उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सोमवार को सरकार से सवाल किया कि प्रभात ध्यानी को किन परिस्थितियों में और किस कानून के तहत हिरासत में लिया गया?
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष ध्यानी को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में दिल्ली जाते समय ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से रविवार शाम हिरासत में लिया गया था।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार पार्टी के एक पदाधिकारी द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर अदालत ने यह पूछा।
याचिका में कहा गया कि लगातार अनुरोध के बावजूद याचिकाकर्ता को कोई जानकारी नहीं मुहैया करवाई गई कि ध्यानी को क्यों हिरासत में लिया गया, कहां रखा गया है, कि वह किस हाल में हैं? इस तरह जानकारी देने से इनकार मनमाना, कानून के विरुद्ध और उनके कानूनी और संवैधानिक अधिकारों का हनन है।
सुनवाई के दौरान न्यायाधीश रविन्द्र मैथानी और सिद्धार्थ साह को याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि पुलिस ने फोन कर कहा है कि ध्यानी को छोड़ा जा रहा है और कागज़ी प्रक्रिया चल रही है।
सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि उन्हें रिहा कर दिया गया है और उन्हें उनकी माँ को सौंपा गया है।
अदालत ने जानना चाहा कि एक बालिग व्यक्ति को रिहा करने के बजाय मां को क्यों सौंपा गया। अदालत ने समूची प्रक्रिया के कागजात अदालत के समक्ष रखने को कहा। याचिका पर अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।
याचिका के अनुसार ध्यानी को रामनगर पुलिस की हिरासत में रखा गया था और पत्नी उमा रानी ने अपने वकील के जरिए एक ईमेल भेजकर पुलिस से जानकारी मांगी थी।
याचिकाकर्ता पुलिस थाने भी गया था, पर पुलिस ने न उनसे ज्ञापन लिया, न कोई जानकारी दी।
(जनचौक ब्यूरो)