटिलताओं, श्रीलंकाई गृहयुद्ध और बिहार व पाकिस्तान की सामाजिक-राजनीतिक धाराओं तक जिन्होंने भारत की कुछ सबसे निर्णायक घटनाओं को जीवंत बना दिया”।

बयान में आगे कहा गया, “उनके विशिष्ट योगदान के लिए उन्हें राजनीतिक पत्रकारिता में उत्कृष्टता के लिए प्रेम भाटिया पुरस्कार (2001) और अप्पन मेनन फेलोशिप (2003) से सम्मानित किया गया।”

कांग्रेस सांसद शशि थरूर (तिरुवनंतपुरम) ने लिखा: “वरिष्ठ पत्रकार और लेखक संकर्षण ठाकुर के निधन पर शोक व्यक्त करता हूँ। वे महान पत्रकारों में से एक थे—एक ऐसे रिपोर्टर जो सचमुच भारत के राजनीतिक परिदृश्य को समझते थे और उसे अद्भुत स्पष्टता और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करते थे।”

उन्होंने आगे लिखा: “उनकी ऐतिहासिक राजनीतिक रिपोर्टिंग और उत्कृष्ट किताबें उनके तेजस्वी बौद्धिक कौशल और अडिग ईमानदारी की गवाही देती हैं। उनकी बहुत कमी खलेगी। भारतीय पत्रकारिता के लिए यह अपूरणीय क्षति है। ओम शांति।”

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पोस्ट किया: “द टेलीग्राफ के घुमंतू संपादक, शानदार पत्रकार और लेखक श्री संकर्षण ठाकुर के निधन से अत्यंत दुखी हूँ। उनकी पैनी रिपोर्टिंग, निडर राजनीतिक टिप्पणी और प्रभावशाली लेखन शैली एक स्थायी धरोहर छोड़ गई है। मेरी गहरी संवेदनाएँ और विचार उनके परिवार, मित्रों, सहकर्मियों और पाठकों के साथ हैं।”

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लिखा: “द टेलीग्राफ समाचारपत्र के संपादक संकर्षण ठाकुर के निधन से दुखी हूँ। वे एक प्रतिभाशाली और विशिष्ट पत्रकार थे, जिनकी समकालीन राजनीतिक इतिहास पर महत्वपूर्ण रचनाएँ हैं। मैं उनके परिवार, मित्रों और सहकर्मियों के प्रति संवेदना व्यक्त करती हूँ।”

माले महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य ने शोक जाहिर करते हुए कहा कि वे एक लंबी बीमारी से संघर्ष करते हुए इस दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन उनके विचार, लेखन और पत्रकारिता की निडर विरासत हमेशा हमारे साथ रहेगी। संकर्षण ठाकुर का कार्य बिहार, कश्मीर और भारत के लोकतांत्रिक भविष्य को समझने के लिए एक अनमोल दस्तावेज़ है। उन्होंने सत्ता के दबावों और प्रलोभनों से परे रहकर पत्रकारिता को एक सामाजिक दायित्व की तरह निभाया। आज जब मीडिया का एक बड़ा हिस्सा सत्ता का उपकरण बन चुका है, संकर्षण ठाकुर उन गिने-चुने पत्रकारों में से थे जो सच बोलने का जोखिम उठाते रहे — साहस, संवेदना और जनपक्षधरता के साथ।

उनका कहना था कि वे बिहार के सामाजिक-राजनीतिक यथार्थ के सबसे गहरे जानकारों में एक थे। उनका जाना न सिर्फ पत्रकारिता के लिए, बल्कि लोकतांत्रिक भारत के विचार के लिए भी एक गहरी क्षति है।

हम उनके परिवार, मित्रों और सहकर्मियों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट करते हैं। उनकी स्मृति और संघर्ष हमेशा हमारे आंदोलनों को प्रेरणा देंगे।

इस बीच आज शाम को दिल्ली के लोधी गार्डेन स्थित श्मशान स्थल पर उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया।

संकर्षण अपने पीछे पत्नी, बेटी और बेटे को छोड़ गए हैं।

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