दिल्ली की गरीब महिलाओं के खाते में कब आएगा 2,500 रुपया और सरकार कब करेगी अपने वादे पूरे?

नई दिल्ली। आज दिल्ली के जंतर मंतर पर ऐपवा द्वारा आयोजित महिला अधिकार पंचायत में सैकड़ों महिलाओं ने भागीदारी की। इस पंचायत में वजीरपुर, नजफगढ़, नरेला, ओखला, धोबी घाट, कुसुमपुर, गोला कैंप, लाल बाग समेत दिल्ली के विभिन्न इलाकों से महिलाओं ने हिस्सा लिया। 

इस मौके पर आयोजित सभा में वजीरपुर की शकुन्तला देवी ने कहा कि सरकार ने एक तरह हमसे हमारा घर छीन लिया। झुग्गी गिराकर। हम ऐसी स्थिति में दिल्ली का स्थाई पता कहां से लाएंगे। हम से सरकार बस में फ्री सेवा का अधिकार नहीं छीन सकती। धोबी घाट में रहने वाली शबनम ने कहा कि हम बहुत गरीब हैं। हमको सरकार 2,500 रुपए महीना कब देगी? आशा कर्मी रीता ने कहा कि हमको काम के सिलसिले में आना जाना पड़ता है, न ही हमको सम्मानजनक वेतन मिलता है।

सरकार हम से केवल काम ही लेती है। हमको सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं देना चाहती है। प्रवासी मजदूर रामेश्वरी ने कहा कि हमारा सारा सामान बुलडोजर की कार्यवाही में दब गया। अब हम निवास प्रमाण पत्र कहां से लाएं। छोटी दुकानदार सोनी यादव ने कहा कि इस महंगाई के दौर में दुकान चलाना और घर चलाना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में दिल्ली की सरकार महिलाओं को सिलिंडर पर 500 रुपए छूट का वादा भूल चुकी है। 

आज के महिला अधिकार पंचायत में जेएनयू विश्वविद्यालय की प्रो मौशमी बसु, पत्रकार भाषा सिंह, दलित चिंतक पूनम तुषामड, वकील अनुप्रधा ने अपनी बात रखी और दिल्ली की मेहनतकश महिलाओं के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की। 

दिल्ली एनसीआर के विभिन्न इलाकों में ऐपवा द्वारा महिला हस्ताक्षर अभियान चल रहा है। जिसमें महिलाएं बढ़-चढ़ कर भागीदारी कर रही हैं। वजीरपुर, नरेला, मुकुंदपुर, संगम विहार, गोला कैंप, ओखला, कोंडली, खोड़ा समेत दिल्ली एनसीआर के अन्य क्षेत्रों मे 10,000 से भी ज्यादा महिलाओं ने इस हस्ताक्षर अभियान में भाग लिया है। 

भाजपा सरकार के आने के बाद वो तमाम वादे भूल चुकी है, जो कि उसने जनता से किए थे। जिसमें गरीब महिलाओं को प्रति माह 2500/- देने से लेकर गैस सिलिंडर पर 500 रुपए की छूट जैसी मांगें शामिल हैं। 

हालत तो ये है कि दिल्ली सरकार ने अपने चुनावी वादों को पूरा तो नहीं ही किया। लेकिन, वो दिल्ली की सभी महिलाओं से बेशर्त बस सेवा का अधिकार छीनने पर आमादा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि अब केवल उन्हीं महिलाओं को फ्री बस सेवा मिलेगी तो जो कि दिल्ली की स्थायी निवासी होंगी।

ऐपवा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और भाजपा सरकार के इस फैसले को महिला विरोधी फैसला मानती है। क्योंकि, दिल्ली के अंदर एक बड़ी आबादी महिला प्रवासी मजदूरों की है, जो देश के दूरदराज इलाकों से दिल्ली में रोजी रोटी की तलाश करने आती है। जो किराए के मकान में रहकर अपना गुजर बसर करती हैं और दिल्ली की अर्थव्यवस्था में अपना महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।

दिल्ली एनसीआर इलाके जैसे फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद, खोड़ा, सोनीपत, पानीपत से बड़ी संख्या में महिलाएं दिल्ली काम करने आती हैं। इनसे फ्री बस सेवा छीनना एक महिला विरोधी और जन विरोधी फैसला है।

आज दिल्ली की महिलाओं की बुनियादी जरूरत है, सुरक्षित और सम्मानजनक यात्रा। इसके लिए जरूरी है कि सरकारी बसों की संख्या बढ़ाई जाए। 

भाजपा सरकार ने जिन चुनावी वादों के साथ अपनी सरकार बनाई थी, वो सभी वादे अब ठंडे बस्ते में जा चुके हैं। लेकिन, दिल्ली की महिलाओं ने ठाना है कि इसके खिलाफ एक जबरदस्त आंदोलन खड़ा करेंगी। इसी क्रम में ऐपवा द्वारा घर घर जाकर हस्ताक्षर अभियान चल रहा है!

हमारी मांग है कि दिल्ली के डीटीसी और क्लस्टर बसों में महिलाओं के लिए बेशर्त फ्री बस सेवा जारी रखी जाए। भाजपा सरकार दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान महिलाओं से किए गए सभी वादे निभाए।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)

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